HindiClass 12

Antra

Hindi Elective (Prose & Poetry)17 Chapters

Chapter notes

What you'll learn in Antra

A quick revision map of Antra — the core idea and five key takeaways from each chapter. Tap any chapter to read the full NCERT PDF and detailed notes.

01

Devsena Ka Geet, Kamayani Se

यह NCERT Class 12 Hindi Antra Devsena Ka Geet, Kamayani Se पाठ कवि जयशंकर प्रसाद (सन् 1889–1937) की रचना है। 'देवसेना का गीत' उनके 'स्कंदगुप्त' नाटक से उद्धृत एक भावपूर्ण गीत है जिसमें देवसेना की वेदना, खोई हुई आशाओं और जीवन-संघर्ष को मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है।

  • 1कवि जयशंकर प्रसाद (सन् 1889–1937) का जन्म काशी में हुआ; उन्होंने स्वाध्याय द्वारा संस्कृत, पालि, उर्दू और अंग्रेजी का गहन अध्ययन किया तथा इतिहास, दर्शन, धर्मशास्त्र और पुरातत्त्व के प्रकांड विद्वान थे।
  • 2विधा: गीत — यह कविता जयशंकर प्रसाद के 'स्कंदगुप्त' नाटक से उद्धृत है। उसी अध्याय में 'कार्नेलिया का गीत' भी है, जो प्रसाद के 'चंद्रगुप्त' नाटक से लिया गया है।
  • 3केंद्रीय भाव: देवसेना की वेदना — 'आह! वेदना मिली विदाई!' — जीवन में भ्रमवश संचित पूँजी लुटा देने का पश्चाताप, प्रलय से निरंतर संघर्ष, और आशा की निरर्थकता।
  • 4मुख्य पात्र: देवसेना (मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन), स्कंदगुप्त (जिनसे देवसेना को प्रेम था; उन्होंने अंत में आजीवन अविवाहित रहने का व्रत लिया), पर्णदत्त (वृद्ध, देवसेना के आश्रम-साथी)।
  • 5गीत में देवसेना जीवन के अंतिम मोड़ पर अपने यौवन के कर्मों को याद करती है; 'सतृष्ण दीठ' सबकी उस पर लगी रहती थी, फिर भी वह अपनी 'सकल कमाई' न बचा सकी — 'मेरी आशा आह! बावली, तूने खो दी सकल कमाई।'
02

Saroj Smriti

NCERT Class 12 Hindi Antra Saroj Smriti — यह कविता सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' ने अपनी दिवंगत पुत्री सरोज की स्मृति में लिखी है, जिसमें पिता का विलाप, जीवन-संघर्ष और बेटी के प्रति अपार प्रेम व्यक्त हुआ है।

  • 1कवि परिचय: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' (1898-1961) का जन्म बंगाल में मेदिनीपुर जिले के महिषादल गाँव में हुआ; पितृग्राम गढ़कोला (उन्नाव), उत्तर प्रदेश है। बचपन में माँ का निधन हुआ, सन् 1918 में पत्नी का देहांत हुआ, और अंत में पुत्री सरोज की मृत्यु ने उन्हें भीतर तक झकझोर दिया।
  • 2विधा: शोक-कविता; निराला मुक्त छंद के प्रवर्तक माने जाते हैं।
  • 3केंद्रीय भाव: पुत्री की मृत्यु पर पिता का विलाप, साथ ही 'भाग्यहीन पिता का संघर्ष, समाज से उसके संबंध, पुत्री के प्रति बहुत कुछ न कर पाने का अकर्मण्यता बोध' — जैसा स्रोत-पाठ में वर्णित है।
  • 4मुख्य प्रसंग: विवाह में 'आत्मीय स्वजन कोई थे नहीं, न आमंत्रण था भेजा गया।' पिता ने माँ की कुल शिक्षा स्वयं दी और पुष्प-सेज स्वयं रची। सरोज नानी की स्नेह-गोद में और मामा-मामी के प्यार में पली; अंत भी 'उसी गोद में शरण' लेकर हुआ।
  • 5स्वर्गीया पत्नी की याद: कवि को बेटी के रूप-रंग में पत्नी का रूप-रंग दिखाई पड़ता है। कविता में 'स्वर्गीया-प्रिया-संग' गाया गया शृंगार रति-रूप पाकर 'आकाश बदल कर बना मही।' कवि ने शकुंतला की भी याद की — 'पर पाठ अन्य यह, अन्य कला।'
03

Ye Deep Akela

NCERT Class 12 Hindi Antra Ye Deep Akela — यह पाठ कक्षा 12 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा' का तीसरा अध्याय है, जिसमें प्रयोगवादी कवि सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (1911-1987) की दो कविताएँ — 'यह दीप अकेला' और 'मैंने देखा, एक बूँद' — संकलित हैं।

  • 1कवि परिचय: सच्चिदानंद हीरानंद वात्स्यायन 'अज्ञेय' (सन् 1911-1987), जन्म कुशीनगर (उत्तर प्रदेश); क्रांतिकारी आंदोलन में भाग लेने के कारण चार वर्ष जेल और दो वर्ष नजरबंद रहे; दिनमान साप्ताहिक के संस्थापक संपादक।
  • 2विधा: कविता — दो कविताएँ ('यह दीप अकेला' और 'मैंने देखा, एक बूँद'); 'यह दीप अकेला' एक प्रयोगवादी कविता है जो 'लघु मानव' के अस्तित्व और महत्त्व पर केंद्रित है।
  • 3केंद्रीय भाव — 'यह दीप अकेला': दीप (व्यक्ति) स्नेह भरा, गर्व भरा और अद्वितीय होने पर भी अकेला है; उसे पंक्ति (समाज) में सम्मिलित करने से व्यष्टि का समष्टि में विलय होता है — दीप के लक्ष्य और उद्देश्य का सर्वव्यापीकरण।
  • 4केंद्रीय भाव — 'मैंने देखा, एक बूँद': बूँद सागर के झाग से उछलकर ढलते सूरज की आग से क्षणभर रंग जाती है; कवि के अनुसार 'सूने विराट् के सम्मुख हर आलोक-छुआ अपनापन है उन्मोचन नश्वरता के दाग से' — क्षणभंगुरता में मुक्ति का अनुभव।
  • 5काव्य-सौंदर्य: कविता में दीप, मधु, गोरस, अंकुर और बूँद जैसे प्रतीकों के माध्यम से भाव व्यक्त किया गया है; अज्ञेय ने 'शब्दों को नया अर्थ देने का प्रयास करते हुए हिंदी काव्य-भाषा का विकास किया है'।
04

Disha

NCERT Class 12 Hindi Antra Disha — यह कविता केदारनाथ सिंह (1934–2018) द्वारा रचित एक लघु कविता है जिसमें पतंग उड़ाते एक बच्चे का बाल सुलभ यथार्थबोध चित्रित किया गया है; कवि इस यथार्थबोध से हिमालय की दिशा नए सिरे से जानते हैं।

  • 1कवि परिचय: केदारनाथ सिंह (1934–2018), जन्म बलिया जिले के चकिया गाँव में; काशी हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. तथा 'आधुनिक हिंदी कविता में बिम्ब-विधान' विषय पर पीएच.डी.; जवाहरलाल नेहरू विश्वविद्यालय के भारतीय भाषा केंद्र में हिंदी प्रोफेसर पद से अवकाश प्राप्त।
  • 2विधा: लघु कविता — 'दिशा' अत्यंत कम पंक्तियों में पूर्ण है; कविता की भाषा सहज है।
  • 3केंद्रीय भाव: बाल मनोविज्ञान — बच्चे यथार्थ को अपने ढंग से देखते हैं; कवि को यह बाल सुलभ संज्ञान मोह लेता है और वे स्वीकार करते हैं कि बच्चे से उन्होंने पहली बार जाना कि हिमालय किधर है।
  • 4मुख्य प्रसंग: कवि ने स्कूल के बाहर पतंग उड़ाते बच्चे से हिमालय की दिशा पूछी; बालक ने कहा — 'उधर-उधर' — जिधर उसकी पतंग भागी जा रही थी।
  • 5काव्य-सौंदर्य: एक साधारण प्रश्नोत्तर की संरचना में कविता बड़ी बात कह देती है — बच्चे का तात्कालिक, सहज यथार्थ कवि को नई दृष्टि देता है; कविता लघु आकार की है फिर भी संदेश गहरा है।
05

Toro

NCERT Class 12 Hindi Antra Toro — यह पाठ नयी कविता के प्रमुख कवि रघुवीर सहाय (1929–1990) की उद्बोधनपरक कविता 'तोड़ो' तथा 'वसंत आया' पर केंद्रित है; 'तोड़ो' में कवि चट्टानों और बंजर-ऊसर भूमि को तोड़कर धरती और मन दोनों को सृजन के लिए उर्वर बनाने का आह्वान करता है।

  • 1**कवि परिचय:** रघुवीर सहाय (1929–1990), जन्म लखनऊ (उत्तर प्रदेश); 1951 में अंग्रेजी साहित्य में एम.ए.; पेशे से पत्रकार — प्रतीक, आकाशवाणी, कल्पना (हैदराबाद) और दिनमान से जुड़े रहे।
  • 2**काव्यधारा:** नयी कविता के कवि; रचनाएँ अज्ञेय द्वारा संपादित 'दूसरा सप्तक' में संकलित; मुक्त छंद के साथ-साथ छंद में भी काव्य-रचना की; कविता में कथा या वृत्तांत का उपयोग करते हैं।
  • 3**'तोड़ो' का केंद्रीय भाव:** पत्थर, चट्टानें और बंजर-ऊसर भूमि को तोड़कर सृजन के लिए तैयार करना; परती को खेत में बदलना सृजन की आरंभिक किंतु अत्यंत महत्त्वपूर्ण प्रक्रिया है।
  • 4**प्रकृति और मन का समानांतर:** कवि प्रकृति से मन की तुलना करता है — बंजरता जैसे धरती में है वैसे ही मन में भी है; मन की ऊब और खीज को भी 'गोड़ने' की जरूरत है।
  • 5**'तोड़ो' से 'गोड़ो' तक:** कविता 'तोड़ो तोड़ो तोड़ो' से आरंभ और 'गोड़ो गोड़ो गोड़ो' पर समाप्त होती है — यह शब्दों की पुनरावृत्ति आह्वान के स्वर को बलवान बनाती है और विध्वंस नहीं, सृजन का लक्ष्य स्पष्ट करती है।
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Bharat

NCERT Class 12 Hindi Antra Bharat — यह पाठ महाकवि तुलसीदास (सन् 1532-1623) की रचनाओं से संकलित है, जिसमें रामचरितमानस के अयोध्या कांड से भरत-राम के प्रेम के छंद तथा गीतावली से माँ कौशल्या की विरह वेदना के दो पद सम्मिलित हैं।

  • 1कवि परिचय: तुलसीदास (सन् 1532-1623); जन्म — बाँदा जिले के राजापुर गाँव में; उन्हें लोकमंगल की साधना के कवि तथा समन्वय का कवि कहा जाता है।
  • 2स्रोत और विधा: भरत-राम का प्रेम — रामचरितमानस (अयोध्या कांड), दोहा-चौपाई छंद, अवधी भाषा; दोनों पद — गीतावली, पद शैली, ब्रज भाषा।
  • 3केंद्रीय भाव: भरत का राम के प्रति अगाध प्रेम — 'हारेंहूँ खेल जितावहि मोंही' और 'मैं जानउँ निज नाथ सुभाऊ। अपराधिहु पर कोह न काऊ' — राम स्वभाव से क्षमाशील और स्नेही हैं।
  • 4भरत की भावदशा: वे किसी पर दोष नहीं देते — 'सपनेहँु दोसक लेसु न काहू। मोर अभाग उदधि अवगाहू'; गुरु, गोसाईं और सिय-राम पर श्रद्धा रखकर सब सहते हैं।
  • 5कौशल्या की विरह: पहले पद में 'रहि चकि चित्रलिखी सी' — वे राम की धनुहियाँ और पनहियाँ को बार-बार हृदय और नेत्रों से लगाती हैं; दूसरे पद में 'राघौ! एक बार फिरि आवौ' — झाँवरे होते घोड़ों को देखकर पथिक के ज़रिए राम को संदेश भेजती हैं।
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Barahmasa

NCERT Class 12 Hindi Antra Barahmasa — यह पाठ मलिक मुहम्मद जायसी (सन् 1492-1542) की प्रसिद्ध काव्य-कृति पद्मावत के 'बारहमासा' खंड से लिए गए अंश हैं, जिनमें नायिका नागमती की विरह-वेदना का अगहन, पूस, माघ और फागुन माहों में चित्रण किया गया है।

  • 1कवि परिचय: मलिक मुहम्मद जायसी (सन् 1492-1542), जायस, अमेठी (उत्तर प्रदेश) के निवासी; सूफी प्रेममार्गी शाखा के सर्वश्रेष्ठ कवि; गुरु: सैयद अशरफ और शेख बुरहान।
  • 2प्रमुख रचनाएँ: पद्मावत (प्रेमाख्यान परंपरा का सर्वश्रेष्ठ प्रबंधकाव्य), अखरावट और आखिरी कलाम।
  • 3पद्मावत की कथा: भारतीय लोककथा पर आधारित — सिंहल देश की राजकुमारी पद्मावती और चित्तौड़ के राजा रत्नसेन के प्रेम की कथा।
  • 4विधा और भाषा: फारसी की मसनवी शैली में रचित; दोहा-चौपाई शैली; भाषा ठेठ अवधी; काव्य-शैली अत्यंत प्रौढ़ और गंभीर।
  • 5केंद्रीय भाव: नागमती की विरह-वेदना — अगहन में विरह की अग्नि, पूस में शीत से काँपता शरीर, माघ में पाला और माँहुट (महावट) से बढ़ता कष्ट, फागुन में चौगुना शीत और विरह-ताप।
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Pad

NCERT Class 12 Hindi Antra Pad विद्यापति (सन् 1380–1460) द्वारा रचित तीन मैथिली पदों का संकलन है, जो राधा-कृष्ण के प्रेम के माध्यम से विरहिणी नायिका की मनोदशा को चित्रित करते हैं।

  • 1कवि परिचय: विद्यापति (सन् 1380–1460) का जन्म मधुबनी (बिहार) के बिस्पी गाँव में हुआ; वे मिथिला नरेश राजा शिवसिंह के अभिन्न मित्र, राजकवि और सलाहकार थे।
  • 2भाषाएँ: विद्यापति ने संस्कृत, अवहट्ट (अपभ्रंश) और मैथिली — तीन भाषाओं में रचनाएँ कीं।
  • 3साहित्यिक स्थान: वे आदिकाल और भक्तिकाल के संधिकवि कहे जा सकते हैं; उनकी पदावली में जनभाषा में जनसंस्कृति की अभिव्यक्ति हुई है।
  • 4केंद्रीय भाव: राधा-कृष्ण के प्रेम के माध्यम से लौकिक प्रेम और विरह की प्रगाढ़ अनुभूति; पदों में 'प्रेम और सौंदर्य की अनुभूति की निश्छल और प्रगाढ़ अभिव्यक्ति' है।
  • 5पद 1: विरहिणी सावन में प्रियतम को पत्र भेजना चाहती है; 'मोर मन हरि हर लए गेल' — प्रियतम ने मन हर लिया है; वे गोकुल छोड़कर मधुपुर गए; कार्तिक मास में लौटने की आस।
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Kavita

NCERT Class 12 Hindi Antra Kavita — यह पाठ रीतिकाल की रीतिमुक्त/स्वच्छंद काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि घनानंद (सन् 1673-1760) के दो कवित्त प्रस्तुत करता है, जिनमें प्रेमिका सुजान के दर्शन की अभिलाषा और प्रेम-वियोग की गहरी पीड़ा व्यक्त की गई है।

  • 1कवि परिचय: घनानंद (सन् 1673-1760) — रीतिकाल की रीतिमुक्त/स्वच्छंद काव्यधारा के प्रतिनिधि कवि; दिल्ली के बादशाह मुहम्मद शाह के मीर मुंशी; वृंदावन में निबार्क संप्रदाय में दीक्षित
  • 2विधा: कवित्त — ब्रजभाषा में लिखे दो कवित्त; घनानंद को साक्षात रसमूर्ति कहा गया है
  • 3जीवन-प्रसंग: सुजान से अटूट प्रेम; उनकी बेवफ़ाई और बादशाह द्वारा दरबार से निष्कासन; वृंदावन में भक्त के रूप में जीवन-निर्वाह; सुजान के नाम का प्रतीकात्मक प्रयोग काव्य में
  • 4केंद्रीय भाव: प्रेम की पीड़ा और वियोग — 'घनानंद मूलतः प्रेम की पीड़ा के कवि हैं'; पहले कवित्त में प्राण सुजान को संदेश लेकर जाना चाहते हैं; दूसरे में प्रेमिका की आनाकानी और मौन पर प्रश्न
  • 5प्रमुख रचनाएँ: सुजान सागर, विरह लीला, कृपाकंड निबंध, रसकेलि वल्ली
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Sumirini Ke Manke

NCERT Class 12 Hindi Antra Sumirini Ke Manke पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी द्वारा रचित तीन लघु निबंधों — बालक बच गया, घड़ी के पुर्जे और ढेले चुन लो — का संग्रह है, जो शिक्षा, धर्म-जिज्ञासा और लोक-अंधविश्वास जैसी समाज की मूल समस्याओं पर व्यावहारिक एवं विचारोत्तेजक दृष्टि से प्रकाश डालता है।

  • 1लेखक परिचय: पंडित चंद्रधर शर्मा गुलेरी (1883–1922), जन्म पुरानी बस्ती, जयपुर; बहुभाषाविद् — संस्कृत, पाली, प्राकृत, अपभ्रंश, ब्रज, अवधी, मराठी, गुजराती, राजस्थानी, पंजाबी, बाँग्ला के साथ अंग्रेजी, लैटिन, फ्रेंच के भी ज्ञाता; 'इतिहास दिवाकर' की उपाधि से सम्मानित; काशी हिंदू विश्वविद्यालय के प्राच्य विभाग के प्राचार्य।
  • 2विधा: तीन लघु निबंध; भाषा-शैली स्रोत-ग्रंथ के अनुसार 'सरल, बोलचाल की होते हुए भी गंभीर ढंग से विषय प्रवर्तन करने वाली।'
  • 3'बालक बच गया': पाठशाला के वार्षिकोत्सव में आठ वर्षीय बालक को 'मिस्टर हादी के कोल्हू की तरह दिखाया जा रहा था'; उससे धर्म के दस लक्षण, नौ रसों के उदाहरण, पानी के चार डिग्री नीचे फैलने का कारण, चंद्रग्रहण का वैज्ञानिक समाधान, हेनरी अष्टम की स्त्रियों के नाम आदि पूछे गए; इनाम में उसने 'लूं' माँगा — लेखक ने इसे 'जीवित वृक्ष के हरे पत्तों का मधुर मर्मर' कहा।
  • 4'घड़ी के पुर्जे': धर्म के रहस्य जानने की जिज्ञासा को केवल वेदशास्त्रज्ञ धर्माचार्यों का अधिकार बताकर आम जन की जिज्ञासा बंद करने की प्रवृत्ति पर घड़ी के पुर्जों के दृष्टांत द्वारा व्यंग्यात्मक प्रश्न।
  • 5'ढेले चुन लो': शेक्सपियर के नाटक 'मर्चेंट ऑफ वेनिस' की पोर्शिया की तीन पेटियों (सोने, चाँदी, लोहे) की तुलना वैदिक काल की मिट्टी-ढेले परंपरा से; वेदि, गौशाला, खेत, चौराहे और मसान की मिट्टी से बने ढेलों द्वारा पत्नी-वरण; कबीर की साखी द्वारा समापन — 'पत्थर पूजे हरि मिलें तो तू पूज पहार / इससे तो चक्की भली, पीस खाय संसार।'
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Sambadiya

NCERT Class 12 Hindi Antra Sambadiya — फणीश्वरनाथ 'रेणु' द्वारा लिखी गई यह आंचलिक कहानी है, जिसमें संवदिया (संदेशवाहक) हरगोबिन और असहाय बड़ी बहुरिया की मार्मिक कथा प्रस्तुत की गई है।

  • 1लेखक परिचय: फणीश्वरनाथ 'रेणु' (1921-1977), बिहार के पूर्णिया जिले के औराही हिगना गाँव के निवासी, हिंदी के प्रमुख आंचलिक कथाकार।
  • 2विधा: कहानी — लोकभाषा, आंचलिक शब्दावली और मुहावरों पर आधारित।
  • 3केंद्रीय भाव: असहाय और बेसहारा नारी (बड़ी बहुरिया) की पीड़ा तथा संवदिया हरगोबिन की गहरी मानवीय संवेदना।
  • 4मुख्य पात्र: हरगोबिन (संवदिया), बड़ी बहुरिया (बड़ी हवेली की बेसहारा पुत्रवधू), बूढ़ी माता (बड़ी बहुरिया की माँ), मोदिआइन (गाँव की दुकानदार)।
  • 5मुख्य संघर्ष: बड़ी बहुरिया का संवाद — 'यदि माँ मुझे नहीं ले गई तो गले में घड़ा बाँधकर पोखरे में डूब मरूँगी'; हरगोबिन यह दर्दनाक संवाद बूढ़ी माता को नहीं सुना पाता।
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Gandhi, Nehru Aur Yasser Arafat

NCERT Class 12 Hindi Antra Gandhi, Nehru Aur Yasser Arafat भीष्म साहनी (1915–2003) की आत्मकथा 'आज के अतीत' का एक संस्मरण है, जिसमें लेखक ने गांधी जी, नेहरू जी और यास्सेर अराफ़ात के साथ बिताए अविस्मरणीय क्षणों को शब्दबद्ध किया है।

  • 1लेखक परिचय: भीष्म साहनी (1915–2003) का जन्म रावलपिंडी (अब पाकिस्तान) में हुआ; 'तमस' उपन्यास के लिए उन्हें साहित्य अकादमी पुरस्कार तथा हिंदी अकादमी दिल्ली का शलाका सम्मान मिला।
  • 2विधा: यह पाठ संस्मरण है — आत्मकथा 'आज के अतीत' का एक अंश।
  • 3केंद्रीय भाव: राष्ट्रीयता, देशप्रेम और अंतरराष्ट्रीय मैत्री — तीनों महान व्यक्तित्वों की सरलता और मानवीयता इस संस्मरण का प्राण है।
  • 4सेवाग्राम प्रसंग (सन् 1938): लेखक भाई बलराज (जो 'नयी तालीम' पत्रिका के सह-संपादक थे) के पास सेवाग्राम गए; गांधी जी के साथ प्रातः भ्रमण किया; एक बीमार बालक की 'बापू-बापू' पुकार पर गांधी जी तत्काल पहुँचे और हँसते हुए उसकी सहायता की — उनके चेहरे पर 'लेशमात्र भी क्षोभ का भाव नहीं था'।
  • 5काश्मीर प्रसंग: शेख अब्दुल्ला के नेतृत्व में झेलम नदी पर सातवें पुल से अमीराकदल तक नावों में नेहरू जी की शोभायात्रा हुई; खाने की मेज पर नेहरू जी ने फ्रांसीसी लेखक अनातोले फ्रांस की गरीब बाजीगर की कहानी सुनाई; 'आपने देख लिया हो तो क्या मैं एक नजर देख सकता हूँ?' — अखबार माँगने का यह विनम्र वाक्य नेहरू जी के सौम्य व्यक्तित्व को उजागर करता है।
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Sher, Pehchan, Chaar Haath, Sajha

NCERT Class 12 Hindi Antra Sher, Pehchan, Chaar Haath, Sajha असगर वजाहत द्वारा लिखी चार लघुकथाएँ हैं जो सत्ता, राजा की स्वेच्छाचारिता, पूँजीवादी शोषण और किसानों की बदहाली पर तीखा व्यंग्य करती हैं।

  • 1लेखक परिचय: असगर वजाहत का जन्म सन् 1946 में फतेहपुर, उत्तर प्रदेश में हुआ; उन्होंने अलीगढ़ मुस्लिम विश्वविद्यालय से पढ़ाई की और दिल्ली के जामिया मिल्लिया विश्वविद्यालय में अध्यापन किया; उनकी भाषा में गांभीर्य, सबल भावाभिव्यक्ति एवं व्यंग्यात्मकता है।
  • 2विधा: ये चारों रचनाएँ लघुकथाएँ हैं — संक्षिप्त किंतु गहरे व्यंग्य और प्रतीकात्मकता से युक्त।
  • 3शेर: शेर व्यवस्था (सत्ता) का प्रतीक है; गधा, लोमड़ी, उल्लू और कुत्तों का जुलूस — सब लोभ में उसके मुँह में जाते हैं; जैसे ही लेखक इनकार करता है, 'गौतम बुद्ध की मुद्रा में बैठा शेर दहाड़कर खड़ा हो गया और मेरी तरफ झपट पड़ा।'
  • 4पहचान: राजा ने हुक्म दिया — आँखें बंद रखो, कानों में पिघला सीसा डलवाओ, होंठ सिलवाओ; खैराती, रामू और छिद्दू ने जब आँखें खोलीं तो सामने केवल राजा दिखाई दिया, वे एक-दूसरे को नहीं देख सके।
  • 5चार हाथ: मिल मालिक ने वैज्ञानिकों से, कटे हाथों से, लकड़ी के हाथों से, लोहे के हाथों से मजदूरों को चार हाथ देने की कोशिश की; अंत में 'मजदूरी आधी कर दी और दुगुने मजदूर नौकर रख लिए।'
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Jahan Koi Waapsi Nahi

NCERT Class 12 Hindi Antra Jahan Koi Waapsi Nahi निर्मल वर्मा द्वारा लिखित एक यात्र-वृत्तांत है जो 'धुंध से उठती धुन' संग्रह से लिया गया है; इसमें सिगरौली के नवागाँव क्षेत्र में औद्योगीकरण के कारण होने वाले विस्थापन और पर्यावरण-विनाश का मार्मिक चित्रण है।

  • 1लेखक परिचय: निर्मल वर्मा (1929–2005), जन्म शिमला; नयी कहानी आंदोलन के महत्त्वपूर्ण हस्ताक्षर; 1985 में 'कव्वे और काला पानी' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  • 2विधा व स्रोत: यात्र-वृत्तांत; 'धुंध से उठती धुन' यात्र-संस्मरण संग्रह से लिया गया; रचनाकाल 1983 (सिगरौली)।
  • 3केंद्रीय भाव: अंधाधुंध औद्योगीकरण से पर्यावरण-विनाश और ग्रामीण जन का स्थायी विस्थापन; लेखक का मत है कि प्रकृति, मनुष्य और संस्कृति के बीच का 'नाजुक संतुलन' नष्ट हो रहा है।
  • 4मुख्य स्थान व घटनाएँ: नवागाँव (50,000 की आबादी, लगभग 18 गाँव) का अमझर गाँव — अमरौली प्रोजेक्ट की घोषणा के बाद आम के पेड़ सूख गए; रिहंद बाँध निर्माण से पहली विस्थापन-लहर; बाद में सेंट्रल कोल फील्ड और NTPC की स्थापना।
  • 5पेड़ों का मूक सत्याग्रह: लेखक लिखते हैं — 'आदमी उजड़ेगा, तो पेड़ जीवित रहकर क्या करेंगे?' — मनुष्य के विस्थापन के विरोध में पेड़ों का सूखना एक विचित्र अनुभव बताया गया है।
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Doosra Devdas

NCERT Class 12 Hindi Antra Doosra Devdas ममता कालिया (जन्म सन् 1940) द्वारा लिखी एक हिंदी कहानी है जो हर की पौड़ी, हरिद्वार के परिवेश में संभव नामक युवक और पारो नामक युवती की आकस्मिक पहली मुलाकात और प्रेम के प्रथम अंकुरण को चित्रित करती है।

  • 1लेखिका परिचय: ममता कालिया का जन्म सन् 1940 में मथुरा, उत्तर प्रदेश में हुआ; दिल्ली विश्वविद्यालय से अंग्रेजी में एम.ए.; 1973-2001 तक महिला सेवा सदन डिग्री कालेज, इलाहाबाद में प्रधानाचार्य; उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान से साहित्य भूषण (2004) और कहानी सम्मान (1989) प्राप्त।
  • 2विधा: गद्य कहानी; ममता कालिया की भाषा में व्यंग्य की सटीकता एवं सजीवता है और अभिव्यक्ति की सरलता एवं सुबोधता इसे मर्मस्पर्शी बनाती है।
  • 3केंद्रीय भाव: प्रेम के लिए किसी निश्चित व्यक्ति, समय और स्थिति का होना आवश्यक नहीं — वह कभी भी, कहीं भी उपज सकता है; कहानी प्रेम को 'बंबईया फ़िल्मों की परिपाटी से अलग' पवित्र और स्थायी स्वरूप में प्रस्तुत करती है।
  • 4मुख्य पात्र: संभव — एम.ए. उत्तीर्ण युवक, सिविल सेवा की तैयारी कर रहा है, नानी के घर हरिद्वार आया है; पारो — दुबली-पतली, गुलाबी साड़ीधारी सौम्य युवती; मन्नू — पारो का भतीजा जो दोनों की पुनर्मुलाकात का माध्यम बनता है।
  • 5प्रमुख घटनाएँ: हर की पौड़ी पर कलावा बँधवाते समय पुजारी का युगल-आशीर्वाद और दोनों का अकबका जाना; संभव का रात भर बेचैन रहना और कल्पनाएँ करना; मंसा देवी की केबिल कार में संयोग से पुनर्मुलाकात; अंत में 'संभव देवदास' नाम का परिचय और पारो की उद्धरण-पंक्ति — 'मनोकामना की गाँठ भी अद्भुत, अनूठी है, इधर बाँधो उधर लग जाती है।'
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Kutaj

NCERT Class 12 Hindi Antra Kutaj हजारी प्रसाद द्विवेदी द्वारा लिखित एक प्रसिद्ध निबंध है जिसमें हिमालय की सूखी चट्टानों पर उगने वाले कुटज पौधे की अपराजेय जीवनशक्ति के माध्यम से मनुष्य को स्वावलंबन, आत्मविश्वास और विषम परिस्थितियों में शान के साथ जीने का संदेश दिया गया है।

  • 1लेखक परिचय: हजारी प्रसाद द्विवेदी (सन् 1907–1979), जन्म ग्राम आरत दुबे का छपरा, जिला बलिया (उ.प्र.); 1940–50 तक शांति निकेतन में हिंदी भवन के निदेशक; 'आलोक पर्व' पर साहित्य अकादमी पुरस्कार; भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित।
  • 2विधा: निबंध — व्यक्तित्व-व्यंजकता और आत्मपरकता लेखक की शैली की विशेषता है; व्यंग्य शैली के प्रयोग ने पांडित्य के बोझ को हावी नहीं होने दिया।
  • 3केंद्रीय भाव: कुटज हिमालय की ऊँचाई पर सूखी शिलाओं के बीच उगने वाला जंगली पौधा है; उसमें 'अपराजेय जीवनशक्ति है, स्वावलंबन है, आत्मविश्वास है और विषम परिस्थितियों में भी शान के साथ जीने की क्षमता है।'
  • 4दार्शनिक विमर्श: 'रूप व्यक्ति-सत्य है, नाम समाज-सत्य' — लेखक नाम और रूप के प्रश्न से आरंभ करके स्वार्थ, जिजीविषा और परमार्थ का विश्लेषण करते हैं; याज्ञवल्क्य के 'आत्मनस्तु कामाय सर्व प्रियं भवति' को लेकर समष्टि-बुद्धि की चर्चा करते हैं।
  • 5साहित्यिक संदर्भ: कालिदास ने मेघदूत में रामगिरि पर यक्ष से कुटज पुष्पों की अंजलि देकर मेघ की अभ्यर्थना कराई — इसीलिए लेखक ने कुटज को 'गाढ़े के साथी' कहा; रहीम ने कुटज को साधारण झाड़ी कहा जिसे लेखक ने गलत-बयानी माना।

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