Chapter 7 — उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्
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पाठ 7 — Class 9 Sanskrit NCERT textbook (Sharda), 'Upayam Chintayet Prajnastathapayam' — यह पाठ पञ्चतन्त्र के मित्रभेद तन्त्र से ली गई एक नीतिकथा है, जिसमें धर्मबुद्धि और पापबुद्धि नामक दो मित्रों की कहानी के माध्यम से यह नीति सिखाई जाती है कि बुद्धिमान व्यक्ति को उपाय के साथ-साथ आने वाले संकट का भी चिन्तन करना चाहिए।
- पञ्चतन्त्र की नीतिकथा — मित्रभेद से कथा — यह पाठ विष्णुशर्मा-रचित पञ्चतन्त्र के प्रथम तन्त्र 'मित्रभेद' से लिया गया है। पञ्चतन्त्र में पाँच तन्त्र हैं — मित्रभेद, मित्रसम्प्राप्ति, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाश तथा अपरीक्षितकारक। इसमें पशु-पक्षियों की कथाओं के माध्यम से नीतिशास्त्र के गहन तत्त्व सरलता से सिखाए गए हैं। प्रस्तुत कथा में एक माँ अपने पुत्र को पञ्चतन्त्र की कहानी सुनाकर 'अन्यस्य धनं तृणम् इव' के भाव की व्याख्या करती है।
- धर्मबुद्धि और पापबुद्धि — मित्रों की कथा — कस्मिंश्चिद् देशे धर्मबुद्धि और पापबुद्धि नामक दो मित्र रहते थे। पापबुद्धि ने मन में सोचा कि वह धर्मबुद्धि की सहायता से धन कमाएगा और फिर उसे छल कर सुखी हो जाएगा। दोनों ने देशान्तर जाकर प्रभूत धन अर्जित किया। वापसी पर पापबुद्धि ने घने वन में धन भूमि में गाड़ दिया, फिर रात्रि में अकेले जाकर वह धन चुरा लिया और गड्ढा भर दिया।
- न्याय की खोज — वनदेवता और महाशमी वृक्ष — पापबुद्धि ने धर्मबुद्धि पर चोरी का आरोप लगाया। धर्माधिकारी ने कहा कि मानव-साक्षी के अभाव में वनदेवता ही न्याय-निर्णय करेगी। पापबुद्धि ने अपने पिता को महाशमी नामक वृक्ष के कोटर में छिपाकर झूठी गवाही दिलाई। धर्मबुद्धि ने यह मिथ्याभाषण जानकर उस शमी-कोटर को आग से प्रज्वालित कर दिया। अर्धदग्ध अवस्था में पापबुद्धि के पिता ने स्वयं सत्य प्रकट किया और मृत्यु को प्राप्त हुए।
- केंद्रीय नीति-श्लोक और उसका अर्थ — पाठ का शीर्षक-श्लोक तीन बार उद्धृत है — 'उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्।' इसका भाव है कि बुद्धिमान व्यक्ति को कार्यसाधन के उपाय के साथ-साथ संभावित संकट (अपाय) का भी विचार करना चाहिए। पापबुद्धि ने उपाय (पिता को कोटर में छिपाना) तो सोचा, परन्तु अपाय (अग्नि-परीक्षा की सम्भावना) नहीं सोचा — इसी से उसका पतन हुआ।
- व्याकरण — क्तवतुप्रत्यय और तत्पुरुषसमास — पाठ के अन्त में दो व्याकरण बिन्दु हैं। क्तवतुप्रत्यय: भूतकाल में कर्तरि क्तवतु का प्रयोग होता है और ये पद विशेषण के रूप में लिंग-वचन के अनुसार बदलते हैं, जैसे — पठितवान्, पठितवती, पठितवत्। तत्पुरुषसमास: दो या अधिक पदों का एकपदीकरण जिसमें उत्तरपद प्रधान होता है, जैसे — शरणागत (द्वितीया), सुखान्वित (तृतीया), छात्रहित (चतुर्थी), रोगभय (पञ्चमी), देशभक्त (षष्ठी), कार्यकुशल (सप्तमी)।
Key points & formulas
- 01विधा — पञ्चतन्त्र के मित्रभेद (प्रथम) तन्त्र से ली गई गद्य-पद्यमिश्रित नीतिकथा; ग्रन्थकार विष्णुशर्मा
- 02केंद्रीय भाव — बुद्धिमान को उपाय के साथ अपाय का भी चिन्तन करना चाहिए; कुबुद्धि और छल का परिणाम विनाश होता है
- 03प्रमुख श्लोक — 'उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्।' (भावार्थ — बुद्धिमान व्यक्ति कार्य के उपाय के साथ-साथ उससे होने वाले संकट का भी विचार करता है)
- 04अन्य श्लोक — 'देशान्तरेषु बहुविधभाषावेषादि येन न ज्ञातम् / भ्रमता धरणीपीठे तस्य फलं जन्मनो व्यर्थम्॥' (भावार्थ — जो भूमि पर भ्रमण करके अनेक देशों की भाषा-वेश नहीं जानता, उसका जन्म व्यर्थ है)
- 05अन्य श्लोक — 'मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत् / आत्मवत्सर्वभूतेषु वीक्षन्ते धर्मबुद्धयः॥' (भावार्थ — धर्मात्मा लोग पराई स्त्री को माता, पराये धन को मिट्टी और सब प्राणियों को अपने समान देखते हैं)
- 06शब्दार्थ — अटव्याम् (वन में, स्त्री. स. ए. व.), अपायम् (संकट/विनाश), अहनि (दिन में, अहन् से), आपः (जल, नित्यबहुवचनान्त), उत्फुल्ललोचनाः (आश्चर्य से फटी हुई आँखों वाले), धरणीपीठे (धरती पर)
Frequently asked questions
01Upayam Chintayet Prajnastathapayam summary in Hindi
यह पाठ पञ्चतन्त्र के मित्रभेद तन्त्र से ली गई कहानी है। धर्मबुद्धि और पापबुद्धि दो मित्र देशान्तर जाकर धन कमाते हैं। पापबुद्धि धन चुराकर धर्मबुद्धि पर आरोप लगाता है। न्याय के लिए वनदेवता को साक्षी बनाया जाता है। पापबुद्धि अपने पिता को महाशमी वृक्ष के कोटर में छिपाकर झूठी गवाही दिलाता है। धर्मबुद्धि उस कोटर में आग लगा देता है, पिता स्वयं सत्य प्रकट करके मर जाता है और पापबुद्धि दण्डित होता है। नीति: बुद्धिमान को उपाय के साथ अपाय का भी चिन्तन करना चाहिए।
02Sharda Class 9 Chapter 7 PDF कहाँ मिलेगा?
Class 9 Sanskrit (Sharda) Chapter 7 'उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्' का NCERT PDF cbseprepmaster.com पर उपलब्ध है। आप वहाँ पाठ पढ़ सकते हैं और app से download भी कर सकते हैं।
03पाठ 7 का केंद्रीय श्लोक कौन सा है?
केंद्रीय श्लोक है: 'उपायं चिन्तयेत् प्राज्ञस्तथापायं च चिन्तयेत्।' इसका अर्थ है — बुद्धिमान व्यक्ति को कार्यसाधन के उपाय के साथ-साथ संभावित संकट (अपाय) का भी विचार करना चाहिए। यह श्लोक पाठ में तीन बार आता है।
04धर्मबुद्धि और पापबुद्धि की कहानी क्या है?
दोनों मित्र साथ देशान्तर गए और धन कमाया। लौटते समय पापबुद्धि ने वन में धन छिपाया, रात में अकेले जाकर चुरा लिया। जब दोनों धन लेने आए तो गड्ढा खाली मिला — पापबुद्धि ने धर्मबुद्धि पर आरोप लगाया। पापबुद्धि के पिता की महाशमी वृक्ष के कोटर से झूठी गवाही और उसके बाद धर्मबुद्धि द्वारा आग लगाने पर सत्य प्रकट हुआ। पापबुद्धि दण्डित हुआ, धर्मबुद्धि प्रशंसित।
05पञ्चतन्त्र क्या है और इसके कितने तन्त्र हैं?
पञ्चतन्त्र विष्णुशर्मा द्वारा रचित नीतिशिक्षाप्रद कथाओं का संग्रह है। इसमें पाँच तन्त्र हैं — मित्रभेद, मित्रसम्प्राप्ति, काकोलूकीयम्, लब्धप्रणाश और अपरीक्षितकारक। Class 9 का यह पाठ 'मित्रभेद' (प्रथम तन्त्र) से लिया गया है।
06'मातृवत्परदारेषु' श्लोक का अर्थ क्या है?
'मातृवत्परदारेषु परद्रव्येषु लोष्ठवत् / आत्मवत्सर्वभूतेषु वीक्षन्ते धर्मबुद्धयः॥' — धर्मात्मा लोग पराई स्त्री को माता की तरह, पराए धन को मिट्टी के ढेले की तरह और सब प्राणियों को अपने समान देखते हैं। इसे धर्मबुद्धि ने अपनी ईमानदारी सिद्ध करने के लिए कहा।
07क्तवतुप्रत्यय Class 9 Sanskrit Chapter 7 में कैसे आता है?
पाठ के व्याकरण खण्ड में क्तवतुप्रत्यय का विस्तृत विवेचन है। भूतकाल में कर्ता के साथ धातु से क्तवतु जोड़ा जाता है और ये पद विशेषण की तरह लिंग-वचन के अनुसार बदलते हैं। जैसे — दण्डितवन्तः (राजपुरुषाः), प्रशंसितवन्तः (जनाः), सम्पादितवान् (पापबुद्धि)।
08तत्पुरुषसमास के उदाहरण Chapter 7 में क्या हैं?
पाठ में सात प्रकार के तत्पुरुषसमास दिए गए हैं। जैसे — शरणागतः (द्वितीया), सुखान्वितः (तृतीया), छात्रहितम् (चतुर्थी), रोगभयम् (पञ्चमी), देशभक्तः (षष्ठी), कार्यकुशलः (सप्तमी)। तत्पुरुष में उत्तरपद प्रधान होता है।
09नित्यबहुवचनान्त शब्द Class 9 Sanskrit में क्या होते हैं?
संस्कृत में कुछ शब्द सदा बहुवचन में ही प्रयुक्त होते हैं, जैसे — आपः (जल), दाराः (पत्नी), लाजाः (खीलें), प्राणाः (प्राण), वर्षाः (वर्षाकाल)। पाठ के आदित्यचन्द्रावनिल... श्लोक में 'आपः' नित्यबहुवचन में आता है।
10धर्माधिकारी ने न्याय के लिए वनदेवता को क्यों चुना?
धर्माधिकारी ने कहा — 'ननु न कोऽपि साक्षी युवाभ्यामन्यतरस्य चौरकर्मणः।' चूँकि चोरी का कोई मानव-साक्षी नहीं था, इसलिए वनदेवता को न्याय-निर्णायक बनाया गया। पापबुद्धि ने इसी का लाभ उठाकर अपने पिता को महाशमी वृक्ष के कोटर में छिपाया।
11'देशान्तरेषु बहुविधभाषावेषादि' श्लोक का क्या भाव है?
'देशान्तरेषु बहुविधभाषावेषादि येन न ज्ञातम् / भ्रमता धरणीपीठे तस्य फलं जन्मनो व्यर्थम्॥' — जो व्यक्ति पृथ्वी पर भ्रमण करके भी अनेक देशों की भाषाएँ और वेश-भूषा नहीं जानता, उसका जन्म व्यर्थ है। पापबुद्धि ने यह श्लोक देशान्तर यात्रा के लिए धर्मबुद्धि को प्रेरित करते हुए उद्धृत किया।
12Class 9 Sanskrit Chapter 7 के अभ्यास प्रश्न कौन से हैं?
पाठ के प्रमुख प्रश्न हैं — नरस्य वृत्तं के जानन्ति? धर्मबुद्धयः किं वीक्षन्ते? प्राज्ञः किं-किं चिन्तयेत्? मानवः कदा विद्यां वित्तं शिल्पं च प्राप्नोति? इनके उत्तर पाठ के श्लोकों और गद्यांशों में निहित हैं।
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