Summary
'Meera Ke Pad' Class 7 Hindi (Malhar) ka bhakti-pad hai — इसमें संत कवयित्री मीरा ने दो पदों के माध्यम से श्रीकृष्ण के प्रति अपनी अटूट भक्ति और प्रेम व्यक्त किया है।
इस पाठ में मीरा के दो भक्ति-पद हैं। पहले पद 'बसो मेरे नैनन में नंदलाल' में मीरा श्रीकृष्ण से अपनी आँखों में बस जाने की विनती करती हैं और उनके मनोहर रूप — साँवरी सूरत, होंठों पर बाँसुरी, वक्षस्थल पर वैजंती माला, कमर पर क्षुद्र घंटिकाएँ और पैरों में नूपुर — का वर्णन करती हैं। दूसरे पद 'बरसे बदरिया सावन की' में सावन की वर्षा ऋतु का सुंदर चित्रण है — बादलों का उमड़ना, बिजली की चमक, नन्ही-नन्ही बूँदें और शीतल पवन। मीरा के मन में उमंग उठती है क्योंकि उन्हें हरि (श्रीकृष्ण) के आने की भनक सुनाई दी है।
Key points & formulas
- 01कवयित्री: मीरा — संत कवयित्री और कृष्णभक्त; ये पद लगभग 500 वर्ष पूर्व रचे गए थे
- 02विधा: भक्ति-पद (भजन) — दो पद हैं
- 03केंद्रीय भाव: श्रीकृष्ण के प्रति गहरी भक्ति; उनकी मनोहर छवि को अपनी आँखों में बसाने की कामना
- 04पहले पद में श्रीकृष्ण के रूप का वर्णन — अधर पर बाँसुरी, उर पर वैजंती माला, कमर पर क्षुद्र घंटिकाएँ, पैरों में मधुर नूपुर
- 05दूसरे पद में सावन का चित्रण — उमड़ते-घुमड़ते बादल, दामिनी की चमक, नन्ही बूँदें, शीतल पवन; मीरा को हरि के आने की भनक सुनकर मन में उमंग आती है
- 06कठिन शब्दार्थ: नंदलाल = नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण; गिरधर = पर्वत धारण करने वाले, श्रीकृष्ण; नूपुर = घुंघरू, पैर का गहना; भनक = धीमी अस्पष्ट ध्वनि, उड़ती हुई खबर
- 07मीरा ने पदों में अपना नाम जोड़ा ('मीरा के प्रभु') — यह उनके समय के कवियों की परंपरा थी
Frequently asked questions
01Meera Ke Pad का सारांश क्या है?
इस पाठ में मीरा के दो पद हैं। पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण (नंदलाल) से अपनी आँखों में बस जाने की प्रार्थना करती हैं और उनके सुंदर रूप का वर्णन करती हैं — बाँसुरी, वैजंती माला, कमर की घंटियाँ और पैरों के नूपुर। दूसरे पद में सावन की वर्षा का चित्रण है — बादलों का उमड़ना, बिजली की चमक, नन्ही बूँदें और शीतल पवन; मीरा को श्रीकृष्ण के आने की भनक सुनकर मन में उमंग होती है।
02Meera Ke Pad के कवि/कवयित्री कौन हैं?
इन पदों की रचना संत कवयित्री मीरा ने की है। वे हिंदी की महान कवयित्री, कृष्णभक्त और संत थीं। एक राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने संतों का जीवन चुना, महलों को त्यागकर तीर्थ यात्राएँ कीं और मंदिरों में भजन गाए।
03Meera Ke Pad का केंद्रीय भाव क्या है?
इन पदों का केंद्रीय भाव श्रीकृष्ण के प्रति मीरा की अटूट भक्ति और प्रेम है। पहले पद में वे श्रीकृष्ण की मनोहर छवि को अपनी आँखों में बसाना चाहती हैं। दूसरे पद में सावन की ऋतु उनके मन में उमंग भर देती है क्योंकि उन्हें हरि के आने की सूचना मिली है।
04Meera Ke Pad summary in hindi
मीरा के दो भक्ति-पद इस पाठ में हैं। पहले पद में मीरा नंदलाल (श्रीकृष्ण) से अपनी आँखों में बसने की विनती करती हैं। वे उनकी साँवरी सूरत, होंठों पर बाँसुरी, वक्ष पर वैजंती माला, कमर पर घंटियाँ और पैरों में नूपुर का वर्णन करती हैं। दूसरे पद में सावन की वर्षा का सुंदर चित्रण है — चारों दिशाओं से बादल घिरते हैं, बिजली चमकती है, नन्ही बूँदें बरसती हैं, और शीतल पवन बहती है। मीरा के मन में उमंग है क्योंकि उन्हें हरि (गिरधरनागर) के आने की भनक सुनाई दी।
05मीरा कौन थीं? उनके जीवन के बारे में बताइए।
मीरा हिंदी की महान कवयित्री, कृष्णभक्त और संत थीं। उन्होंने ये पद आज से लगभग 500 वर्ष पहले रचे थे। वे बचपन से ही कृष्ण की भक्ति में मगन रहती थीं। एक राजकुमारी होते हुए भी उन्होंने संतों का जीवन चुना, महलों को त्यागकर तीर्थ यात्राएँ कीं, मंदिरों में भजन गाए और सत्संग किया। उनके भजन आज भी श्रद्धा और प्रेम से गाए और सुने जाते हैं।
06पहले पद 'बसो मेरे नैनन में नंदलाल' में मीरा क्या प्रार्थना कर रही हैं?
पहले पद में मीरा श्रीकृष्ण (नंदलाल) से विनती कर रही हैं कि वे उनकी आँखों में बस जाएँ। वे श्रीकृष्ण के मनोहर रूप का वर्णन करती हैं — मोहनी मूरत, साँवरी सूरत, विशाल नयन, होंठों पर सुरीली बाँसुरी, छाती पर वैजंती माला, कमर पर क्षुद्र घंटिकाएँ और पैरों में मधुर नूपुर। वे कहती हैं कि उनके प्रभु संतों को सुख देने वाले और भक्तों से स्नेह करने वाले गोपाल हैं।
07दूसरे पद 'बरसे बदरिया सावन की' में किस ऋतु का वर्णन है और मीरा का मन कैसा है?
दूसरे पद में वर्षा ऋतु (सावन) का वर्णन है। चारों दिशाओं से बादल उमड़-घुमड़ कर आते हैं, बिजली चमकती है, नन्ही-नन्ही बूँदें बरसती हैं और शीतल सुहावनी पवन बहती है। मीरा का मन सावन में इसलिए उमंग से भर उठा है क्योंकि उन्हें हरि (श्रीकृष्ण) के आने की भनक सुनाई दी है। वे अपने प्रभु को गिरधरनागर कहती हैं।
08नंदलाल, गिरधर और वैजंती माल शब्दों के क्या अर्थ हैं?
नंदलाल का अर्थ है — नंद के पुत्र, श्रीकृष्ण। गिरधर का अर्थ है — पर्वत को धारण करने वाले, श्रीकृष्ण। वैजंती माल उस माला को कहते हैं जो वैजयंती पौधे के बीजों से बनाई जाती है — पद में यह माला श्रीकृष्ण के वक्षस्थल पर शोभायमान है।
09Malhar Class 7 Chapter 10 में कठिन शब्दों के अर्थ क्या हैं?
कुछ प्रमुख शब्दार्थ: नूपुर = घुंघरू, पैर का गहना; भनक = धीमी अस्पष्ट ध्वनि या उड़ती हुई खबर; उमग्यो = उमंग उठी, उल्लास हुआ; दामिन = दामिनी, बिजली; मेह = वर्षा, बरसात; अधर = होंठ; उर = हृदय, मन; क्षुद्र = छोटा, नन्हा; घंटिका = छोटी घंटी, घुंघरू; भक्तवछल = भक्त को प्यार करने वाला।
10मीरा ने अपने पदों में अपना नाम क्यों जोड़ा?
मीरा ने अपने पदों में 'मीरा के प्रभु संतन सुखदाई' और 'मीरा के प्रभु गिरधरनागर' — इस तरह अपना नाम सम्मिलित किया। यह मीरा के समय के अनेक कवियों की परंपरा थी कि वे अपनी रचना के अंत में अपना नाम जोड़ देते थे। इसे छाप-परंपरा कहा जाता है।
11सावन के महीने में मीरा के मन में उमंग क्यों उठी?
पद के अनुसार मीरा ने श्रीकृष्ण (हरि) के आने की भनक (उड़ती हुई खबर) सुनी, इसीलिए सावन में उनका मनवा (मन) उमंग से भर गया। वर्षा की ऋतु, बादलों का घिरना और शीतल पवन मिलकर उनके आनंद को और बढ़ा देते हैं।
12मीरा का श्रीकृष्ण के प्रति भाव किस प्रकार का था?
मीरा का श्रीकृष्ण के प्रति भाव गहरी भक्ति और प्रेम का था। वे श्रीकृष्ण को अपने प्रभु, नंदलाल और गिरधरनागर कहती हैं। उन्हें 'संतन सुखदाई' और 'भक्तवछल गोपाल' भी कहती हैं अर्थात् संतों को सुख देने वाला और भक्तों से स्नेह करने वाला। उनकी छवि को आँखों में बसाए रखना ही मीरा की भक्ति का प्रमाण है।
13क्या Meera Ke Pad अध्याय की PDF मुफ़्त है?
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