Summary
परिशिष्ट 1 — Class 9 Sanskrit NCERT textbook (Sharda), 'Anvayah' — अन्वय का अर्थ है श्लोक के पदों का परस्पर सम्बन्ध जानकर उन्हें सरल गद्य क्रम में रखना; इसके लिए दण्डान्वय और खण्डान्वय — ये दो विधियाँ बतायी गयी हैं।
- अन्वय — परिभाषा और आवश्यकता — श्लोकों में कर्तृपद, कर्मपद, विभक्त्यन्त पद और क्रियापद छन्द के अनुसार आगे-पीछे होते हैं, जिससे पदों का परस्पर सम्बन्ध (अन्वय) समझना कठिन हो जाता है। इस कठिनाई को दूर करने के लिए एक निश्चित क्रम जानना आवश्यक है, जिसके बाद ही श्लोक का अर्थ समझा जा सकता है।
- दण्डान्वयविधिः — क्रम और नियम — दण्डान्वय में पूरे श्लोक का एक साथ अन्वय किया जाता है। मूल क्रम है — कर्तृपद, कर्मपद, फिर क्रियापद। विशेषण अपने विशेष्य से पूर्व रखे जाते हैं। अव्यय, कृदन्तपद (क्त्वा, णमुल्, ल्यप् आदि) और तृतीयादि विभक्त्यन्त पद जिस पद से सम्बद्ध हों उससे पूर्व या बाद में योजित किए जाते हैं। यदि श्लोक में कर्तृपद या क्रियापद उपस्थित न हो तो उसे 'अध्याहार' (सुप्त पद) के रूप में जोड़ा जाता है। उदाहरण श्लोक में 'केचन' और 'भवति' तथा 'यथा' इसी प्रकार अध्याहृत किए गए हैं।
- खण्डान्वयविधिः — प्रश्नोत्तर पद्धति — खण्डान्वय में पहले श्लोक का पूरा अन्वय एक साथ नहीं किया जाता, बल्कि प्रतिपद परस्पर अन्वय किया जाता है। यह प्रश्नोत्तर माध्यम से होता है — पहले क्रियापद से आकाङ्क्षा-प्रश्न किया जाता है, फिर कर्ता, कर्म, विशेषण, तृतीयादि विभक्त्यन्त पद आदि के विषय में प्रश्न होते हैं। इस प्रकार छात्र क्रमशः पदों को जोड़ते हुए अन्त में समग्र श्लोक का अन्वय स्वयं कर लेते हैं। इस विधि को 'आकाङ्क्षाविधि' भी कहते हैं।
- अन्वय के चार सहकारी कारण — खण्डान्वय को भली-भाँति समझने के लिए स्रोत में चार सहकारी कारण बताए गए हैं: (१) आकाङ्क्षा — अपेक्षित विषय जानने की इच्छा; पूर्वपद या अग्रिमपद जानने की जिज्ञासा। (२) योग्यता — पदों के बीच परस्पर सम्बन्ध की पात्रता; जैसे 'गगने पुष्पं विकसति' में योग्यता का अभाव है। (३) आसत्तिः — पदों का परस्पर सामीप्य (निकटता); पदों के बीच अनुचित विराम से आसत्ति नष्ट होती है। (४) तात्पर्यम् — शब्द-विशेष से अर्थ-विशेष जानने की इच्छा; जैसे 'शतायुर्भव' का सही अर्थ 'चिरञ्जीवी भव' है, 'सौ वर्ष जीओ' नहीं।
Key points & formulas
- 01अन्वय — श्लोक के पदों का परस्पर सम्बन्ध जानकर उन्हें सरल गद्य-क्रम में रखना।
- 02अन्वय की दो विधियाँ — दण्डान्वयविधिः और खण्डान्वयविधिः।
- 03दण्डान्वय का क्रम — विशेषण → विशेष्य → (अव्यय/कृदन्त/तृतीयादि) → कर्तृपद → कर्मपद → क्रियापद।
- 04अध्याहार — जो कर्तृपद या क्रियापद श्लोक में उपस्थित न हो, उसे विचारकर जोड़ना ('सुप्त पद')।
- 05उदाहरण — 'शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खाः…' श्लोक में 'केचन', 'भवति' और 'यथा' अध्याहृत किए गए।
- 06खण्डान्वय में पहले क्रियापद से प्रश्न, फिर कर्ता, कर्म, विशेषण आदि के क्रम में प्रश्नोत्तर होते हैं।
- 07आकाङ्क्षा — क्रियापद सुनकर 'कः?', 'किम्?', 'कुत्र?', 'कदा?', 'कथम्?' आदि जिज्ञासाएँ उठना।
- 08योग्यता — पदों में परस्पर अर्थसङ्गति होनी चाहिए; 'गगने पुष्पं विकसति' में योग्यता का अभाव है।
- 09आसत्तिः — पदों के उच्चारण में अनुचित विराम न हो; निरन्तर कथन से ही पदों में सामीप्य बनता है।
- 10तात्पर्यम् — 'शतायुर्भव' = 'चिरञ्जीवी भव'; शब्द का सही अर्थ जाने बिना अन्वय भ्रामक हो सकता है।
- 11खण्डान्वय के प्रश्न सामान्यतः द्विपद, त्रिपद या चतुष्पद (लघु) होते हैं।
- 12उदाहरण श्लोक — 'सम्पूर्णकुम्भो न करोति शब्दम्…' का खण्डान्वय प्रश्नोत्तर माध्यम से किया गया।
Frequently asked questions
01अन्वय किसे कहते हैं?
श्लोक में विद्यमान पदों का परस्पर सम्बन्ध सरल रूप से जानने के क्रम को अन्वय कहते हैं। यही अन्वय श्लोक का अर्थ समझने का आधार है।
02अन्वय की परिभाषा क्या है?
श्लोकों में कर्तृपद, कर्मपद और क्रियापद छन्द के अनुसार आगे-पीछे होते हैं। उन पदों का परस्पर सम्बन्ध (अन्वय) जानकर सरल गद्य-क्रम में रखना ही अन्वय की परिभाषा है।
03श्लोक का अन्वय कैसे करें उदाहरण सहित?
'शास्त्राण्यधीत्यापि भवन्ति मूर्खाः…' श्लोक का दण्डान्वय इस प्रकार है — (केचन) शास्त्राणि अधीत्य अपि मूर्खाः भवन्ति। यः क्रियावान् सः पुरुषः तु विद्वान् (भवति)। सुचिन्तितम् ओषधं नाममात्रेण (यथा) आतुराणाम् अरोगं न करोति। यहाँ 'केचन', 'भवति' और 'यथा' अध्याहृत किए गए।
04दण्डान्वय और खण्डान्वय में क्या अन्तर है?
दण्डान्वय में पूरे श्लोक का एक साथ अन्वय (कर्ता→कर्म→क्रिया क्रम से) किया जाता है। खण्डान्वय में पहले पूरे श्लोक का अन्वय नहीं होता — प्रतिपद प्रश्नोत्तर के माध्यम से क्रमशः पदों को जोड़ा जाता है और अन्त में समग्र अन्वय स्वयं बनता है।
05दण्डान्वय में पदों का क्रम क्या होता है?
दण्डान्वय में मूल क्रम है — पहले विशेषण (अपने विशेष्य से पूर्व), फिर कर्तृपद, उसके बाद कर्मपद और सबसे अन्त में क्रियापद। अव्यय, कृदन्त और तृतीयादि विभक्त्यन्त पद जिस पद से सम्बद्ध हों उसके आस-पास रखे जाते हैं।
06अध्याहार क्या होता है?
जब श्लोक में कर्तृपद या क्रियापद उपस्थित न हो, तो उसे विचारकर जोड़ा जाता है — उसे 'सुप्त पद' या 'अध्याहार' कहते हैं। जैसे 'शास्त्राण्यधीत्यापि…' श्लोक में 'केचन' और 'भवति' अध्याहृत हैं।
07खण्डान्वय की विधि क्या है?
खण्डान्वय में पहले श्लोक का पदच्छेद किया जाता है, फिर शिक्षक प्रश्नोत्तर के माध्यम से — पहले क्रियापद से, फिर कर्ता, कर्म, विशेषण, तृतीयादि विभक्त्यन्त आदि से — छात्रों को क्रमशः पद जोड़ने पर प्रेरित करते हैं। इसीलिए इसे 'आकाङ्क्षाविधि' भी कहते हैं।
08आकाङ्क्षा, योग्यता, आसत्ति और तात्पर्य क्या हैं?
ये अन्वय के चार सहकारी कारण हैं। (१) आकाङ्क्षा — पद जानने की जिज्ञासा। (२) योग्यता — पदों में अर्थसङ्गति। (३) आसत्ति — पदों का परस्पर सामीप्य (निकटता)। (४) तात्पर्य — शब्द का सम्यक् अर्थ जानने की इच्छा।
09Sharda Class 9 Anvaya PDF — यह परिशिष्ट किस पुस्तक में है?
यह 'अन्वयः' परिशिष्ट Class 9 Sanskrit NCERT पाठ्यपुस्तक 'शारदा' (Sharda) में परिशिष्टम् १ के रूप में है। इसमें दण्डान्वय और खण्डान्वय दोनों विधियाँ उदाहरण सहित बतायी गई हैं।
10पदच्छेद क्या होता है और यह अन्वय से कैसे सम्बन्धित है?
श्लोक के सन्धि-युक्त पदों को अलग-अलग करना पदच्छेद कहलाता है। अन्वय करने से पहले पदच्छेद आवश्यक है, क्योंकि अलग पद जाने बिना उनका परस्पर सम्बन्ध (अन्वय) नहीं किया जा सकता।
11योग्यता के अभाव का उदाहरण क्या है?
स्रोत में दिया गया उदाहरण है — 'गगने पुष्पं विकसति।' यहाँ आकाश में फूल खिलना असम्भव है, अतः पदों में योग्यता (अर्थसङ्गति) का अभाव है।
12तात्पर्य का उदाहरण क्या है?
स्रोत में दिया गया उदाहरण है — 'शतायुर्भव' का अर्थ 'सौ वर्ष जीओ' नहीं, बल्कि 'चिरञ्जीवी भव' है। शब्द का सम्यक् अर्थ जाने बिना अन्वय भ्रामक हो जाता है।
More chapters in Sharda (शारदा)
Read Chapter 12 of Sharda (शारदा), the Class 9 Sanskrit NCERT textbook (2026-27 edition), online for free: the complete chapter as published by NCERT with every diagram, solved example and exercise, with a chapter summary, question answers and revision notes. Open the NCERT PDF above, or browse all NCERT Class 9 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android