Summary
'Varsha-Bahaar' Class 7 Hindi (Malhar) ka kavita hai — मुकुटधर पाण्डेय द्वारा रचित यह कविता वर्षा ऋतु की प्राकृतिक सुंदरता और उससे उत्पन्न सर्वव्यापी आनंद का मनोरम वर्णन करती है।
मुकुटधर पाण्डेय की कविता 'वर्षा-बहार' वर्षा ऋतु के विविध दृश्यों को जीवंत रूप में प्रस्तुत करती है। घने बादल, बिजली की चमक, पानी की बरसात और झरनों के बहने के साथ ठंडी हवा से डालियाँ हिलती हैं। मालिनें बागों में गीत गाती हैं, तालों के जलचर प्रसन्न होते हैं, पपीहे ग्रीष्म की गर्मी से राहत पाते हैं, मोर वन में नृत्य करते हैं, मेंढक मधुर गीत गाते हैं, गुलाब खिलकर सुगंध फैलाता है और किसान खेतों में मनहर गीत गाते हैं। कवि का संदेश है कि सारे जगत की शोभा वर्षा पर ही निर्भर है।
Key points & formulas
- 01कवि: मुकुटधर पाण्डेय (1895–1989); जन्म — छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में; भारत सरकार द्वारा 'पद्मश्री' से सम्मानित; रचनाएँ 'सरस्वती' और 'माधुरी' पत्रिकाओं में प्रकाशित होती थीं।
- 02विधा: कविता (वर्षा ऋतु पर आधारित प्रकृति-वर्णन कविता)।
- 03केंद्रीय भाव: वर्षा ऋतु सबके मन को लुभाती है और सारे जगत की शोभा वर्षा पर निर्भर है।
- 04कविता में गीत गाने वाले तीन हैं — मालिनें (बागों में), मेंढक (सुगीत गाकर) और किसान (खेतों में मनहर गीत)।
- 05शब्दार्थ — नभ: आकाश; छटा: प्राकृतिक दृश्य या शोभा; घनघोर: घने और घिरे हुए बादल।
- 06शब्दार्थ — आमोद: आनंद, हर्ष, खुशी, प्रसन्नता; सौरभ: सुगंध।
- 07शब्दार्थ — मनहर: मन को हरने वाला अर्थात् सुंदर; जलचर: जल में रहने वाले जीव।
Frequently asked questions
01Varsha-Bahaar का सारांश क्या है?
मुकुटधर पाण्डेय की कविता 'वर्षा-बहार' वर्षा ऋतु के विविध दृश्यों का वर्णन करती है — घने बादल, बिजली, बारिश, ठंडी हवा, हिलती डालियाँ, मालिनों के गीत, तालों के प्रसन्न जलचर, ग्रीष्म से राहत पाते पपीहे, नृत्य करते मोर, गाते मेंढक, खिलता गुलाब और खेतों में गीत गाते किसान। अंत में कवि कहते हैं — सारे जगत की शोभा वर्षा पर ही निर्भर है।
02Varsha-Bahaar के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि मुकुटधर पाण्डेय (1895–1989) हैं। उनका जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था। किशोरावस्था में ही उन्होंने कविता और लेख लिखना शुरू किया और उनकी रचनाएँ 'सरस्वती' और 'माधुरी' पत्रिकाओं में प्रमुखता से प्रकाशित होती थीं। हिंदी साहित्य में योगदान के लिए भारत सरकार ने उन्हें 'पद्मश्री' से सम्मानित किया।
03Varsha-Bahaar का केंद्रीय भाव क्या है?
इस कविता का केंद्रीय भाव यह है कि वर्षा ऋतु सबके मन को लुभाती है — मनुष्य, पशु, पक्षी और जलचर सभी इसके आगमन से प्रसन्न होते हैं। कविता की अंतिम पंक्ति — 'सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर' — यह स्पष्ट करती है कि वर्षा पर ही सृष्टि की समस्त शोभा और जीवन निर्भर है।
04मुकुटधर पाण्डेय का जन्म कहाँ हुआ था?
मुकुटधर पाण्डेय का जन्म छत्तीसगढ़ के बिलासपुर में हुआ था। उनका जीवनकाल 1895 से 1989 तक रहा।
05'सारे जगत की शोभा, निर्भर है इसके ऊपर' पंक्ति का क्या अर्थ है?
इस पंक्ति का अर्थ है कि संसार की सारी सुंदरता और जीवन वर्षा पर आश्रित है। वर्षा के बिना न पेड़-पौधे हरे रहते, न नदी-तालाब भरते, न खेतों में फसल होती और न ही जीव-जंतु प्रसन्न रहते।
06कविता में कौन-कौन गीत गा रहे हैं?
कविता में तीन गाने वाले हैं — (1) मालिनें, जो बागों में सुंदर गीत गाती हैं; (2) मेंढक, जो सुगीत (प्यारे गीत) गाकर सबको लुभाते हैं; और (3) किसान, जो खेतों में मनहर गीत गाते हैं।
07'आमोद' शब्द का क्या अर्थ है?
पाठ में दिए अनुसार 'आमोद' या 'मोद' का अर्थ है — आनंद, हर्ष, खुशी, प्रसन्नता।
08कविता में पपीहे क्या करते हैं?
कविता में पपीहे वर्षा आने पर इधर-उधर घूमते हैं और ग्रीष्म ऋतु की गर्मी (ताप) से राहत पाते हैं — 'फिरते लखो पपीहे, हैं ग्रीष्म ताप खोते।'
09वर्षा-बहार कविता में मोर क्या करते हैं?
कविता में कहा गया है कि वर्षा आने पर सभी मोर वन में नृत्य करते हैं — 'करते हैं नृत्य वन में, देखो ये मोर सारे।'
10'बहार' शब्द का क्या अर्थ है और शीर्षक में इसका क्या महत्त्व है?
पाठ में बताया गया है कि 'बहार' वसंत ऋतु का दूसरा नाम है। शीर्षक 'वर्षा-बहार' में वर्षा और बहार को एक साथ रखकर वर्षा ऋतु को वसंत जैसी आनंददायक और सुंदर ऋतु के रूप में प्रस्तुत किया गया है।
11Varsha-Bahaar summary in hindi
'वर्षा-बहार' कविता के कवि मुकुटधर पाण्डेय हैं। यह कविता वर्षा ऋतु की प्राकृतिक सुंदरता का वर्णन करती है — बादल, बिजली, बारिश, ठंडी हवा, मोर का नृत्य, मेंढक का गीत, किसानों का उल्लास और गुलाब की सुगंध। कवि का मुख्य संदेश है कि वर्षा पर ही सारे जगत की शोभा निर्भर है।
12क्या Varsha-Bahaar अध्याय की PDF मुफ़्त है?
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