Summary
NCERT Class 12 Hindi Antral Apna Malwa — Khau Ujaru Sabhyata Mein प्रभाष जोशी द्वारा लिखा गया पर्यावरण-केंद्रित निबंध है, जो जनसत्ता के 'कागद कारे' स्तंभ (1 अक्टूबर 2006) से लिया गया है। इसमें लेखक ने मालवा की नदियों, तालाबों और लोकजीवन का चित्रण करते हुए यूरोप-अमेरिका की खाऊ-उजाड़ू सभ्यता के कारण हो रहे पर्यावरणीय विनाश पर गहरी चिंता व्यक्त की है।
लेखक प्रभाष जोशी नवरात्रि पर मालवा जाते हैं और शिप्रा, नर्मदा, चंबल जैसी नदियों को भरा-पूरा पाते हैं। 'मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर' की कहावत इस बार सच हुई। किंतु लेखक यह भी बताते हैं कि आधुनिक नियोजकों ने तालाब गाद से भर जाने दिए और नदी-नाले सूखते गए। 'नयी दुनिया' की लाइब्रेरी के 128 वर्षों के जल-रिकार्ड बताते हैं कि मालवा कितना संपन्न था। यूरोप-अमेरिका की खाऊ-उजाड़ू जीवन पद्धति से कार्बन डाइऑक्साइड ने धरती का तापमान बढ़ाया है; विकास की औद्योगिक सभ्यता उजाड़ की अपसभ्यता बन गई है।
Key points & formulas
- 01लेखक परिचय: प्रभाष जोशी (सन् 1937-2009), इंदौर (मध्य प्रदेश) में जन्मे वरिष्ठ पत्रकार; 1983 में जनसत्ता के संपादक; 'कागद कारे' नाम से उनके लेखों का संग्रह प्रकाशित है।
- 02विधा एवं स्रोत: यह पाठ पर्यावरण-केंद्रित ललित निबंध है; जनसत्ता के 'कागद कारे' स्तंभ, 1 अक्टूबर 2006 से लिया गया।
- 03केंद्रीय भाव: खाऊ-उजाड़ू सभ्यता (यूरोप-अमेरिका की जीवन पद्धति) ने मालवा की नदियों, तालाबों और पर्यावरण को नष्ट किया है; 'विकास की औद्योगिक सभ्यता उजाड़ की अपसभ्यता है।'
- 04मुख्य प्रसंग: लेखक नवरात्रि पर मालवा जाते हैं; ओंकारेश्वर और नेमावर के पास बजवाड़ा में नर्मदा के दर्शन; नागदा स्टेशन पर मीणा जी से भेंट; शिप्रा 'मैया ऐसी भरपूर और बहती हुई तो बरसों में दिखी थी।'
- 05ऐतिहासिक जल-प्रबंध: मालवा के राजा विक्रमादित्य, भोज और मुंज ने पश्चिमी पुनर्जागरण से बहुत पहले तालाब और बड़ी-बड़ी बावड़ियाँ बनवाई थीं ताकि बरसात का पानी रुका रहे।
- 06पर्यावरण चेतावनी: कार्बन डाइऑक्साइड गैसों ने धरती का तापमान तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ाया; अमेरिका 'अपनी खाऊ-उजाड़ू जीवन पद्धति पर कोई समझौता नहीं करेगा।'
- 07कठिन शब्दार्थ (स्रोत से): 'निथरी' = फैली, चमकीली; 'सदानीरा' = हर वक्त बहने वाली नदियाँ; 'छप्पन का काल' = 1899 का भीषण अकाल जब मालवा में सिर्फ 15-75 इंच पानी गिरा।
- 08प्रसिद्ध लोकोक्ति: 'मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर' — मालवा की समृद्धि की परंपरागत कहावत; 'नदी नाले सूख गए, पग-पग नीर वाला मालवा सूखा हो गया' — वर्तमान दुर्दशा।
Frequently asked questions
01अपना मालवा — खाऊ-उजाड़ू सभ्यता में पाठ के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक प्रभाष जोशी हैं। उनका जन्म सन् 1937 में इंदौर (मध्य प्रदेश) में हुआ था और देहावसान 2009 में। वे जनसत्ता अखबार के संपादक थे और 'कागद कारे' उनके लेखों का प्रसिद्ध संग्रह है।
02यह पाठ किस स्तंभ और किस अखबार से लिया गया है?
यह पाठ जनसत्ता के 'कागद कारे' स्तंभ से लिया गया है। इसका प्रकाशन 1 अक्टूबर 2006 को हुआ था।
03'मालव धरती गहन गंभीर, डग-डग रोटी, पग-पग नीर' का क्या अर्थ है?
इस लोकोक्ति का अर्थ है कि मालवा की धरती गहन और गंभीर है जहाँ डगर-डगर पर रोटी और पग-पग पर पानी मिलता है — यानी मालवा की धरती खूब समृद्ध है। पाठ में यही कहावत 'बरसों बाद हजारों साल की कहावत सच्ची हुई' के रूप में आई है।
04Khau Ujaru Sabhyata kya hai? खाऊ-उजाड़ू सभ्यता किसे कहते हैं?
पाठ के अनुसार खाऊ-उजाड़ू सभ्यता यूरोप और अमेरिका की देन है। यह वह जीवन पद्धति है जिसके कारण विकास की औद्योगिक सभ्यता 'उजाड़ की अपसभ्यता' बन गई है। अमेरिका ने घोषणा की है कि वह 'अपनी खाऊ-उजाड़ू जीवन पद्धति पर कोई समझौता नहीं करेगा।'
05लेखक ने नर्मदा को कहाँ-कहाँ देखा और उसकी क्या स्थिति थी?
लेखक ने दो जगहों से नर्मदा देखी — ओंकारेश्वर में और नेमावर के पास बजवाड़ा में। ओंकारेश्वर में सीमेंट-कंक्रीट का बड़ा बाँध बन रहा था। नेमावर के पास बजवाड़ा में नर्मदा 'शांत, गंभीर और भरी-पूरी थी।'
06विक्रमादित्य, भोज और मुंज ने मालवा के जल-प्रबंध के लिए क्या किया था?
पाठ के अनुसार मालवा के इन राजाओं ने 'तालाब बनवाए, बड़ी-बड़ी बाविड़याँ बनवाईं ताकि बरसात का पानी रुका रहे और धरती के गर्भ के पानी को जीवंत रख सकें।' ये कार्य 'पश्चिम के रिनेसां के बहुत पहले' हो गए थे।
07'छप्पन का काल' क्या है? पाठ में इसका उल्लेख क्यों आया है?
पाठ के अनुसार 'छप्पन का काल' 1899 का भीषण अकाल है जब मालवा में सिर्फ 15-75 इंच पानी गिरा था। लेखक ने यह बताने के लिए इसका उल्लेख किया कि तब भी 'राजस्थान के ठेठ मारवाड़ से लोग यहीं आए थे और तब भी खाने और पीने को काफी था' क्योंकि नदी-तालाब सँभाले हुए थे।
08धरती का वातावरण क्यों गरम हो रहा है? पाठ में क्या बताया गया है?
पाठ के अनुसार 'कार्बन डाइऑक्साइड गैसों ने मिलकर धरती के तापमान को तीन डिग्री सेल्सियस बढ़ा दिया है। ये गैसें सबसे ज्यादा अमेरिका और फिर यूरोप के विकसित देशों से निकलती हैं।'
09Prabhas Joshi ka Malwa se kya sambandh tha?
पाठ के लेखक परिचय के अनुसार 'प्रभाष जी में मालवा की मिट्टी के संस्कार गहरे तक बसे थे और वे इसी से ताकत पाते थे।' वे इंदौर जन्मे थे और उन्होंने 'देशज भाषा के शब्दों को मुख्यधारा में लाकर हिंदी पत्रकारिता को नया तेवर दिया।'
10'नयी दुनिया' की लाइब्रेरी का पाठ में क्या महत्त्व है?
पाठ के अनुसार 'नयी दुनिया' की लाइब्रेरी में पानी के सन् 1878 से रिकॉर्ड मौजूद हैं। ये 128 साल की जानकारी 'आँख खोलने के लिए काफी है।' वहीं कमलेश सेन और अशोक जोशी ने खाऊ-उजाड़ू सभ्यता से संबंधित कतरनें भी संग्रहीत की हैं।
11आधुनिक नियोजकों और इंजीनियरों की क्या गलती बताई गई है?
पाठ के अनुसार 'हमारे आज के नियोजकों और इंजीनियरों ने तालाबों को गाद से भर जाने दिया और जमीन के पानी को पाताल से भी निकाल लिया। नदी-नाले सूख गए। पग-पग नीरवाला मालवा सूखा हो गया।'
12क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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