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Sarangi (सारंगी)

Hindi Textbook19 Chapters

Chapter notes

What you'll learn in Sarangi (सारंगी)

A quick revision map of Sarangi (सारंगी) — the core idea and five key takeaways from each chapter. Tap any chapter to read the full NCERT PDF and detailed notes.

01

मीना का परिवार

पाठ 1 — "मीना का परिवार" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक प्यारी कहानी है जो मीना के सात सदस्यों वाले परिवार — दादा, दादी, माता, पिता, चाचा, मीना और छोटे भाई दिवाकर — का परिचय कराती है। इसमें बच्चे सीखते हैं कि परिवार के सभी सदस्य मिल-जुलकर काम करते हैं और एक-दूसरे से प्यार करते हैं।

  • 1मीना के परिवार में सात सदस्य हैं — दादा, दादी, माता, पिता, चाचा, मीना और भाई दिवाकर।
  • 2दिवाकर तीन साल का है और बहुत नटखट और चुलबुला है।
  • 3दिवाकर दरवाजे के पीछे छिप जाता है और मीना उसे ढूँढती है।
  • 4मीना दिवाकर को गिनती सिखाती है — एक, दो, तीन, चार।
  • 5दादी और माँ बरामदे में फल काट रही हैं; पिता और दादाजी गमलों में पानी दे रहे हैं।
02

दादा-दादी

पाठ 2 — "दादा-दादी" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक छोटी और आनंदमयी कविता है जो दादाजी और दादी के प्रेमपूर्ण स्वभाव का चित्रण करती है। इसमें दादाजी और दादी का भूरी खादी पहनना, दादी का गाना गाना और दादाजी का मुस्कुराना दिखाया गया है।

  • 1कविता के कवि श्रीप्रसाद हैं।
  • 2दादाजी और दादी दोनों भूरी खादी पहनते हैं।
  • 3दादी गाना गाती हैं और दादाजी मुस्कुराते हैं।
  • 4कभी-कभी दादाजी भी कोई गाना गाते हैं।
  • 5पाठ में 'दादा-दादी' की जगह 'नाना-नानी' कहकर कविता दोहराने की गतिविधि दी गई है।
03

रीना का दिन

पाठ 3 — "रीना का दिन" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक छोटी कहानी है जो रीना नाम की लड़की की सुबह से रात तक की दिनचर्या बताती है — सुबह उठना, दाँत साफ़ करना, नहाना, स्कूल जाना, पढ़ाई करना, खेलना और रात को दादी की शुभ रात्रि के साथ सो जाना।

  • 1रीना सुबह जल्दी उठकर बिस्तर ठीक करती है।
  • 2वह नीम की दातुन से दाँत और साबुन से नहाती है।
  • 3रास्ते में सहेली दीपा से मिलकर दोनों साथ स्कूल जाती हैं।
  • 4स्कूल में सभी बच्चे खड़े होकर अध्यापिका को नमस्ते करते हैं।
  • 5घर आकर रीना हाथ-मुँह धोती है और परिवार को स्कूल की बातें बताती है।
04

रानी भी

पाठ 4 — "रानी भी" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक छोटी-सी कहानी है जिसमें दो बहनें रमा और रानी हैं — रानी अपनी बड़ी बहन रमा की हर बात नकल करती है, लेकिन अभी बहुत छोटी होने के कारण माँ उसे स्कूल नहीं जाने देतीं।

  • 1रमा और रानी दो बहनें हैं — रानी हमेशा रमा के साथ रहती है।
  • 2रानी ने रमा के साथ बालों में कंघी की और चप्पल पहनी।
  • 3रमा ने बस्ता उठाया; रानी ने भी एक झोला उठा लिया।
  • 4माँ ने रानी को स्कूल नहीं जाने दिया क्योंकि वह अभी बहुत छोटी है।
  • 5माँ ने प्यार से कहा — थोड़ी बड़ी होने पर रानी भी स्कूल जाएगी।
05

मिठाई

पाठ 5 — "मिठाई" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक मज़ेदार कहानी है जिसमें एक गधे को मिठाई खाने की इच्छा होती है और उसके मित्र जानवर उसे अलग-अलग मीठी चीज़ें खाने को कहते हैं, पर अंत में सभी मिलकर हलवाई की दुकान पर मिठाई खाने जाते हैं।

  • 1गधे का मन मिठाई खाने का हुआ और उसने अपने मित्रों से मदद माँगी।
  • 2भालू ने शहद खाने को कहा, लेकिन गधे ने मना कर दिया।
  • 3खरगोश ने गाजर, चींटे ने गुड़, हाथी ने गन्ना, और गिलहरी ने आम का सुझाव दिया।
  • 4गधे ने सबके सुझाव मना कर दिए।
  • 5बिल्ली ने हलवाई की दुकान पर चलने का सुझाव दिया जो गधे को पसंद आया।
06

तीन साथी

पाठ 6 — "तीन साथी" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक छोटी कहानी है जिसमें हाथी, बकरी और चिड़िया मिलकर सच्चे दोस्त बन जाते हैं। कहानी में दिखाया गया है कि मुसीबत में एक-दूसरे की मदद करने से गहरी दोस्ती होती है।

  • 1हाथी और बकरी जंगल में साथ-साथ जाते थे — हाथी डाली झुकाता और बकरी पत्ते खाती।
  • 2एक दिन जंगल में तालाब के पास बेर का पेड़ मिला — हाथी ने पेड़ हिलाया और बकरी बेर खाने लगी।
  • 3पेड़ से चिड़िया का बच्चा तालाब में गिर गया; बकरी बचाने गई तो वह भी डूबने लगी।
  • 4हाथी ने चिड़िया के बच्चे और बकरी दोनों को तालाब से बाहर निकाला।
  • 5बड़े होने पर चिड़िया का बच्चा पता लगाता कि कहाँ फल लगे हैं और तीनों साथ जाकर फल खाते।
07

वाह, मेरे घोड़े!

पाठ 7 — "वाह, मेरे घोड़े!" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक आनंदमयी कविता है जिसमें बच्चा अपने घोड़े को एक-दो-तीन कदम की ताल पर नैनीताल ले जाने, चने की दाल खिलाने और कमाल दिखाने के लिए प्यार से पुकारता है। कविता के लेखक रमेश तैलंग हैं।

  • 1कविता 'वाह, मेरे घोड़े!' के लेखक रमेश तैलंग हैं।
  • 2'एक कदम, दो कदम, तीन कदम ताल' — यह पंक्ति कविता में चार बार दोहराई गई है।
  • 3बच्चा अपने घोड़े को नैनीताल ले जाना चाहता है।
  • 4घोड़े को चने की दाल खिलाने की बात कविता में कही गई है।
  • 5कविता में ताल, चाल, दाल और कमाल — ये समान अंत वाले शब्द हैं।
08

खतरे में साँप

पाठ 8 — "खतरे में साँप" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक मज़ेदार कहानी है जिसमें जंगल के सभी जानवर मिलकर यह सोचते हैं कि खतरे में अपनी जान कैसे बचाएँ। बंदर की सलाह पर सब जानवर "सिर पर पैर रखकर भागने" का फ़ैसला करते हैं, लेकिन बेचारे साँप वहीं बैठे रह जाते हैं क्योंकि उनके पैर ही नहीं होते। यह कहानी चंदन यादव ने लिखी है।

  • 1यह कहानी चंदन यादव ने लिखी है।
  • 2जंगल के सभी जानवर मिलकर खतरे से बचने के उपाय पर बहस करते हैं।
  • 3बंदर की सलाह — "सिर पर पैर रखकर भागना" — सबको सबसे अच्छी लगती है।
  • 4साँप के पैर नहीं होते, इसलिए वे वहीं बैठे रह जाते हैं।
  • 5"सिर पर पैर रखकर भागना" का अर्थ है बहुत तेज़ भाग जाना।
09

आलू की सड़क

पाठ 9 — "आलू की सड़क" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक मज़ेदार कहानी है जिसमें एक भालू अपनी नानी के घर जाते समय छेद वाले बोरे से आलू गिराता जाता है, और एक चालाक बंदर उन गिरे हुए आलुओं को देखकर पता लगा लेता है कि भालू कहाँ जा रहा है। यह पाठ इकाई 3 "हमारा खान-पान" का हिस्सा है और इसे चंदन यादव ने लिखा है।

  • 1यह कहानी चंदन यादव ने लिखी है।
  • 2भालू अपनी नानी के घर जाने के लिए बोरा भर आलू पीठ पर रखकर चला।
  • 3बोरे में छेद होने के कारण रास्ते में आलू टपकते रहे — धपप, टपप, धपप, टपप।
  • 4रास्ते में पीपल के पेड़ पर एक बंदर बैठा था जिसने भालू से पूछा 'कहाँ जा रहे हो?'
  • 5भालू ने बंदर को कोई उत्तर नहीं दिया।
10

झूलम-झूली

पाठ 10 — "झूलम-झूली" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक आनंदमयी कविता है जिसमें बच्चे मिलकर माटी-माटी, झूलम-झूली, छुपम-छुपी और कूदम-कूदी जैसे मज़ेदार खेल खेलते हैं और धरती में बीज बोने का काम भी करते हैं। कवि श्याम सुशील ने इस कविता में बाहर खेलने की खुशी और प्रकृति से जुड़ाव को सरल शब्दों में दिखाया है।

  • 1कविता "झूलम-झूली" के कवि श्याम सुशील हैं।
  • 2कविता में बच्चे माटी-माटी, पानी-पानी, झूलम-झूली, छुपम-छुपी, पकड़म-पकड़ी और कूदम-कूदी खेलते हैं।
  • 3बच्चे धरती में बीज बोकर खेल किसानी भी खेलते हैं।
  • 4"झटपट कहिए" में खट और पट दो भाई हैं जो एक मटर पाकर आधी-आधी खाते हैं।
  • 5शब्दों के खेल में छुपम-छुपी, झूलम-झूली जैसे जोड़े बनाना सिखाया गया है।
11

भुट्टे

पाठ 11 — "भुट्टे" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक छोटी कहानी है जिसमें नीना के नाना बाजार से भुट्टे लाते हैं, नाना भुट्टे भूनते हैं और नानी भुट्टे उबालती हैं — सभी मिलकर जी भरकर भुट्टे खाते हैं।

  • 1नीना के नाना बाजार से खूब सारे भुट्टे लाए।
  • 2नाना ने नीना के लिए भुट्टे भूने।
  • 3नीना ने जी भरकर भुट्टे खाए।
  • 4नीना की नानी ने भुट्टे उबाले।
  • 5नाना और नानी ने मिलकर जी भरकर भुट्टे खाए।
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फूली रोटी

पाठ 12 — "फूली रोटी" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक मज़ेदार कहानी है जिसमें जमाल नाम का बच्चा माँ के साथ मिलकर रोटी बेलना सीखता है। जमाल कटोरी की मदद से रोटी गोल बनाता है और माँ के सेंकने पर रोटी खूब फूलती है। पाठ में मनोज कुमार राय की एक मज़ेदार कविता भी है जो गोल न बनने वाली रोटी के बारे में है।

  • 1जमाल ने माँ से आटे की एक छोटी लोई माँगी और रोटी बेलना सुरू किया।
  • 2जमाल की रोटी गोल नहीं बन रही थी, तो ज़ू ने उसे कटोरी दी।
  • 3जमाल ने कटोरी रोटी पर रखकर घुमाई और रोटी गोल हो गई।
  • 4माँ ने जमाल की रोटी सेंकी और रोटी खूब फूली।
  • 5जमाल और ज़ू दोनों खुशी से रोटी खाने लगे।
13

मेला

पाठ 13 — "मेला" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी का एक आनंदमयी कविता है जिसमें बच्चे घर के पास लगे मेले में चाट खाते हैं, झूले झूलते हैं, रंग-बिरंगे खिलौने खरीदते हैं और मेले का भरपूर आनंद लेते हैं। कविता के कवि रमेश थानवी हैं।

  • 1मेला बच्चों के घर के पास लगा था।
  • 2मेले में चाट का ठेला आया और बच्चों ने चाट खाई।
  • 3बच्चों ने मेले में झूले झूले और मन में खुशी नहीं समाई।
  • 4बच्चे मेले से चार रंग-बिरंगे और सुंदर खिलौने लेकर आए।
  • 5गुड़िया, गुनगुन और छोटू तीनों साथ मिलकर मेले गए।
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बरखा और मेघा

पाठ 14 — "बरखा और मेघा" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक छोटी कहानी है जिसमें दो सहेलियाँ — मुर्गी मेघा और बत्तख बरखा — अपने-अपने बच्चों के साथ मेला देखने दूसरे गाँव जाती हैं, रास्ते में नदी आने पर मिलकर उसे पार करती हैं, और यह सीख देती हैं कि मिलजुलकर काम करने से हर मुश्किल हल हो जाती है।

  • 1इस कहानी में दो सहेलियाँ हैं — मुर्गी मेघा और बत्तख बरखा।
  • 2दोनों सहेलियों के तीन-तीन बच्चे हैं।
  • 3सब मिलकर मेला देखने दूसरे गाँव जाते हैं।
  • 4रास्ते में नदी आने पर मेघा डर जाती है।
  • 5बरखा सबको पास बुलाकर अपनी युक्ति बताती है और सब तैरकर नदी पार कर लेते हैं।
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होली

पाठ 15 — "होली" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक आनंदमयी कविता है जिसमें होली के त्योहार की खुशी, रंग-गुलाल, ढोल, पिचकारी, पुए-पकवान और आपसी मेलजोल का सजीव चित्रण है। यह कविता मधुर अथैया द्वारा लिखी गई है।

  • 1यह कविता 'होली' त्योहार पर लिखी गई है।
  • 2कविता की रचना मधुर अथैया ने की है।
  • 3बच्चे मित्रों की टोली के साथ मिलकर होली खेलते हैं।
  • 4लाल गुलाल लगाते हैं और पिचकारी से रंग उड़ाते हैं।
  • 5ढोल बजाकर होली के गीत गाए जाते हैं।
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जन्मदिवस पर पेड़ लगाओ

पाठ 16 — "जन्मदिवस पर पेड़ लगाओ" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक आनंदमयी कविता है जिसमें बच्चों को अपने जन्मदिन पर पेड़ लगाने की प्रेरणा दी गई है। कवि राजा चौरसिया कहते हैं कि पेड़ लगाने से हरा-भरा और खुशहाल संसार बनता है। पेड़ माता की तरह हमें फूल और फल देते हैं।

  • 1इस कविता के कवि राजा चौरसिया हैं।
  • 2कविता में जन्मदिन पर पेड़ लगाने की बात कही गई है।
  • 3पेड़ लगाने से हरा-भरा संसार बनता है।
  • 4हरियाली से खुशहाली आती है।
  • 5पेड़ और प्रकृति का रिश्ता माँ जैसा बताया गया है।
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हवा

पाठ 17 — "हवा" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक आनंदमयी कविता है जिसमें हवा मुन्नी के साथ खेलती है और मुन्नी उसे फुग्गे में पकड़ने की बात कहती है।

  • 1इस पाठ की कविता का नाम 'हवा' है और यह इकाई 5 'हिंदी-भिंदी दुनिया' में है।
  • 2हवा साँय-साँय करते हुए ऊपर-नीचे, दाएँ-बाएँ चलती है।
  • 3हवा मुन्नी को छेड़कर पेड़ पर चढ़ जाती है और कहती है कि वह हाथ नहीं आएगी।
  • 4मुन्नी हँसकर कहती है कि वह हवा को पकड़कर फुग्गे में ले जाएगी।
  • 5पाठ में हवा, फुग्गा, गुब्बारा, खेल और मुन्नी — ये शब्द दिए गए हैं।
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कितनी प्यारी है ये दुनिया

पाठ 18 — "कितनी प्यारी है ये दुनिया" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक सुंदर कविता है जिसमें बच्चे को हवा, धरती, पेड़-पौधे, जानवर, परिवार और सारी दुनिया से प्यार है। कवयित्री जयंती मनोकरन ने इस कविता में बताया है कि दुनिया की हर चीज़ — चाहे फूल हो, फल हो, किताबें हों या माँ-बापू — सभी प्यारे लगते हैं।

  • 1यह कविता जयंती मनोकरन ने लिखी है।
  • 2बच्चे को हवा, सूरज और बारिश प्यारे लगते हैं।
  • 3धरती, समुद्र और आसमान भी उसे अच्छे लगते हैं।
  • 4चिड़ियाँ, जानवर और मछलियाँ — सभी प्यारी लगती हैं।
  • 5फूल, फल, किताबें, कपड़े और खिलौने भी अच्छे लगते हैं।
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चाँद का बच्चा

पाठ 19 — "चाँद का बच्चा" कक्षा 1 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक प्यारी कविता है जिसमें एक बच्चा अपनी अम्मा के साथ आकाश में दिखने वाले पतले-दुबले चाँद को देखकर उसे चाँद का बच्चा कहता है। कवि अफ़सर मेरठी ने लिखी इस कविता में बच्चा याद करता है कि पहले चाँद गोल और बड़ा था, बादलों में छुपता-निकलता खेल करता था, और अब यह छोटा-सा चाँद उसी बड़े चाँद का बच्चा है।

  • 1यह कविता 'चाँद का बच्चा' अफ़सर मेरठी ने लिखी है।
  • 2कविता में एक बच्चा अपनी अम्मा को पतला-दुबला चाँद दिखाता है।
  • 3बच्चा पतले चाँद को 'चाँद का बच्चा' कहता है।
  • 4बच्चे को याद है कि पहले चाँद गोल और बड़ा था।
  • 5उस दिन चाँद बादलों में छुपता और निकलता था — जैसे खेल कर रहा हो।

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