Chapter 9 — कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः
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पाठ 9 — Class 9 Sanskrit NCERT textbook (Sharda), 'Kritam Pratikritam Bhuyadesha Dharmah' — यह पाठ महामहोपाध्यायेन श्रीरङ्गनाथशर्मणा विरचित संस्कृत रूपक 'एकचक्रम्' के तृतीय-चतुर्थ अंकों से उद्धृत है, जिसमें भीमसेन एकचक्रनगर के निवासियों की रक्षा हेतु बकासुर का वध करते हैं और यह सनातन धर्म स्थापित होता है कि उपकार का प्रत्युपकार करना मानव का शाश्वत कर्तव्य है।
- रूपक-परिचय एवं कथासूत्र — यह पाठ महाभारत के बकासुरवध-प्रसङ्ग पर आधारित संस्कृत रूपक 'एकचक्रम्' से लिया गया है, जिसकी रचना महामहोपाध्यायेन श्रीरङ्गनाथशर्मणा (जन्म ७.४.१९२६, नडव्ल्ली ग्रामः, कर्णाटकराज्यम्; देहत्यागः २०१४) ने की थी। पाण्डव एकचक्रनगर में एक ब्राह्मण के घर निवास करते हैं। वहाँ के निकटवर्ती पर्वत पर बकनामा दैत्य रहता है; सन्धि-नियमानुसार नगरवासी प्रतिदिन एक व्यक्ति को उसके भोजन के लिए भेजते हैं। उस दिन उसी ब्राह्मण-परिवार की बारी थी।
- भीम का निर्णय एवं प्रतिज्ञा — 'कृतं प्रतिकृतम्' — कुन्ती यह जानकर कि ब्राह्मण ने उनके परिवार का पालन किया है, अपने पुत्रों में से एक को बकासुर के पास भेजने की प्रतिज्ञा करती हैं। भीम स्वयं जाने को उद्यत होते हैं और यह श्लोक उच्चारण करते हैं: 'भक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृता वयम्। कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः ॥' — अर्थात् नागरिकों ने हमें भोजन देकर उपकार किया; उसका प्रत्युपकार करना ही शाश्वत धर्म है।
- बकासुर-वध एवं धर्म-विमर्श — भीमसेन मृष्टान्नभाण्ड-शकट लेकर बकासुर के पास पहुँचते हैं। जब बक भोजन माँगता है तो भीम घोषित करते हैं कि वे उसे मारने आए हैं। बकासुर और भीमसेन के मध्य एक महत्त्वपूर्ण धर्म-विमर्श होता है: 'नरभक्षणं नाम मांसाशिनां राक्षसानां धर्मः' (बक का तर्क) और 'नररक्षणं नाम भूमिपालानां क्षत्रियाणां धर्मः' (भीम का उत्तर)। अन्त में मल्लयुद्ध में भीम बकासुर का वध कर देते हैं।
- कवि-परिचय एवं ग्रन्थ-सूची — श्रीरङ्गनाथशर्मणः उपाधयः — महामहोपाध्यायः, विद्यावारिधिः, व्याकरणशास्त्रप्रवीणः। वे राष्ट्रप्रशस्ति तथा राज्यप्रशस्ति से सम्मानित थे। बेड्गलरुस्थे चामराजेन्द्र-संस्कृत-महाविद्यालये में व्याकरणप्राध्यापक रहे। उनकी प्रमुख कृतियाँ हैं: बाहनलिविजयम्, एकचक्रम्, कुसुमाञ्जलिः, श्रीशङ्करचरितामृतम्। उन्होंने परे शत (सैकड़ों) ग्रन्थ एवं लेख लिखे।
Key points & formulas
- 01विधा — संस्कृत रूपक (नाटक); महामहोपाध्यायेन श्रीरङ्गनाथशर्मणा विरचित 'एकचक्रम्' के तृतीय-चतुर्थ अंकों से उद्धृत
- 02केंद्रीय भाव — उपकार का प्रत्युपकार करना सनातन धर्म है; क्षत्रिय का धर्म नररक्षण है, नरभक्षण नहीं
- 03प्रमुख श्लोक — 'भक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृता वयम्। कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः ॥' (भावार्थ — नगरवासियों ने हमें भोजन देकर चिरकाल से उपकृत किया है; किया हुआ उपकार प्रत्युपकार में परिणत हो — यही शाश्वत धर्म है)
- 04द्वितीय श्लोक — 'इमौ हि पीवरौ बाहू सहायौ सहजौ मम। बकं विध्वंसयिष्यामि सिंहः क्षुद्रमृगं यथा ॥' (भावार्थ — ये दोनों पुष्ट भुजाएँ मेरी सहज सहायक हैं; जैसे सिंह तुच्छ वन्यप्राणी को, वैसे ही मैं बक को नष्ट करूँगा)
- 05शब्दार्थ — आयोधनम् = युद्धम्; असुरः = दैत्यः; विप्रः = ब्राह्मणः; हुताशनः = अग्निः; तनयः = पुत्रः; पीवरौ = पुष्टौ; पर्यायक्रमेण = बारी-बारी से; मृष्टान्नम् = स्वादिष्ट भोजन; बाढम् = हाँ (सहमति)
Frequently asked questions
01Kritam Pratikritam summary in Sanskrit Class 9
यह पाठ 'एकचक्रम्' नामक संस्कृत रूपक से उद्धृत है। पाण्डव एकचक्रनगर में एक ब्राह्मण-परिवार के यहाँ रहते हैं। उस परिवार की बारी आती है बकासुर को बलि देने की। कुन्ती अपने एक पुत्र को भेजने की प्रतिज्ञा करती हैं। भीम स्वयं जाकर बकासुर का वध करते हैं। केंद्रीय विचार यह है: 'कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः' — उपकार का प्रत्युपकार करना शाश्वत धर्म है।
02Sharda Class 9 Chapter 9 PDF कहाँ मिलेगी?
NCERT की शारदा (Sanskrit) कक्षा 9 का पाठ 9 'कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः' cbseprepmaster.com पर PDF के रूप में उपलब्ध है। आप NCERT Textbooks सेक्शन में Class 9 → Sanskrit → Sharda के अंतर्गत Chapter 9 खोज सकते हैं।
03'कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः' का अर्थ क्या है?
इस श्लोक का अर्थ है — जो उपकार किया गया हो उसका प्रत्युपकार करना चाहिए; यही शाश्वत (सनातन) धर्म है। भीम यह श्लोक उस समय कहते हैं जब वे ब्राह्मण के उपकार का बदला चुकाने के लिए बकासुर का सामना करने जाते हैं।
04'एकचक्रम्' रूपक की रचना किसने की?
एकचक्रम् की रचना महामहोपाध्यायेन श्रीरङ्गनाथशर्मणा ने की। उनका जन्म ७.४.१९२६ को नडव्ल्ली ग्राम, शिवमोग्गमण्डलम्, कर्णाटकराज्यम् में हुआ और उन्होंने २०१४ में देह त्याग किया।
05बकासुर और भीमसेन के मध्य धर्म-विमर्श क्या है?
बकासुर का तर्क था: 'नरभक्षणं नाम मांसाशिनां राक्षसानां धर्मः' — नरभक्षण राक्षसों का धर्म है। भीमसेन का उत्तर था: 'नररक्षणं नाम भूमिपालानां क्षत्रियाणां धर्मः' — नररक्षण क्षत्रियों का धर्म है। यह नाटक का केंद्रीय धर्म-वाद है।
06कुन्ती ने क्या प्रतिज्ञा की थी?
कुन्ती ने ब्राह्मण-परिवार के प्रति कृतज्ञतावश प्रतिज्ञा की कि अपने पुत्रों में से किसी एक को बकासुर के पास भेजेंगी। पाठ में है: 'स्वपुत्रेषु एकं बकासुरस्य समीपं प्रेषयामीति कुन्ती प्रतिज्ञां कृतवती।'
07युधिष्ठिर ने भीम के जाने का विरोध क्यों किया?
युधिष्ठिर ने कहा: 'यस्य वीरस्य भुजबलमाश्रित्य वयं सुखं शेमहे, यच्च चिन्तयन् दुर्योधनो निद्रां न लभते, तस्य भीमस्य प्रेषणं कथं नु त्वया सङ्कल्पितम्?' — जिस भीम के बल के आसरे हम सुखपूर्वक रहते हैं और जिसकी चिन्ता से दुर्योधन भी नहीं सो पाता, उसे कैसे भेज दिया?
08पाठ में 'सनातन धर्म' से क्या अभिप्राय है?
पाठ में सनातन धर्म का तात्पर्य है — प्राप्त उपकार का प्रत्युपकार करना। भीम के शब्दों में: 'भक्षप्रदानेन चिरं परैरुपकृता वयम्। कृतं प्रतिकृतं भूयादेष धर्मः सनातनः ॥' अर्थात् नागरिकों ने हमें भोजन देकर उपकार किया, इसलिए उनकी रक्षा करना हमारा शाश्वत कर्तव्य है।
09एकचक्रम् रूपक का कथावस्तु किस ग्रन्थ पर आधारित है?
एकचक्रम् रूपक का कथावस्तु महाभारत के बकासुरवध-प्रसङ्ग पर आधारित है। पाठ में स्पष्ट लिखा है: 'महाभारते प्रतिपादितः बकासुरवधः अस्य कथावस्तु।'
10भीम ने अर्जुन को साथ आने से मना क्यों किया?
भीम ने अर्जुन को साथ लेने से यह कहकर मना किया: 'न हि खरदंष्ट्रः मृगाधिपः सहायमपेक्षते' — तीखे दाँतोंवाला सिंह (मृगों का राजा) किसी सहायक की अपेक्षा नहीं करता। साथ ही उन्होंने कहा: 'इमौ हि पीवरौ बाहू सहायौ सहजौ मम' — ये दोनों पुष्ट भुजाएँ ही मेरी जन्मसिद्ध सहायिकाएँ हैं।
11पाठ में श्रीरङ्गनाथशर्मणः की कौन-सी कृतियाँ उल्लिखित हैं?
पाठ में उनकी निम्न प्रसिद्ध कृतियाँ बताई गई हैं: बाहनलिविजयम्, एकचक्रम्, कुसुमाञ्जलिः, श्रीशङ्करचरितामृतम्। उन्होंने व्याकरणशास्त्र, अलङ्कारशास्त्र और अद्वैत-वेदान्त में भी विशेष दक्षता प्राप्त की थी।
12पाठ में दिए गए दोनों श्लोकों का भावार्थ क्या है?
पाठ में 'अत्र इदम् अवधेयम्' के अंतर्गत दोनों श्लोकों का भावार्थ दिया गया है। (१) 'भक्षप्रदानेन...' — नगरवासियों ने भोजन देकर बहुकाल से हमारा उपकार किया; वह उपकार प्रत्युपकार में परिणत हो, यही शाश्वत धर्म है। (२) 'इमौ हि पीवरौ...' — ये पुष्ट भुजाएँ मेरी सहज सहायक हैं; मैं बकासुर को उसी प्रकार नष्ट करूँगा जैसे सिंह तुच्छ वन्यप्राणी को।
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