Summary
'Haar ki Jeet' Class 6 Hindi (Malhar) ka ek prasiddh kahani hai, likhi hai lekhak Sudarshan ne — यह कहानी बताती है कि सच्ची दयालुता और मानवता में विश्वास अंततः डाकू के हृदय को भी बदल देता है।
'हार की जीत' सुदर्शन द्वारा लिखी प्रसिद्ध हिंदी कहानी है। संत बाबा भारती को अपने घोड़े सुलतान से अत्यधिक प्रेम है। इलाके का कुख्यात डाकू खड्गसिंह छल से अपाहिज का वेश बनाकर बाबा की दया का फायदा उठाता है और सुलतान को हाँककर ले जाता है। बाबा भारती उससे केवल एक वचन माँगते हैं — इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करना, नहीं तो लोग गरीबों पर विश्वास करना छोड़ देंगे। यह ऊँचा भाव सुनकर खड्गसिंह का हृदय पिघल जाता है और वह रात को चुपचाप सुलतान को वापस बाँध जाता है। इस प्रकार बाबा की नैतिक जीत होती है।
Key points & formulas
- 01लेखक: सुदर्शन (वास्तविक नाम: बदरीनाथ भट्ट, 1896–1983); विधा: कहानी
- 02केंद्रीय भाव: सच्ची दयालुता और मानवता में अटूट विश्वास किसी भी कठोर हृदय को बदल सकता है
- 03मुख्य पात्र: बाबा भारती (दयालु संत), खड्गसिंह (डाकू), सुलतान (घोड़ा)
- 04बाबा भारती ने घोड़ा गँवाने के बाद भी केवल यह सोचा कि 'दुनिया से विश्वास न उठे' — यही उनकी असली जीत है
- 05शब्दार्थ — लट्टू होना: किसी पर मोहित/दीवाना होना
- 06शब्दार्थ — हृदय पर साँप लोटना: मन में जलन या ईर्ष्या उत्पन्न होना
- 07शब्दार्थ — अपाहिज: विकलांग, अशक्त व्यक्ति; अस्तबल: घोड़े का स्थान (stable)
Frequently asked questions
01हार की जीत का सारांश क्या है?
संत बाबा भारती के प्रिय घोड़े सुलतान को डाकू खड्गसिंह छल से अपाहिज बनकर छीन लेता है। बाबा भारती उसे केवल यह वचन देने को कहते हैं कि इस घटना को किसी से न बताए, वरना लोग गरीबों पर विश्वास करना बंद कर देंगे। यह महान भाव सुनकर खड्गसिंह का हृदय पिघलता है और वह रात को चुपचाप घोड़ा वापस कर देता है। इस प्रकार बाबा की नैतिक जीत होती है।
02हार की जीत के लेखक कौन हैं?
इस कहानी के लेखक सुदर्शन हैं। उनका वास्तविक नाम बदरीनाथ भट्ट था और उनका जीवन काल 1896 से 1983 तक रहा। उन्होंने कहानियों के अतिरिक्त कविताएँ, लेख, नाटक, उपन्यास और फ़िल्मों की पटकथाएँ भी लिखीं।
03हार की जीत का केंद्रीय भाव क्या है?
इस कहानी का केंद्रीय भाव है कि सच्ची दयालुता और मानवता में विश्वास डाकू के कठोर हृदय को भी बदल सकता है। बाबा भारती घोड़ा खोने के बाद भी केवल यह सोचते हैं कि दुनिया से विश्वास न उठे — यही उनकी असली जीत है।
04बाबा भारती के घोड़े का क्या नाम था?
बाबा भारती के घोड़े का नाम सुलतान था। वह बड़ा सुंदर और बलवान था और उसके जोड़ का घोड़ा सारे इलाके में नहीं था।
05खड्गसिंह ने घोड़ा कैसे छीना?
खड्गसिंह ने अपाहिज (विकलांग) का वेश बनाया और बाबा भारती से घोड़े पर बैठाने की विनती की। जब दयालु बाबा भारती ने उसे घोड़े पर बैठाया और लगाम पकड़कर चलने लगे, तब खड्गसिंह ने झटके से लगाम छुड़ाई और घोड़े को दौड़ाकर ले गया।
06बाबा भारती ने खड्गसिंह से क्या वचन माँगा?
बाबा भारती ने खड्गसिंह से वचन माँगा कि इस घटना को किसी के सामने प्रकट न करे। उनका कारण था — 'लोगों को यदि इस घटना का पता चला तो वे किसी गरीब पर विश्वास न करेंगे। दुनिया से विश्वास उठ जाएगा।'
07खड्गसिंह ने घोड़ा वापस क्यों किया?
बाबा भारती के ऊँचे और पवित्र विचार सुनकर खड्गसिंह का हृदय पिघल गया। उसने सोचा कि घोड़ा खोने पर भी बाबा को केवल गरीबों के प्रति लोगों का विश्वास बनाए रखने की चिंता है। इस महान भाव से प्रभावित होकर उसने रात को चुपचाप पश्चाताप के आँसुओं के साथ सुलतान को वापस बाँध दिया।
08'लट्टू होना' मुहावरे का अर्थ क्या है?
लट्टू होना का अर्थ है — किसी पर मोहित या दीवाना होना। कहानी में बाबा भारती सुलतान की चाल पर 'लट्टू' थे, अर्थात वे उसकी चाल पर मोहित थे।
09'हृदय पर साँप लोटना' का अर्थ क्या है?
हृदय पर साँप लोटना मुहावरे का अर्थ है — मन में जलन या ईर्ष्या उत्पन्न होना। कहानी में जब खड्गसिंह ने सुलतान की चाल देखी तो उसके हृदय पर साँप लोट गया, अर्थात वह घोड़े को देखकर ईर्ष्या और लालसा से भर गया।
10Haar ki Jeet summary in hindi
Haar ki Jeet ek prasiddh Hindi kahani hai jo Sudarshan ne likhi hai. Is kahani mein baba Bharati ke priye ghode Sultan ko dakku Khadgasingh chhal se chheen leta hai. Lekin baba Bharati ka ek hi dard hai — log gareebon par vishwas karna na chhodein. Yahi ooncha bhaav sunkar Khadgasingh ka hriday badal jaata hai aur woh raat ko ghoda wapas kar deta hai. Baba ki naaitik jeet hoti hai.
11खड्गसिंह कौन था?
खड्गसिंह उस इलाके का प्रसिद्ध डाकू था। लोग उसका नाम सुनकर काँपते थे। उसके पास बाहुबल था, आदमी थे और बेरहमी थी। जो वस्तु उसे पसंद आ जाए, उस पर वह अपना अधिकार समझता था।
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