सत्यं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्
पाठ 1 — Class 9 Sanskrit NCERT textbook (Sharda), 'Satyam Shivam Sundaram Sanskritam' — यह एक गीत है जिसमें कवि पण्डित वासुदेव-शास्त्री द्विवेदी ने छः पदों में संस्कृत भाषा की महिमा का वर्णन किया है — भारतीय एकता, सद्गुण, विश्वबन्धुत्व, शान्ति और धर्म-काम-अर्थ-मोक्ष की प्राप्ति में संस्कृत की भूमिका।
- 1विधा — गीत (कविना सुन्दरं गीतं प्रस्तुतम् — स्रोत में स्पष्ट उल्लेख)
- 2कवि परिचय — पण्डित वासुदेव-शास्त्री द्विवेदी; वाराणसी स्थित सार्वभौमसंस्कृतप्रचारकार्यालय के संस्थापक; सरल संस्कृत में अनेक ग्रन्थ रचे; परमार्थसुधा नामक संस्कृत पत्रिका के सम्पादक
- 3केंद्रीय भाव — संस्कृत भाषा सत्य है, शिव है, और सुन्दर है — 'सत्यनिष्ठं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्' (पद ५); संस्कृत से भारतीयैकता, मानस-परिष्कार, विश्वशान्ति और पुरुषार्थ-चतुष्टय सिद्ध होता है
- 4संरचना — गीत में ६ पद हैं; प्रत्येक पद में ४ पंक्तियाँ हैं और हर पंक्ति 'संस्कृतम्' पर समाप्त होती है
- 5प्रमुख श्लोक — 'धर्मकामार्थमोक्षप्रदं संस्कृतम्। ऐहिकामुष्मिकोत्कर्षदं संस्कृतम्। कर्मदं ज्ञानदं भक्तिदं संस्कृतम्। सत्यनिष्ठं शिवं सुन्दरं संस्कृतम्॥ ५॥' (भावार्थ — संस्कृत धर्म, काम, अर्थ और मोक्ष प्रदान करती है; इस लोक और परलोक में उन्नति देती है; कर्म, ज्ञान और भक्ति तीनों का मार्ग दिखाती है — इसीलिए यह सत्य, शिव और सुन्दर है)
