Class 2 Hindi

Chapter 24 — गिरे ताल में चंदा मामा

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Overview

Summary

पाठ 24 — "गिरे ताल में चंदा मामा" कक्षा 2 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी की एक आनंदमयी कविता है जिसमें तालाब के पानी में चंद्रमा का प्रतिबिंब देख सबको अचंभा होता है।

  • सारांश — तालाब में चंदा मामाइस कविता में बच्चे तालाब के पानी में चंदा मामा का प्रतिबिंब गिरते हुए देखते हैं। मछुआरा जाल फेंकता है, लेकिन जाल समेटने पर चंदा मामा कहीं नहीं मिलते — सब पूछते हैं, चंदा मामा कहाँ गए?
  • कवि — राजेश जोशीमुख्य कविता "गिरे ताल में चंदा मामा" राजेश जोशी ने लिखी है। "मिलकर पढ़िए" वाली छोटी कविता "चाँद की रोटी" मोहम्मद साकिब खान ने लिखी है।
  • मुख्य भाव — अचंभा और कल्पनाकविता का मुख्य भाव है कि पानी में चाँद का प्रतिबिंब देखकर मन में अचंभा और कौतूहल जगता है। बच्चों को खेल-खेल में समझ आता है कि यह असली चाँद नहीं, बल्कि उसकी परछाई है।
  • पाठ से सीखयह कविता सिखाती है कि जो चीज़ हमें अजीब या अचंभित करे, उसके बारे में सोचना और सवाल पूछना ज़रूरी है। परछाई और असली चीज़ में फ़र्क पहचानना एक ज़रूरी समझ है।
  • शब्दार्थ और शब्दों का खेलपाठ में 'अचंभा' शब्द का अर्थ समझने की गतिविधि है — इसका मतलब है कोई हैरान करने वाली या अनोखी बात देखना। बच्चों को सही वाक्य चुनकर इस शब्द का सही उपयोग समझना होता है।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01कविता 'गिरे ताल में चंदा मामा' राजेश जोशी ने लिखी है।
  2. 02इस कविता में तालाब के पानी में चंदा मामा का प्रतिबिंब दिखता है।
  3. 03मछुआरे ने जाल समेटा तो चंदा मामा कहीं नहीं मिले — सबको अचंभा हुआ।
  4. 04'अचंभा' का अर्थ है — कोई हैरान करने वाली या अनोखी बात देखना।
  5. 05'मिलकर पढ़िए' वाली कविता 'चाँद की रोटी' मोहम्मद साकिब खान ने लिखी है।
  6. 06'चाँद की रोटी' में मछली पानी में चाँद की परछाई देखती है पर खा नहीं पाती।
  7. 07गतिविधि में बच्चे कविता में 'चंदा मामा' की जगह 'सूरज दादा' लिखकर नई कविता बनाते हैं।
Questions

Frequently asked questions

01

'गिरे ताल में चंदा मामा' कविता किसने लिखी है?

यह कविता राजेश जोशी ने लिखी है।

02

इस कविता में क्या हुआ जो सबने देखा?

तालाब में चंदा मामा गिरे और सबने देखा। मछुआरे ने जाल डाला पर चंदा मामा कहीं नहीं मिले।

03

मछुआरे ने क्या किया?

मछुआरे ने तालाब में जाल समेटा। जाल में चंदा मामा नहीं मिले क्योंकि वह तो चंदा का प्रतिबिंब था।

04

कविता में 'अचंभा' किसे कहा गया है?

सबने एक अचंभा देखा — तालाब में चंदा मामा दिखे, पर जाल में नहीं आए। यह हैरान करने वाली बात थी।

05

'अचंभा' शब्द का क्या अर्थ है?

'अचंभा' का अर्थ है कोई ऐसी बात जो हमें हैरान कर दे या जो अनोखी लगे।

06

पाठ में 'अचंभा' का सही वाक्य कौन-सा है?

पाठ के अनुसार सही वाक्य है — 'यह देखकर अचंभा हुआ कि आधे मैदान में बारिश हुई और आधा मैदान सूखा था।'

07

'मिलकर पढ़िए' वाली कविता 'चाँद की रोटी' किसने लिखी है?

'चाँद की रोटी' कविता मोहम्मद साकिब खान ने लिखी है।

08

'चाँद की रोटी' में चाँद की रोटी किसे कहा गया है?

पानी में चाँद का प्रतिबिंब देखकर उसे 'चाँद की रोटी' कहा गया है।

09

मछली चाँद की रोटी क्यों नहीं खा पाई?

पानी में चाँद की परछाई थी, असली रोटी नहीं। इसलिए मछली उसे खा नहीं पाई।

10

पाठ में बच्चों को क्या नई कविता बनानी है?

बच्चों को कविता में 'चंदा मामा' की जगह 'सूरज दादा' कहकर नई कविता पढ़नी और कॉपी में लिखनी है।

11

इस कविता में कितनी कविताएँ हैं?

इस पाठ में दो कविताएँ हैं — राजेश जोशी की 'गिरे ताल में चंदा मामा' और मोहम्मद साकिब खान की 'चाँद की रोटी'।

12

यह पाठ किस पाठ्यपुस्तक में है?

यह पाठ कक्षा 2 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक सारंगी में है और इसका पाठ संख्या 24 है।

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