Class 12 Hindi

Chapter 4 — Camera Mein Band Apahij

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Overview

Summary

NCERT Class 12 Hindi Aroh Camera Mein Band Apahij — यह कविता रघुवीर सहाय द्वारा रचित है, जो 'लोग भूल गये हैं' संग्रह से ली गई है; इसमें दूरदर्शन के एक कार्यक्रम के माध्यम से मीडिया की संवेदनहीनता और अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा के व्यावसायिक दोहन की विडंबना को उजागर किया गया है।

रघुवीर सहाय की यह कविता एक ऐसे दूरदर्शन कार्यक्रम का चित्रण करती है जिसमें 'समर्थ शक्तिवान' आयोजक एक अपाहिज व्यक्ति को बुलाकर उससे उसकी पीड़ा बार-बार बताने पर जोर देते हैं। 'कार्यक्रम रोचक बनाने के वास्ते' उसे रुलाने की कोशिश की जाती है। कोष्ठक में दिए निर्देश — 'कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा' और 'परदे पर वक्त की कीमत है' — पर्दे के पीछे की क्रूरता उजागर करते हैं। अंत में आयोजक मुसकुराते हुए 'धन्यवाद' कहते हैं, जो इस पूरी संवेदनहीनता की पराकाष्ठा है। कवि ने दिखाया है कि करुणा जगाने के मकसद से शुरू हुआ कार्यक्रम क्रूर बन जाता है।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि-परिचय: रघुवीर सहाय का जन्म सन् 1929 में लखनऊ (उत्तर प्रदेश) में और निधन सन् 1990 में दिल्ली में हुआ; साहित्य अकादेमी पुरस्कार विजेता; पत्रकार एवं कवि।
  2. 02प्रमुख रचनाएँ: 'सीढ़ियों पर धूप में', 'आत्महत्या के विरुद्ध', 'हँसो-हँसो जल्दी हँसो'; अज्ञेय द्वारा संपादित 'दूसरा सप्तक' (1951) में आरंभिक कविताएँ।
  3. 03विधा एवं स्रोत: कविता; 'लोग भूल गये हैं' संग्रह से संकलित।
  4. 04केंद्रीय भाव: दूरदर्शन कार्यक्रम के बहाने मीडिया की व्यावसायिक संवेदनहीनता पर व्यंग्य — अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा को 'रोचक' बनाने के लिए उसका शोषण करने की प्रवृत्ति का चित्रण।
  5. 05काव्य-शिल्प: कविता बातचीत की सहज शैली में लिखी गई है; कोष्ठकों ('कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा', 'यह प्रश्न पूछा नहीं जाएगा', 'परदे पर वक्त की कीमत है') के माध्यम से पर्दे के पीछे के निर्देश और असली मंशा उजागर होती है।
  6. 06कठिन शब्दार्थ: अपाहिज = शारीरिक रूप से विकलांग व्यक्ति; दुर्बल = कमज़ोर; कसमसाहट = बेचैनी/तड़पन (जैसे 'उसके होंठों पर एक कसमसाहट भी')।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: अपंगता = शारीरिक विकलांगता (जैसे 'उसकी अपंगता की पीड़ा'); समर्थ = शक्तिसंपन्न (जैसे 'हम समर्थ शक्तिवान')।
Questions

Frequently asked questions

01

'Camera Mein Band Apahij' kavita ke kavi kaun hain?

इस कविता के कवि रघुवीर सहाय हैं। उनका जन्म सन् 1929 में लखनऊ में और निधन सन् 1990 में दिल्ली में हुआ। उन्हें साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

02

कैमरे में बंद अपाहिज कविता का केंद्रीय भाव क्या है?

यह कविता दूरदर्शन के एक कार्यक्रम के माध्यम से मीडिया की संवेदनहीनता को उजागर करती है। कवि ने दिखाया है कि 'करुणा जगाने के मकसद से शुरू हुआ कार्यक्रम क्रूर बन जाता है' — अपाहिज की पीड़ा 'कार्यक्रम रोचक बनाने के वास्ते' एक वस्तु बन जाती है।

03

कविता में कोष्ठकों में रखी पंक्तियों का क्या औचित्य है?

कोष्ठक में दी पंक्तियाँ जैसे 'कैमरा दिखाओ इसे बड़ा बड़ा', 'यह प्रश्न पूछा नहीं जाएगा', और 'परदे पर वक्त की कीमत है' — कार्यक्रम के पर्दे के पीछे के निर्देश हैं जो आयोजक की असली मानसिकता उजागर करते हैं।

04

'हम समर्थ शक्तिवान / हम एक दुर्बल को लाएँगे' पंक्ति का क्या भाव है?

इन पंक्तियों में 'समर्थ शक्तिवान' (कार्यक्रम आयोजक) और 'दुर्बल' (अपाहिज व्यक्ति) के बीच की शक्ति-असमानता दर्शाई गई है। स्रोत-पाठ के अनुसार कवि ने इन पंक्तियों के माध्यम से व्यंग्य किया है।

05

यह कविता किस संग्रह से ली गई है?

यह कविता रघुवीर सहाय के 'लोग भूल गये हैं' संग्रह से ली गई है।

06

Raghuveer Sahay ki pramukh rachnaen kaun-si hain?

उनकी प्रमुख काव्य-रचनाएँ हैं — 'सीढ़ियों पर धूप में', 'आत्महत्या के विरुद्ध', 'हँसो-हँसो जल्दी हँसो'; तथा अज्ञेय द्वारा संपादित 'दूसरा सप्तक' (1951) में आरंभिक कविताएँ।

07

'परदे पर वक्त की कीमत है' — इस पंक्ति का क्या भाव है?

यह पंक्ति कोष्ठक में है और दर्शाती है कि जब अपाहिज व्यक्ति रो नहीं पाता तो कैमरा बंद कर दिया जाता है — 'परदे पर वक्त की कीमत है' यानी दूरदर्शन के लिए समय व्यावसायिक मूल्य का है, अपाहिज की पीड़ा का नहीं।

08

'फूली हुई आँख की एक बड़ी तसवीर' का क्या आशय है?

कविता में आयोजक 'फूली हुई आँख की एक बड़ी तसवीर / बहुत बड़ी तसवीर' परदे पर दिखाने की बात करता है — यह दर्शाता है कि अपाहिज व्यक्ति की पीड़ा का दृश्य बड़ा करके दर्शकों को प्रभावित करने का प्रयास है।

09

कविता में 'सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम' वाली पंक्ति का क्या महत्त्व है?

कविता के अंत में 'आप देख रहे थे सामाजिक उद्देश्य से युक्त कार्यक्रम' — यह पंक्ति पूरे कार्यक्रम की विडंबना को उजागर करती है: जो कार्यक्रम 'सामाजिक उद्देश्य' का दावा करता है, वह वास्तव में अपाहिज की पीड़ा का शोषण करता है।

10

कविता में अपाहिज व्यक्ति की क्या स्थिति दर्शाई गई है?

कविता में अपाहिज व्यक्ति अपनी पीड़ा 'बता नहीं पाता'। आयोजक 'सोचिए / बताइए / थोड़ी कोशिश करिए' जैसे आग्रह करता रहता है। उसके होंठों पर 'कसमसाहट' दिखती है पर वह अपेक्षित रूप से रो नहीं पाता।

11

Raghuveer Sahay ko kaun-sa puraskar mila?

रघुवीर सहाय को साहित्य अकादेमी पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

12

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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