Summary
परिशिष्ट 4 — Class 9 Sanskrit NCERT textbook (Sharda), 'Shabda-rupani' — यह परिशिष्ट संस्कृत के विविध शब्दों के रूप (सात विभक्ति × तीन वचन + सम्बोधन) की तालिकाएँ देता है, जिनमें पुंलिङ्ग, स्त्रीलिङ्ग और नपुंसकलिङ्ग तीनों लिङ्गों के उदाहरण शामिल हैं।
- शब्द रूप — संरचना — संस्कृत में प्रत्येक शब्द सात विभक्तियों (प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी, सप्तमी) और तीन वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में रूपान्तरित होता है। इसके अतिरिक्त सम्बोधन (हे!) भी दिया जाता है। प्रत्येक तालिका में कुल 21 + 3 = 24 रूप होते हैं। परिशिष्ट में अन्तकारान्त (न्, स्, त्, ज्, च्) शब्दों पर विशेष बल है।
- पुंलिङ्ग शब्द — सम्मिलित उदाहरण — इस परिशिष्ट में निम्नलिखित पुंलिङ्ग शब्दों के रूप दिए गए हैं — ब्रह्मन् (न्-कारान्त), गुणिन् (न्-कारान्त), पथिन् (न्-कारान्त), विद्वस् (स्-कारान्त), चन्द्रमस् (स्-कारान्त), पुंस् (स्-कारान्त), वेधस् (स्-कारान्त), सुहृद् (द्-कारान्त), वणिज् (ज्-कारान्त), भिषज् (ज्-कारान्त)।
- स्त्रीलिङ्ग शब्द — सम्मिलित उदाहरण — स्त्रीलिङ्ग के अन्तर्गत ये शब्द सम्मिलित हैं — वाच् (च्-कारान्त, अर्थ: वाणी), त्वच् (च्-कारान्त, अर्थ: त्वचा), रुज् (ज्-कारान्त, अर्थ: रोग), स्रज् (ज्-कारान्त, अर्थ: माला), सरित् (त्-कारान्त, अर्थ: नदी), विद्युत् (त्-कारान्त, अर्थ: बिजली), दिव् (व्-कारान्त, अर्थ: आकाश), दिश् (श्-कारान्त, अर्थ: दिशा)।
- नपुंसकलिङ्ग शब्द — सम्मिलित उदाहरण — नपुंसकलिङ्ग के अन्तर्गत ये शब्द सम्मिलित हैं — जगत् (त्-कारान्त, अर्थ: संसार), नामन् (न्-कारान्त, अर्थ: नाम), कर्मन् (न्-कारान्त, अर्थ: कार्य), मनस् (स्-कारान्त, अर्थ: मन), पयस् (स्-कारान्त, अर्थ: जल/दूध), शिरस् (स्-कारान्त, अर्थ: सिर), छन्दस् (स्-कारान्त, अर्थ: वेद/छन्द), चर्मन् (न्-कारान्त, अर्थ: चमड़ा) तथा चक्षुस् (स्-कारान्त, अर्थ: आँख — आंशिक)।
Key points & formulas
- 01शब्द रूप — 7 विभक्ति × 3 वचन + सम्बोधन = प्रत्येक शब्द के 24 रूप
- 02पुंलिङ्ग शब्द — ब्रह्मन्, गुणिन्, पथिन्, विद्वस्, चन्द्रमस्, पुंस्, वेधस्, सुहृद्, वणिज्, भिषज्
- 03स्त्रीलिङ्ग शब्द — वाच्, त्वच्, रुज्, स्रज्, सरित्, विद्युत्, दिव्, दिश्
- 04नपुंसकलिङ्ग शब्द — जगत्, नामन्, कर्मन्, मनस्, पयस्, शिरस्, छन्दस्, चर्मन्, चक्षुस्
- 05अन्तकारान्त वर्गीकरण — न्-कारान्त (ब्रह्मन्/नामन्), स्-कारान्त (विद्वस्/मनस्), त्-कारान्त (सरित्/जगत्), ज्-कारान्त (वणिज्/रुज्), च्-कारान्त (वाच्/त्वच्)
- 06पथिन् शब्द विशेष — प्रथमा एकवचन: पन्थाः; इसके रूप नियमित न्-कारान्त से भिन्न होते हैं
- 07विद्वस् — विद्वान्/विद्वांसः रूप; बहुपठित परीक्षा-उपयोगी शब्द
- 08पुंस् — पुमान् (प्रथमा एकवचन); अनियमित रूपान्तरण वाला शब्द
- 09सरित् और विद्युत् — दोनों त्-कारान्त स्त्रीलिङ्ग; परीक्षा में अक्सर पूछे जाते हैं
- 10नामन् और कर्मन् — न्-कारान्त नपुंसकलिङ्ग; सम्बोधन: हे नामन्/हे नाम
Frequently asked questions
01शब्द रूप किसे कहते हैं?
संस्कृत में किसी शब्द के विभक्ति और वचन के अनुसार बदले हुए रूपों को शब्द रूप कहते हैं। प्रत्येक शब्द के सात विभक्तियों और तीन वचनों (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) में रूप बनते हैं।
02संस्कृत में कितनी विभक्तियाँ होती हैं?
संस्कृत में सात विभक्तियाँ होती हैं — प्रथमा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पञ्चमी, षष्ठी और सप्तमी। इनके अतिरिक्त सम्बोधन भी एक रूप होता है।
03Sharda Class 9 shabd roop PDF में कौन-कौन से शब्द हैं?
शारदा कक्षा 9 के परिशिष्ट 4 में ब्रह्मन्, गुणिन्, पथिन्, विद्वस्, चन्द्रमस्, पुंस्, वेधस्, सुहृद्, वणिज्, भिषज् (पुंलिङ्ग); वाच्, त्वच्, रुज्, स्रज्, सरित्, विद्युत्, दिव्, दिश् (स्त्रीलिङ्ग); और जगत्, नामन्, कर्मन्, मनस्, पयस्, शिरस्, छन्दस् (नपुंसकलिङ्ग) के रूप दिए गए हैं।
04ब्रह्मन् शब्द के रूप (brahman shabd roop) कैसे बनते हैं?
ब्रह्मन् न्-कारान्त पुंलिङ्ग शब्द है। प्रथमा एकवचन: ब्रह्मा; द्विवचन: ब्रह्माणौ; बहुवचन: ब्रह्माणः। तृतीया एकवचन: ब्रह्मणा। सप्तमी एकवचन: ब्रह्मणि। सम्बोधन: हे ब्रह्मन्।
05गुणिन् शब्द के रूप कैसे होते हैं?
गुणिन् भी न्-कारान्त पुंलिङ्ग शब्द है। द्वितीया एकवचन: गुणिनम्; तृतीया एकवचन: गुणिना; चतुर्थी एकवचन: गुणिने; षष्ठी एकवचन: गुणिनः; सप्तमी एकवचन: गुणिनि। सम्बोधन: हे गुणिन्।
06संस्कृत विभक्ति के क्या अर्थ हैं?
प्रथमा = कर्ता (Subject), द्वितीया = कर्म (Object), तृतीया = करण (Instrument/by), चतुर्थी = सम्प्रदान (for/to), पञ्चमी = अपादान (from), षष्ठी = सम्बन्ध (of/possession), सप्तमी = अधिकरण (in/on/at)।
07सरित् शब्द के रूप कैसे होते हैं?
सरित् त्-कारान्त स्त्रीलिङ्ग शब्द (नदी) है। प्रथमा एकवचन: सरिद्/सरित्; द्विवचन: सरितौ; बहुवचन: सरितः। द्वितीया एकवचन: सरितम्; तृतीया एकवचन: सरिता। सम्बोधन: हे सरिद्/हे सरित्।
08नामन् शब्द के रूप (naman shabd roop) क्या हैं?
नामन् न्-कारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द है। प्रथमा एकवचन: नाम; द्विवचन: नाम्नी/नामनी; बहुवचन: नामानि। तृतीया एकवचन: नाम्ना; षष्ठी बहुवचन: नाम्नाम्; सप्तमी एकवचन: नाम्नि/नामनि। सम्बोधन: हे नामन्/हे नाम।
09पथिन् शब्द विशेष क्यों है?
पथिन् (मार्ग) न्-कारान्त पुंलिङ्ग शब्द है, किन्तु इसके रूप अनियमित हैं। प्रथमा एकवचन: पन्थाः; द्विवचन: पन्थानौ; बहुवचन: पन्थानः। तृतीया एकवचन: पथा; षष्ठी बहुवचन: पथाम्। यह शब्द परीक्षा में प्रायः पूछा जाता है।
10छन्दस् शब्द के रूप कैसे होते हैं?
छन्दस् स्-कारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द (वेद/छन्द) है। प्रथमा एकवचन: छन्दः; द्विवचन: छन्दसी; बहुवचन: छन्दांसि। तृतीया एकवचन: छन्दसा; चतुर्थी एकवचन: छन्दसे। सप्तमी एकवचन: छन्दसि; बहुवचन: छन्दःसु/छन्दस्सु।
11वणिज् शब्द के रूप क्या हैं?
वणिज् (व्यापारी) ज्-कारान्त पुंलिङ्ग शब्द है। प्रथमा एकवचन: वणिग्/वणिक्; द्विवचन: वणिजौ; बहुवचन: वणिजः। द्वितीया एकवचन: वणिजम्; चतुर्थी एकवचन: वणिजे; सप्तमी बहुवचन: वणिक्षु।
12Class 9 Sanskrit परिशिष्ट 4 में कितने लिङ्ग हैं?
परिशिष्ट 4 में तीनों लिङ्गों के शब्द रूप दिए गए हैं — पुंलिङ्ग (10 शब्द), स्त्रीलिङ्ग (8 शब्द) और नपुंसकलिङ्ग (9 शब्द)। प्रत्येक लिङ्ग के अन्तकारान्त वर्ग के विविध उदाहरण सम्मिलित हैं।
13मनस् शब्द के रूप (manas shabd roop) क्या हैं?
मनस् स्-कारान्त नपुंसकलिङ्ग शब्द (मन) है। सप्तमी एकवचन: मनसि; द्विवचन: मनसोः; बहुवचन: मनःसु/मनस्सु। सम्बोधन रूप भी परिशिष्ट में उपलब्ध है।
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