Summary
यह NCERT Class 12 Hindi Antra Devsena Ka Geet, Kamayani Se पाठ कवि जयशंकर प्रसाद (सन् 1889–1937) की रचना है। 'देवसेना का गीत' उनके 'स्कंदगुप्त' नाटक से उद्धृत एक भावपूर्ण गीत है जिसमें देवसेना की वेदना, खोई हुई आशाओं और जीवन-संघर्ष को मार्मिक ढंग से व्यक्त किया गया है।
देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन है। हूणों के आक्रमण में बंधुवर्मा सहित परिवार के सभी लोगों को वीरगति मिली। देवसेना स्कंदगुप्त से प्रेम करती थी, किंतु स्कंदगुप्त मालवा के धनकुबेर की कन्या विजया का स्वप्न देखते थे। जीवन की संध्याबेला में देवसेना वृद्ध पर्णदत्त के साथ आश्रम में रहती है। इस गीत में वह भ्रमवश किए गए कर्मों का पश्चाताप करती है, खोई हुई आशा को बावली कहती है और प्रलय से अपने दुर्बल बल पर होड़ लगाने की बात करती है। यह गीत वेदना के क्षणों में मनुष्य और प्रकृति के संबंध को भी व्यक्त करता है।
Key points & formulas
- 01कवि जयशंकर प्रसाद (सन् 1889–1937) का जन्म काशी में हुआ; उन्होंने स्वाध्याय द्वारा संस्कृत, पालि, उर्दू और अंग्रेजी का गहन अध्ययन किया तथा इतिहास, दर्शन, धर्मशास्त्र और पुरातत्त्व के प्रकांड विद्वान थे।
- 02विधा: गीत — यह कविता जयशंकर प्रसाद के 'स्कंदगुप्त' नाटक से उद्धृत है। उसी अध्याय में 'कार्नेलिया का गीत' भी है, जो प्रसाद के 'चंद्रगुप्त' नाटक से लिया गया है।
- 03केंद्रीय भाव: देवसेना की वेदना — 'आह! वेदना मिली विदाई!' — जीवन में भ्रमवश संचित पूँजी लुटा देने का पश्चाताप, प्रलय से निरंतर संघर्ष, और आशा की निरर्थकता।
- 04मुख्य पात्र: देवसेना (मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन), स्कंदगुप्त (जिनसे देवसेना को प्रेम था; उन्होंने अंत में आजीवन अविवाहित रहने का व्रत लिया), पर्णदत्त (वृद्ध, देवसेना के आश्रम-साथी)।
- 05गीत में देवसेना जीवन के अंतिम मोड़ पर अपने यौवन के कर्मों को याद करती है; 'सतृष्ण दीठ' सबकी उस पर लगी रहती थी, फिर भी वह अपनी 'सकल कमाई' न बचा सकी — 'मेरी आशा आह! बावली, तूने खो दी सकल कमाई।'
- 06प्रकृति और मनुष्य का संबंध: यात्रा पर 'नीरवता अनंत अँगड़ाई' लेती है; 'श्रमित स्वप्न की मधुमाया' और 'गहन-विपिन की तरफ़-छाया' में 'विहाग की तान' उठती है — वेदनामय क्षणों में प्रकृति साथी बन जाती है।
- 07कठिन शब्दार्थ — संचित: एकत्रित; मधुकरियों: भिक्षा; नीरवता: खामोशी; विपिन: जंगल/वन; विहाग: अर्धरात्रि में गाया जाने वाला राग; सतृष्ण: तृष्णा के साथ; दीठ: दृष्टि।
Frequently asked questions
01देवसेना कौन थी और उसके जीवन में क्या हुआ?
देवसेना मालवा के राजा बंधुवर्मा की बहन थी। हूणों के आक्रमण में बंधुवर्मा सहित परिवार के सभी लोगों को वीरगति मिली। बची हुई देवसेना भाई के स्वप्नों को साकार करने और राष्ट्रसेवा का व्रत लिए जीवन के अंतिम मोड़ पर वृद्ध पर्णदत्त के साथ आश्रम में रहती थी।
02'देवसेना का गीत' किस नाटक से लिया गया है?
यह गीत जयशंकर प्रसाद के 'स्कंदगुप्त' नाटक से लिया गया है।
03जयशंकर प्रसाद का जन्म कब और कहाँ हुआ?
जयशंकर प्रसाद का जन्म सन् 1889 में काशी में हुआ और उनका निधन सन् 1937 में हुआ। उन्होंने केवल आठवीं कक्षा तक विद्यालयी शिक्षा प्राप्त की, किंतु स्वाध्याय द्वारा संस्कृत, पालि, उर्दू और अंग्रेजी का गहन अध्ययन किया।
04'मैंने भ्रमवश जीवन संचित, मधुकरियों की भीख लुटाई' — इस पंक्ति का अर्थ क्या है?
देवसेना कहती है कि उसने जीवनभर जो कुछ एकत्रित (संचित) किया, उसे भ्रम में पड़कर भिक्षा (मधुकरियों) की तरह लुटा दिया। यहाँ 'मधुकरियों' का अर्थ भिक्षा है और 'संचित' का अर्थ एकत्रित।
05Devsena Ki Aasha Ko 'Baawali' Kyun Kaha Gaya Hai?
कविता में देवसेना कहती है — 'मेरी आशा आह! बावली, तूने खो दी सकल कमाई।' उसकी आशा ने उसे अपनी समस्त जीवन-पूँजी खो देने पर विवश कर दिया, इसलिए उसे बावली (व्यर्थ/पागल) कहा गया।
06देवसेना के जीवन में 'प्रलय' का क्या संदर्भ है?
'चढ़कर मेरे जीवन-रथ पर, प्रलय चल रहा अपने पथ पर' — यहाँ प्रलय देवसेना के जीवन की विनाशकारी शक्ति है जो उसके जीवन-रथ पर सवार होकर चल रही है। इसके बावजूद देवसेना 'निज दुर्बल पद-बल पर' उससे 'हारी-होड़ लगाती' रही।
07Devsena Ka Geet mein 'Vihag' kya hai?
'विहाग' अर्धरात्रि में गाया जाने वाला राग है। कविता में 'श्रमित स्वप्न की मधुमाया' और 'गहन-विपिन की तरफ़-छाया' में पथिक की 'उनींदी श्रुति' में 'विहाग की तान उठाई' — यह वेदनाभरे एकांत का एक भावमय क्षण है।
08स्कंदगुप्त और देवसेना के बीच क्या हुआ?
देवसेना स्कंदगुप्त से प्रेम करती थी, किंतु स्कंदगुप्त मालवा के धनकुबेर की कन्या विजया का स्वप्न देखते थे। जीवन के अंतिम मोड़ पर स्कंदगुप्त देवसेना को पाना चाहता है, पर देवसेना तैयार नहीं होती। तब स्कंदगुप्त आजीवन कुँवारा रहने का व्रत ले लेता है।
09'लौटा लो यह अपनी थाती, मेरी करफ़णा हा-हा खाती' — इन पंक्तियों का भाव क्या है?
देवसेना विश्व से कह रही है कि वह अपनी 'थाती' (धरोहर/पूँजी) वापस ले ले, क्योंकि देवसेना इसे सँभाल नहीं सकती। इसी कारण उसकी 'मन की लाज गँवाई' है — यह विडंबना और हार की पराकाष्ठा है।
10जयशंकर प्रसाद की प्रमुख रचनाएँ कौन-कौन सी हैं?
प्रसाद जी की प्रमुख रचनाएँ हैं — नाटक: अजातशत्रु, स्कंदगुप्त, चंद्रगुप्त, ध्रुवस्वामिनी; उपन्यास: कंकाल, तितली; कहानी संग्रह: आँधी, आकाशदीप, इंद्रजाल; कविताएँ: कामायनी, आँसू, लहर, झरना, प्रेमपथिक।
11क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
12इस अध्याय में 'नीरवता' और 'सतृष्ण दीठ' के क्या अर्थ हैं?
'नीरवता' का अर्थ है खामोशी। 'सतृष्ण दीठ' का अर्थ है तृष्णा (इच्छा) से भरी दृष्टि। कविता में 'लगी सतृष्ण दीठ थी सबकी' — सभी की प्यासी नज़रें देवसेना पर लगी रहती थीं और वह उनसे खुद को बचाती रही।
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