Summary
'Pariksha' Class 6 Hindi (Malhar) ki ek prasiddh kahani hai jise Premchand ne likha hai — यह कहानी सिद्ध करती है कि सच्ची योग्यता डिग्री या दिखावे में नहीं, बल्कि दया, आत्मबल और उदारता में होती है।
देवगढ़ रियासत के वृद्ध दीवान सुजानसिंह चालीस वर्षों की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होना चाहते हैं। राजा उन्हें नया दीवान खोजने की शर्त पर अनुमति देते हैं। अखबारों में विज्ञापन निकलता है और सैकड़ों उम्मीदवार देश भर से आते हैं। सभी एक महीने तक अच्छे आचरण का दिखावा करते हैं। हॉकी के खेल के बाद युवक जानकीनाथ स्वयं घायल होते हुए भी कीचड़ में फँसे एक गरीब किसान की गाड़ी निकालते हैं, जबकि बाकी खिलाड़ी उदासीन रहते हैं। अंत में दरबार में सुजानसिंह जानकीनाथ को दीवानी सौंपते हैं — उनकी दया, आत्मबल और उदारता ही उनकी असली परीक्षा थी।
Key points & formulas
- 01लेखक — प्रेमचंद (1880–1936); हिंदी के महान कथा-सम्राट, वास्तविक नाम धनपतराय
- 02विधा — कहानी (गद्य)
- 03केंद्रीय भाव — सच्ची योग्यता डिग्री या दिखावे में नहीं, बल्कि दया, आत्मबल और उदारता में होती है
- 04मुख्य पात्र — दीवान सुजानसिंह (परीक्षक), युवक जानकीनाथ (विजेता उम्मीदवार), किसान
- 05मुख्य घटना — जानकीनाथ चोट के बावजूद कोट उतारकर कीचड़ में घुटनों तक धँसकर किसान की गाड़ी निकालते हैं; शेष उम्मीदवार उदासीन बने रहते हैं
- 06कहावत — "गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है" — परिश्रम और साहस से ही सफलता मिलती है
- 07कठिन शब्दार्थ — नेकनामी = अच्छी प्रतिष्ठा/सुनाम; उदारता = दरियादिली; आत्मबल = भीतरी शक्ति; वात्सल्य = स्नेह/ममता; मंदाग्नि = कमज़ोर पाचन-शक्ति
Frequently asked questions
01Pariksha का सारांश क्या है?
देवगढ़ के वृद्ध दीवान सुजानसिंह सेवानिवृत्त होना चाहते हैं। राजा उन्हें नया दीवान खोजने की शर्त पर अनुमति देते हैं। विज्ञापन देखकर सैकड़ों उम्मीदवार आते हैं और एक महीने तक अच्छे व्यवहार का दिखावा करते हैं। हॉकी के खेल के बाद युवक जानकीनाथ — स्वयं घायल होते हुए — कीचड़ में फँसे किसान की गाड़ी निकालते हैं। अंत में उन्हें दीवानी मिलती है क्योंकि उनमें दया, आत्मबल और उदारता है।
02Pariksha के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक प्रेमचंद हैं। उनका वास्तविक नाम धनपतराय था। वे हिंदी के महान कथा-सम्राट माने जाते हैं और उनका जीवनकाल 1880 से 1936 तक रहा। उनकी अन्य प्रसिद्ध कहानियाँ हैं — ईदगाह, बड़े भाईसाहब, नादान दोस्त, दो बैलों की कथा।
03Pariksha का केंद्रीय भाव क्या है?
इस कहानी का केंद्रीय भाव है कि सच्ची योग्यता डिग्री या दिखावे में नहीं, बल्कि दया, आत्मबल और उदारता में होती है। जो व्यक्ति विपत्ति में दूसरों की निःस्वार्थ सहायता करता है, वही वास्तव में योग्य नेता बन सकता है।
04दीवान साहब ने नौकरी क्यों छोड़ी?
दीवान सुजानसिंह ने चालीस वर्षों की सेवा के बाद बुढ़ापे में राज-काज सँभालने की शक्ति न रहने के कारण नौकरी छोड़ी। उन्हें भय था कि बुढ़ापे में कोई भूल-चूक हो जाए और उनकी जीवनभर की नेकनामी मिट्टी में मिल जाए।
05जानकीनाथ को दीवानी क्यों मिली?
जानकीनाथ को दीवानी इसलिए मिली क्योंकि उन्होंने स्वयं घायल होते हुए भी एक गरीब किसान की कीचड़ में फँसी गाड़ी निकाली। इससे उनकी दया, आत्मबल और उदारता सिद्ध हुई — वे गुण जो सरदार सुजानसिंह एक योग्य दीवान में देखना चाहते थे।
06Pariksha कहानी में किसान की गाड़ी किसने निकाली?
युवक जानकीनाथ ने किसान की गाड़ी निकाली। हॉकी खेलते समय उनके पैरों में चोट लगी थी, फिर भी उन्होंने कोट उतारा, कीचड़ में घुटनों तक धँसकर पहिये को ज़ोर लगाया और गाड़ी को नाले के ऊपर चढ़ा दिया।
07उम्मीदवारों ने दीवानी पाने के लिए क्या-क्या दिखावा किया?
उम्मीदवारों ने कई प्रकार का दिखावा किया — देर तक सोने वाले सुबह बगीचे में टहलने लगे, नौकरों से कठोरता से पेश आने वाले 'आप' और 'जनाब' कहने लगे, किताबों से नफरत करने वाले बड़े-बड़े ग्रंथ पढ़ने लगे। सभी एक महीने का दिखावा करके नौकरी पाना चाहते थे।
08कहानी का शीर्षक 'परीक्षा' क्यों रखा गया?
कहानी का शीर्षक 'परीक्षा' इसलिए उचित है क्योंकि सरदार सुजानसिंह ने एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन और आचार-विचार की परीक्षा ली। असली परीक्षा वह क्षण था जब किसान की गाड़ी कीचड़ में फँसी — उसी कठिन घड़ी में जानकीनाथ का सच्चा चरित्र प्रकट हुआ।
09"गहरे पानी में पैठने से ही मोती मिलता है" — इस कहावत का क्या अर्थ है?
इस कहावत का अर्थ है कि कठिन प्रयास और साहस से ही सफलता मिलती है। कहानी में किसान ने यह कहावत जानकीनाथ से कही, जो संकेत देती है कि गहरी और सच्ची परीक्षा में उत्तीर्ण होने पर ही बड़ा पुरस्कार मिलता है।
10Pariksha summary in hindi
Malhar Class 6 ki 'Pariksha' Premchand ki kahani hai. Devgarh ke budhhe diwaan Sujansingh retire hote hain. Akhbaaron mein advertisement nikalta hai aur saikdon ummedwaar aate hain. Sab ek mahine tak accha dikhawa karte hain. Hockey ke baad yuwakon mein se ek — Jankinath — swayam ghaayal hote hue bhi kichad mein phase kisaan ki gaadi nikalte hain. Darbaar mein unhe diwaan chunaa jaata hai kyunki unme sachi daya, aatmbal aur udaarta thi.
11प्रेमचंद का वास्तविक नाम क्या था?
प्रेमचंद का वास्तविक नाम धनपतराय था। वे हिंदी के महान लेखक और कथा-सम्राट के नाम से प्रसिद्ध हैं। उन्होंने समाज-सुधार और राष्ट्रीय भावना से ओत-प्रोत अनेक कहानियाँ और उपन्यास लिखे।
12नेकनामी और वात्सल्य का अर्थ क्या है?
नेकनामी का अर्थ है अच्छी प्रतिष्ठा या सुनाम। वात्सल्य का अर्थ है ममता या स्नेह का भाव। कहानी में कहा गया है कि बाकी खिलाड़ियों में स्वार्थ और मद था, मगर उदारता और वात्सल्य का नाम भी नहीं था।
13देवगढ़ रियासत के लिए दीवान का विज्ञापन किस प्रकार था?
विज्ञापन में कहा गया था कि देवगढ़ के लिए एक सुयोग्य दीवान की ज़रूरत है। ग्रेजुएट होना ज़रूरी नहीं, लेकिन हृष्ट-पुष्ट होना आवश्यक है। एक महीने तक उम्मीदवारों के रहन-सहन और आचार-विचार की देखभाल की जाएगी। विद्या का कम, परंतु कर्तव्य का अधिक विचार किया जाएगा।
14क्या Pariksha अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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