Summary
पाठ 9 — "आलू की सड़क" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक मज़ेदार कहानी है जिसमें एक भालू अपनी नानी के घर जाते समय छेद वाले बोरे से आलू गिराता जाता है, और एक चालाक बंदर उन गिरे हुए आलुओं को देखकर पता लगा लेता है कि भालू कहाँ जा रहा है। यह पाठ इकाई 3 "हमारा खान-पान" का हिस्सा है और इसे चंदन यादव ने लिखा है।
- कहानी का सारांश — एक भालू अपनी नानी के घर जाने के लिए बोरा भर आलू पीठ पर रखकर चल पड़ता है। बोरे में छेद होने के कारण रास्ते में आलू टपकते जाते हैं और एक पूरी सड़क बन जाती है।
- बंदर की चतुराई — रास्ते में पीपल के पेड़ पर बैठे बंदर ने भालू से पूछा कि वह कहाँ जा रहा है, पर भालू ने कोई उत्तर नहीं दिया। बंदर ने नीचे गिरे आलुओं को देखकर खुद ही पता लगा लिया कि भालू कहाँ जा रहा है।
- पाठ से सीख — इस कहानी से बच्चों को यह सीख मिलती है कि ध्यान से देखकर और सोचकर हम किसी भी बात का पता लगा सकते हैं। यह भी पता चलता है कि टूटे या छेद वाले बर्तन और बोरे को उपयोग में लाने से पहले जाँचना ज़रूरी है।
- आवाज़ों की दुनिया — पाठ में विभिन्न प्रकार की आवाज़ों से बच्चों को परिचित कराया गया है, जैसे घंटी बजने पर 'टन-टन', बादल गरजने पर 'घड़-घड़', और पानी टपकने पर 'टप-टप'। भालू के चलने की आवाज़ 'धपप-धपप' और आलू के टपकने की आवाज़ 'टपप-टपप' बच्चों को ध्वनि का अनुभव कराती है।
- भाषा की मस्ती — शब्दों का खेल — पाठ में 'ब' से शुरू होने वाले शब्द पहचानने और 'भालू' शब्द में 'भा' की जगह दूसरे अक्षर जोड़कर नए शब्द बनाने जैसी गतिविधियाँ दी गई हैं। 'उ' और 'ऊ' की मात्राओं में अंतर समझाने के लिए उल्लू, कुर्ता, ऊन, फूल, सूरज जैसे शब्द दिए गए हैं।
Key points & formulas
- 01यह कहानी चंदन यादव ने लिखी है।
- 02भालू अपनी नानी के घर जाने के लिए बोरा भर आलू पीठ पर रखकर चला।
- 03बोरे में छेद होने के कारण रास्ते में आलू टपकते रहे — धपप, टपप, धपप, टपप।
- 04रास्ते में पीपल के पेड़ पर एक बंदर बैठा था जिसने भालू से पूछा 'कहाँ जा रहे हो?'
- 05भालू ने बंदर को कोई उत्तर नहीं दिया।
- 06बंदर ने रास्ते में गिरे आलू देखकर खुद पता लगा लिया कि भालू कहाँ जा रहा है।
- 07पाठ में घंटी, बादल, पानी आदि की अलग-अलग आवाज़ें सिखाई गई हैं।
Frequently asked questions
01'आलू की सड़क' कहानी किसने लिखी है?
यह कहानी चंदन यादव ने लिखी है।
02भालू कहाँ जा रहा था?
भालू अपनी नानी के घर जा रहा था।
03भालू ने अपनी पीठ पर क्या रखा था?
भालू ने एक बोरे में भर-भर कर आलू अपनी पीठ पर रखे थे।
04रास्ते में आलू क्यों गिरते रहे?
क्योंकि बोरे में छेद था, इसलिए चलते-चलते आलू टपकते रहे।
05भालू के चलने की और आलू टपकने की आवाज़ें क्या थीं?
भालू के चलने की आवाज़ थी 'धपप, धपप, धपप' और आलू टपकने की आवाज़ थी 'टपप, टपप, टपप'।
06रास्ते में पेड़ पर कौन बैठा था?
रास्ते में पीपल के पेड़ पर एक बंदर बैठा था।
07बंदर ने भालू से क्या पूछा?
बंदर ने भालू से पूछा, 'कहाँ जा रहे हो, भैया?'
08भालू ने बंदर को उत्तर क्यों नहीं दिया?
कहानी में भालू ने बंदर के सवाल का जवाब नहीं दिया; बंदर को बस 'धपप, टपप' की आवाज़ें ही सुनाई दीं।
09बंदर ने कैसे पता लगाया कि भालू कहाँ जा रहा है?
बंदर ने पेड़ से नीचे देखा तो रास्ते में आलू पड़े हुए दिखे। उन गिरे हुए आलुओं की राह देखकर उसने अनुमान लगा लिया कि भालू किस तरफ जा रहा है।
10इस पाठ में किस-किस आवाज़ के बारे में बताया गया है?
पाठ में घंटी बजने पर 'टन-टन', बादल गरजने पर 'घड़-घड़', और पानी टपकने पर 'टप-टप' जैसी आवाज़ों का उल्लेख है।
11'आलू की सड़क' कहानी से बच्चों को क्या सीख मिलती है?
ध्यान से देखकर और सोचकर हम किसी भी रहस्य का पता लगा सकते हैं, जैसे बंदर ने गिरे हुए आलुओं से भालू का रास्ता जाना।
12यह पाठ किस इकाई में है?
यह पाठ सारंगी की इकाई 3 'हमारा खान-पान' में है।
13पाठ में 'ब' से शुरू होने वाले शब्दों की पहचान क्यों कराई गई है?
भाषा की गतिविधि के रूप में बच्चों को 'ब' से शुरू होने वाले शब्द पहचानने और लिखने का अभ्यास कराया गया है, जैसे 'बस्ता'।
14'उ' और 'ऊ' की मात्राएँ सिखाने के लिए कौन-से शब्द दिए गए हैं?
उल्लू, कुर्ता, बगुला, ऊन, फूल, और सूरज जैसे शब्दों से 'उ' और 'ऊ' की मात्राओं में अंतर समझाया गया है।
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