Class 6 Hindi

Chapter 11 — Chetek ki Veerta

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Overview

Summary

'Chetek ki Veerta' Class 6 Hindi (Malhar) ki kavita hai, jiske kavi hain Shyamnarayan Pandey — यह कविता 'हल्दीघाटी' काव्यकृति (1939) का अंश है जिसमें महाराणा प्रताप के वीर अश्व चेतक की रणभूमि में असाधारण फुर्ती, निर्भीकता और स्वामिभक्ति का वर्णन किया गया है।

इस वीर रस की कविता में कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की अपूर्व वीरता और बिजली-सी गति का चित्रण किया है। चेतक रणभूमि में शत्रुओं के सिर के ऊपर से उड़ता हुआ दौड़ता था, मानो वह आसमान में दौड़ रहा हो। लगाम की हल्की-सी हरकत पर ही वह राणा का इशारा समझ जाता था। ढालों और तलवारों के बीच निर्भीक होकर दौड़ता और उफनती नदी तथा विशाल बज्र-मय बादल की तरह शत्रु-सेना पर टूट पड़ता। भाला और तरकश गिर जाते, पर चेतक का साहस अटूट रहता — शत्रु-समाज उसका रंग देखकर दंग रह जाता था।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि: श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991); वीर रस की कविताओं के लिए प्रसिद्ध।
  2. 02विधा: वीर रस की तुकांत कविता; 'हल्दीघाटी' काव्यकृति (प्रकाशन 1939) का अंश।
  3. 03केंद्रीय भाव: महाराणा प्रताप के अश्व चेतक की अदम्य वीरता, हवा से तेज गति और राणा के प्रति अटूट स्वामिभक्ति।
  4. 04चेतक शत्रुओं के मस्तक पर से दौड़ता था; राणा की पलक हिलने से पहले ही उनका इशारा समझकर मुड़ जाता था।
  5. 05प्रमुख काव्य-सौंदर्य: '-सा/-सी' से तुलना (बादल-सा, नद-सा, हवा-सी गति), वीर रस, तुकांत शैली।
  6. 06कठिन शब्दार्थ: अरि = शत्रु; निषंग = तरकश (बाणों का भाथा); हय = घोड़ा।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: करवाल = तलवार; बाग = लगाम; घहरना = भयंकर शब्द करते हुए टूट पड़ना।
Questions

Frequently asked questions

01

Chetek ki Veerta ka saransh kya hai?

'चेतक की वीरता' कविता में कवि श्यामनारायण पाण्डेय ने महाराणा प्रताप के अश्व चेतक की अद्भुत वीरता और तेज़ गति का चित्रण किया है। चेतक रणभूमि में शत्रुओं के सिर के ऊपर से दौड़ता था, लगाम की हल्की हरकत से राणा का इशारा समझ जाता था, और विशाल बादल की तरह शत्रु-सेना पर टूट पड़ता था।

02

चेतक की वीरता के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि श्यामनारायण पाण्डेय (1907–1991) हैं। वे वीर रस की कविताओं के लिए विशेष रूप से चर्चित थे।

03

चेतक की वीरता का केंद्रीय भाव क्या है?

इस कविता का केंद्रीय भाव महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की असाधारण वीरता, बिजली-सी गति और स्वामिभक्ति है। चेतक रणभूमि में निर्भीक होकर लड़ा और शत्रु-सेना को आतंकित किया।

04

चेतक की वीरता कहाँ से ली गई है?

यह कविता श्यामनारायण पाण्डेय की प्रसिद्ध काव्यकृति 'हल्दीघाटी' का अंश है, जो सन् 1939 में प्रकाशित हुई थी।

05

चेतक की वीरता में चेतक कौन था?

चेतक महाराणा प्रताप का प्रिय घोड़ा था। वह असाधारण रूप से तेज़ और बहादुर था तथा रणभूमि में अपने स्वामी की हर इच्छा बिना पूरे इशारे के समझ लेता था।

06

चेतक की वीरता में चेतक की क्या-क्या विशेषताएँ बताई गई हैं?

कविता के अनुसार चेतक हवा से भी तेज दौड़ता था, शत्रुओं के सिर के ऊपर से निकलता था, राणा की पलक मुड़ने से पहले ही उनका भाव समझकर मुड़ जाता था, ढालों और तलवारों के बीच निर्भीक होकर दौड़ता था, और शत्रु-सेना पर बज्र-मय बादल की तरह टूट पड़ता था।

07

'अरि' और 'निषंग' शब्दों के अर्थ क्या हैं?

'अरि' का अर्थ शत्रु (दुश्मन) है। 'निषंग' का अर्थ तरकश (वह भाथा जिसमें बाण रखे जाते हैं) है — कविता में कहा गया है कि युद्ध में भाला और निषंग दोनों गिर गए।

08

'हय' और 'बाग' शब्दों के अर्थ क्या हैं?

'हय' का अर्थ घोड़ा है। 'बाग' का अर्थ लगाम है। कविता में 'जो तनिक हवा से बाग हिली' का अर्थ है कि लगाम के हल्के-से हिलने पर ही चेतक सवार को लेकर उड़ जाता था।

09

Chetek ki Veerta summary in hindi

'चेतक की वीरता' कविता में महाराणा प्रताप के घोड़े चेतक की वीरता का वर्णन है। वह रणभूमि में हवा से तेज दौड़ता, शत्रुओं के मस्तक पर से उड़ता, राणा के इशारे को तुरंत समझता और शत्रु-सेना पर विशाल बादल की तरह टूट पड़ता था — शत्रु-समाज उसे देखकर दंग रह जाता था।

10

'हल्दीघाटी' काव्यकृति का क्या महत्त्व था?

'हल्दीघाटी' सन् 1939 में प्रकाशित हुई थी। भारत के स्वतंत्रता संग्राम के अंतिम वर्षों में इस काव्यकृति ने स्वतंत्रता सेनानियों में सांस्कृतिक एकता और उत्साह का संचार किया था।

11

चेतक की वीरता का चित्रण किन तुलनाओं से हुआ है?

कविता में चेतक की तुलना हवा, बादल और उफनती नदी से की गई है ('बढ़ते नद-सा वह लहर गया', 'विकराल बज्र-मय बादल-सा')। तुकांत शैली में रचित यह कविता वीर रस का उत्कृष्ट उदाहरण है।

12

'करवाल' शब्द का अर्थ क्या है?

'करवाल' का अर्थ तलवार है। कविता की पंक्ति 'सरपट दौड़ा करवालों में' का अर्थ है कि चेतक तलवारों के बीच बिना रुके तेज़ी से दौड़ता रहा।

13

चेतक की वीरता कक्षा 6 किस पुस्तक में है?

यह कविता कक्षा 6 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'मल्हार' के अध्याय 11 में संकलित है।

14

क्या Chetek ki Veerta अध्याय की PDF मुफ़्त है?

हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।

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