Summary
पाठ 19 — "चाँद का बच्चा" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक प्यारी कविता है जिसमें एक बच्चा अपनी अम्मा के साथ आकाश में दिखने वाले पतले-दुबले चाँद को देखकर उसे चाँद का बच्चा कहता है। कवि अफ़सर मेरठी ने लिखी इस कविता में बच्चा याद करता है कि पहले चाँद गोल और बड़ा था, बादलों में छुपता-निकलता खेल करता था, और अब यह छोटा-सा चाँद उसी बड़े चाँद का बच्चा है।
- कविता का सारांश — एक बच्चा अपनी अम्मा को आकाश में पतला-दुबला चाँद दिखाता है और कहता है कि यह तो चाँद का बच्चा लग रहा है। वह याद करता है कि उस दिन चाँद गोल और बड़ा था, और बादलों से लुकाछिपी खेल रहा था।
- कवि का नाम — यह कविता अफ़सर मेरठी ने लिखी है। उनकी यह कविता बच्चों की सरल भाषा में चाँद की बदलती आकृति को बहुत ही सुंदर ढंग से दर्शाती है।
- मुख्य भाव — चाँद की बदलती आकृति — कविता में दिखाया गया है कि चाँद हमेशा एक जैसा गोल नहीं दिखता — कभी वह पतला होता है, कभी गोल और बड़ा। बच्चा इस बदलाव को अपनी समझ से समझाता है कि पतला चाँद दरअसल बड़े चाँद का बच्चा है।
- पाठ से सीख — इस कविता से बच्चे सीखते हैं कि प्रकृति में हर चीज़ बदलती रहती है — जैसे चाँद कभी पतला, कभी गोल दिखता है। माँ और बच्चे के बीच का प्यार भी इस कविता में झलकता है।
- शब्दार्थ — 'मुन्ना-सा' का अर्थ है बहुत छोटा और प्यारा। 'तमाशा' का अर्थ है खेल या करतब — यहाँ चाँद का बादलों में छुपना-निकलना तमाशा कहलाया है।
Key points & formulas
- 01यह कविता 'चाँद का बच्चा' अफ़सर मेरठी ने लिखी है।
- 02कविता में एक बच्चा अपनी अम्मा को पतला-दुबला चाँद दिखाता है।
- 03बच्चा पतले चाँद को 'चाँद का बच्चा' कहता है।
- 04बच्चे को याद है कि पहले चाँद गोल और बड़ा था।
- 05उस दिन चाँद बादलों में छुपता और निकलता था — जैसे खेल कर रहा हो।
- 06बच्चा सोचता है कि यह पतला चाँद एक दिन बड़ा और गोल हो जाएगा।
- 07अम्मा बच्चे को प्यार से 'मेरा चाँद' कहती थीं — कविता इसी पर खत्म होती है।
Frequently asked questions
01कविता 'चाँद का बच्चा' किसने लिखी है?
यह कविता अफ़सर मेरठी ने लिखी है।
02कविता में बच्चा चाँद को क्या कहता है?
बच्चा पतले चाँद को 'चाँद का बच्चा' कहता है — यानी उसे लगता है कि यह छोटा-सा चाँद बड़े चाँद का बच्चा है।
03कविता में चाँद कैसा दिख रहा है?
कविता में चाँद दुबला और पतला दिख रहा है। बच्चा कहता है — 'इतना दुबला, इतना पतला, कब होता है ऐसा चाँद!'।
04बच्चे को पहले का चाँद कैसा याद है?
बच्चे को याद है कि पहले चाँद गोल और बड़ा था। वह बादलों में छुपता-निकलता था।
05कविता में चाँद ने क्या तमाशा किया था?
चाँद बादलों में हँसते-हँसते छुप जाता था और फिर निकल आता था — इसी को कविता में तमाशा कहा गया है।
06बच्चा यह क्यों सोचता है कि बड़ा चाँद घर में बैठा होगा?
बच्चे के मन में यह विचार आता है कि अगर आकाश में छोटा चाँद है, तो बड़ा गोल चाँद अपने घर में बैठा होगा — जैसे उसने अपना बच्चा भेजा हो।
07क्या पतला चाँद हमेशा पतला ही रहेगा?
नहीं। कविता में बच्चा कहता है कि यह पतला चाँद भी एक दिन अच्छा, गोल और बड़ा चाँद बन जाएगा।
08बच्चा अपनी अम्मा से क्या पूछता है?
बच्चा अम्मा से पूछता है कि कल उन्होंने उसे 'मेरा चाँद' क्यों कहा था — जिससे पता चलता है कि अम्मा उसे प्यार से 'मेरा चाँद' कहती थीं।
09कविता का नाम 'चाँद का बच्चा' क्यों रखा गया होगा?
कविता में बच्चा पतले चाँद को देखकर उसे चाँद का बच्चा मानता है। इसीलिए इस कविता का नाम 'चाँद का बच्चा' रखा गया।
10क्या चाँद हमेशा गोल दिखता है?
नहीं, चाँद हमेशा गोल नहीं दिखता। कभी वह पतला होता है और कभी गोल — यही इस कविता में दिखाया गया है।
11कविता में 'मुन्ना-सा' का क्या मतलब है?
'मुन्ना-सा' का मतलब है बहुत छोटा और प्यारा। कविता में छोटे चाँद को 'छोटा-सा मुन्ना-सा चाँद' कहा गया है।
12चाँद और बादलों के बीच क्या हो रहा था?
चाँद बादलों के पीछे छुप जाता था और फिर निकल आता था — जैसे वह बादलों के साथ खेल रहा हो।
13यह कविता किस पाठ्यपुस्तक में है?
यह कविता कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी के पाठ 19 में है।
14कविता से बच्चों को क्या सीखने को मिलता है?
इस कविता से बच्चे सीखते हैं कि चाँद की आकृति बदलती रहती है और हर छोटी चीज़ भी बड़ी बन सकती है। साथ ही माँ और बच्चे के बीच का प्यार भी इस कविता में झलकता है।
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