Surdas Ki Jhopri
NCERT Class 12 Hindi Antral Surdas Ki Jhopri यह पाठ प्रेमचंद के उपन्यास 'रंगभूमि' का एक अंश है, जिसमें दृष्टिहीन पात्र सूरदास की अदम्य जिजीविषा और विपत्ति में पुनर्निर्माण की भावना को चित्रित किया गया है।
- 1लेखक परिचय: इस पाठ के रचयिता प्रेमचंद हैं और यह उनके उपन्यास 'रंगभूमि' का अंश है।
- 2विधा: गद्य (उपन्यास-अंश) — कहानी-शैली में लिखा गया।
- 3केंद्रीय भाव: विपत्ति में प्रतिशोध नहीं, पुनर्निर्माण की अदम्य इच्छाशक्ति — सूरदास झोंपड़ी जलने के बावजूद किसी से प्रतिशोध नहीं चाहता, बल्कि पुनः बनाने का संकल्प लेता है।
- 4मुख्य पात्र व घटनाएँ: सूरदास (दृष्टिहीन नायक), भैरों (झोंपड़ी में आग लगाने वाला, रुपये चुराने वाला), जगधर (ईर्ष्यालु पड़ोसी), सुभागी (भैरों की पत्नी जो सूरदास के रुपये वापस दिलाने का प्रण लेती है), मिठुआ (बालक जिसके शब्दों से सूरदास को नई ऊर्जा मिलती है)।
- 5पाठ में आग की वर्णनात्मक छवियाँ हैं — जैसे 'मानो किसी मित्र की चिताग्नि है' — जो दृश्य को जीवंत बनाती हैं और घटना की गंभीरता व्यक्त करती हैं।



