Summary
'Buddhih Sarvarthasadhika' Class 6 Sanskrit (Deepakam) ka paath hai — इस पाठ में एक कथा के माध्यम से बताया गया है कि शरीरबल से बुद्धिबल श्रेष्ठ है; एक चतुर शशकराज ने चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब का उपयोग कर गजराज को भ्रमित किया और सारे शशकों को सुरक्षित किया।
एक वन के बड़े सरोवर के किनारे अनेक शशक (खरगोश) बिलों में रहते थे। प्रतिदिन गजयूथ (हाथियों का दल) वहाँ आकर जलक्रीड़ा करता था, जिससे शशक घायल और मृत हो जाते थे। शशकराज ने बुद्धि का प्रयोग किया — उसने रात को गजराज के पास जाकर कहा कि यह सरोवर चन्द्रमा (शशाङ्क) का वासस्थान है और शशक उसकी प्रजा हैं। फिर जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब दिखाया। गजराज भयभीत होकर वहाँ से सदा के लिए चला गया। सिद्ध हुआ — 'बुद्धिः सर्वार्थसाधिका'।
Key points & formulas
- 01यह पाठ एक संस्कृत कथा (नैतिक कहानी) है जो सिद्ध करती है कि बुद्धिबल शरीरबल से अधिक महत्त्वपूर्ण है।
- 02प्रमुख पात्र: शशकराज (बुद्धिमान खरगोश) और गजराज (शक्तिशाली हाथी)।
- 03शशकराज ने गजराज को बताया कि सरोवर चन्द्रमा का वासस्थान है; जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब दिखाकर उसे भयभीत किया।
- 04पाठ की केंद्रीय शिक्षा (moral): 'बुद्धिः सर्वार्थसाधिका' — बुद्धि से सभी प्रयोजन सिद्ध होते हैं।
- 05प्रमुख शब्द-अर्थ: सरोवरः = तालाब, शशकः = खरगोश, गजः = हाथी, प्रतिबिम्बम् = प्रतिबिम्ब, शशाङ्कः = चन्द्रमा, भीताः = डरे हुए, चिन्तामग्नः = चिन्तित।
- 06व्याकरण-बिंदु: क्रियापद का मूल धातु कहलाता है; जैसे गच्छति → गम्, भवन्ति → भू, पठति → पठ्।
- 07इस पाठ में लट्लकार (वर्तमानकाल) के तीन पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और तीन वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) का परिचय भी दिया गया है।
Frequently asked questions
01Buddhih Sarvarthasadhika paath mein kya sikhaya gaya hai?
इस पाठ में सिखाया गया है कि बुद्धिबल शरीरबल से अधिक महत्त्वपूर्ण है। एक छोटा शशकराज अपनी चतुराई से शक्तिशाली गजराज को भ्रमित करके अपने साथी शशकों को सुरक्षित बचा लेता है।
02Buddhih Sarvarthasadhika ka arth kya hai?
'बुद्धिः सर्वार्थसाधिका' का अर्थ है — बुद्धि सभी प्रयोजनों को सिद्ध करने वाली है। अर्थात् बुद्धिमानी से कठिन से कठिन काम भी आसान हो जाता है।
03इस पाठ का मुख्य पात्र कौन है?
इस पाठ का मुख्य पात्र शशकराज है — एक बुद्धिमान खरगोश जो चन्द्रमा के प्रतिबिम्ब का सहारा लेकर गजराज को भ्रमित करता है और सारे शशकों की रक्षा करता है।
04शशकराज ने गजराज को क्या कहा?
शशकराज ने गजराज को बताया कि यह सरोवर चन्द्रमा (शशाङ्क) का वासस्थान है और शशक उसकी प्रजा हैं। उसने यह भी कहा कि जब शशक जीवित रहते हैं तभी चन्द्रमा प्रसन्न रहता है।
05गजराज ने सरोवर के पास क्या देखा और उसने क्या किया?
गजराज ने सरोवर के जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब देखा और भयभीत होकर चन्द्रमा को नमस्कार किया। इसके बाद वह अपने गजयूथ के साथ वहाँ से सदा के लिए चला गया और फिर कभी उस सरोवर के पास नहीं आया।
06शशाङ्कः शब्द का अर्थ क्या है?
'शशाङ्कः' का अर्थ है चन्द्रमा। पाठ में बताया गया है कि शशक (खरगोश) उसकी प्रजा हैं, इसीलिए चन्द्रमा 'शशाङ्क' नाम से प्रसिद्ध है।
07प्रतिबिम्बम् शब्द का हिन्दी अर्थ क्या है?
'प्रतिबिम्बम्' का हिन्दी अर्थ है प्रतिबिम्ब (Reflection)। पाठ में शशकराज ने जल में चन्द्रमा का प्रतिबिम्ब दिखाकर गजराज को भ्रमित किया।
08शशकाः क्यों भयभीत और चिन्तित थे?
गजयूथ (हाथियों का दल) प्रतिदिन सरोवर में आकर जल पीता, स्नान करता और क्रीड़ा करता था। उनके परिभ्रमण से सरोवर के किनारे बिलों में रहने वाले शशक घायल (क्षतविक्षत) और मृत हो जाते थे। इसी से वे भीताः (डरे हुए) और चिन्तामग्नः (चिन्तित) हो गए।
09धातु क्या होती है? पाठ में इसे कैसे समझाया गया है?
क्रियापदों का मूल (root) धातु कहलाता है। जैसे 'पठति' क्रियापद की धातु 'पठ्' है। पाठ में उदाहरण दिए गए हैं: गच्छति → गम्, भवन्ति → भू (भव्), निवसन्ति → नि+वस्, नमति → नम्।
10लट्लकार क्या है? इस पाठ में इसकी क्या जानकारी दी गई है?
लट्लकार वर्तमानकाल (present tense) में प्रयुक्त होता है। इस पाठ में तीन पुरुष (प्रथम, मध्यम, उत्तम) और तीन वचन (एकवचन, द्विवचन, बहुवचन) के अनुसार क्रियापद-रूप सिखाए गए हैं; जैसे पठति, पठतः, पठन्ति आदि।
11इस कथा की नैतिक शिक्षा (moral) क्या है?
इस कथा की शिक्षा है कि बुद्धि से कठिन से कठिन कार्य भी सिद्ध हो जाता है। शरीरबल से बुद्धिबल का महत्त्व अधिक है — यही 'बुद्धिः सर्वार्थसाधिका' का संदेश है।
12क्या Buddhih Sarvarthasadhika अध्याय की PDF मुफ़्त है?
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