Class 12 Hindi

Chapter 1 — Aatmaparichay, Ek Geet

Open PDFReads in your browser
Overview

Summary

NCERT Class 12 Hindi Aroh Aatmaparichay, Ek Geet — ये दोनों कविताएँ हरिवंश राय बच्चन (जन्म 1907, इलाहाबाद; निधन 2003, मुंबई) द्वारा रचित हैं, जिनमें आत्मपरिचय में कवि का जग से प्रीतिकलह का संबंध और एक गीत में समय के गुजरने की चंचल अनुभूति व्यक्त होती है।

आत्मपरिचय में कवि हरिवंश राय बच्चन जग-जीवन का भार उठाते हुए भी प्यार और स्नेह-सुरा के पान की बात करते हैं। उनका जग से संबंध 'प्रीतिकलह' का है — उन्माद में अवसाद, रोदन में राग, शीतल वाणी में आग। वे स्वप्नों का संसार लिए मस्त दीवाने की भाँति चलते हैं और 'दुनिया का तलबगार' नहीं हैं। एक गीत में 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' की टेक के सहारे थका पंथी, नीड़ों से झाँकते चिड़ियों के बच्चे और कवि का आत्म-प्रश्न — सब मिलकर समय की क्षणभंगुरता और लक्ष्य की ओर बढ़ने के जज्बे को चित्रित करते हैं।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि परिचय: हरिवंश राय बच्चन, जन्म सन् 1907 इलाहाबाद में, निधन सन् 2003 मुंबई में; 1942-1952 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक, तत्पश्चात् आकाशवाणी के साहित्यिक कार्यक्रमों से संबद्ध और विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ।
  2. 02विधा: गीत-कविता; पाठ के अनुसार बच्चन ने 'छायावाद की लाक्षणिक वक्रता के बजाय सीधी-सादी जीवंत भाषा और संवेदनसिक्त गेय शैली में' अपनी बात कही।
  3. 03आत्मपरिचय का केंद्रीय भाव: पाठ के अनुसार 'दुनिया से मेरा संबंध प्रीतिकलह का है, मेरा जीवन विरोधों का सामंजस्य है' — जग का भार उठाते हुए भी प्यार, स्वप्न और मस्ती साथ लिए चलना।
  4. 04विरोधाभासमूलक सामंजस्य: 'उन्मादों में अवसाद, रोदन में राग, शीतल वाणी में आग' — कवि के व्यक्तित्व में परस्पर विरोधी भाव एकसाथ विद्यमान हैं।
  5. 05एक गीत का भाव: 'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' — पाठ के अनुसार 'समय के गुजरते जाने के एहसास में लक्ष्य-प्राप्ति के लिए कुछ कर गुजरने का जज्बा' इस गीत में है।
  6. 06हालावादी दर्शन: पाठ में कहा गया है — 'जीवन एक तरह का मधुकलश है, दुनिया मधुशाला है, कल्पना साकी और कविता वह प्याला जिसमें ढालकर जीवन पाठक को पिलाया जाता है' — इसे बच्चन का हालावादी दर्शन कहते हैं।
  7. 07कठिन शब्दार्थ — स्नेह-सुरा: प्रेम रूपी मादक पेय ('मैं स्नेह-सुरा का पान किया करता हूँ'); तलबगार: चाहने वाला, इच्छुक ('दुनिया का तलबगार नहीं हूँ'); प्रत्याशा: प्रतीक्षा, आस ('बच्चे प्रत्याशा में होंगे')।
Questions

Frequently asked questions

01

आत्मपरिचय और एक गीत किसने लिखी?

ये दोनों कविताएँ हरिवंश राय बच्चन ने लिखी हैं। उनका जन्म सन् 1907 में इलाहाबाद में और निधन सन् 2003 में मुंबई में हुआ।

02

Aatmaparichay poem ka central theme kya hai?

पाठ के अनुसार, 'दुनिया से मेरा संबंध प्रीतिकलह का है, मेरा जीवन विरोधों का सामंजस्य है।' कवि जग-जीवन का भार उठाते हुए भी प्यार, स्वप्न और मस्ती से भरे रहते हैं।

03

Harivansh Rai Bachchan ka janm kab aur kahan hua?

पाठ के अनुसार उनका जन्म सन् 1907 में इलाहाबाद में हुआ और निधन सन् 2003 में मुंबई में हुआ।

04

'शीतल वाणी में आग' का क्या अर्थ है?

यह पंक्ति पाठ में है: 'उन्मादों में अवसाद, रोदन में राग, शीतल वाणी में आग।' इसका भाव है कि कवि की बाहरी शांत वाणी के भीतर आंतरिक आवेग की अग्नि छिपी है।

05

'दिन जल्दी-जल्दी ढलता है' में पंथी क्यों जल्दी चलता है?

गीत की पंक्तियाँ हैं: 'हो जाए न पथ में रात कहीं, / मंजिल भी तो है दूर नहीं — / यह सोच थका दिन का पंथी भी जल्दी-जल्दी चलता है।' मंजिल पास देखकर थका यात्री भी तेज कदम बढ़ाता है।

06

Bachchan ki pramukh rachnaen kaun si hain?

पाठ के अनुसार — मधुशाला (1935), मधुबाला (1938), मधुकलश (1938), निशा निमंत्रण, एकांत संगीत, आकुल-अंतर (काव्य संग्रह); और क्या भूलूँ क्या याद करूँ, नीड़ का निर्माण फिर, बसेरे से दूर, दशद्वार से सोपान तक (आत्मकथा चार खंड)।

07

'नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना' का आशय क्या है?

यह पंक्ति आत्मपरिचय में है: 'कर यत्न मिटे सब, सत्य किसी ने जाना? / नादान वहीं है, हाय, जहाँ पर दाना!' आशय है कि जो समझदार (दाना) दिखते हैं, उनके पास भी अज्ञान (नादान) विद्यमान है।

08

बच्चन का हालावादी दर्शन क्या है?

पाठ में लिखा है: 'जीवन एक तरह का मधुकलश है, दुनिया मधुशाला है, कल्पना साकी और कविता वह प्याला जिसमें ढालकर जीवन पाठक को पिलाया जाता है। इसे बच्चन का हालावादी दर्शन कहते हैं।'

09

एक गीत में चिड़ियों के बच्चों का उल्लेख क्यों है?

गीत में है: 'बच्चे प्रत्याशा में होंगे, / नीड़ों से झाँक रहे होंगे — / यह ध्यान परों में चिड़ियों के भरता कितनी चंचलता है!' पाठ के अनुसार, किसी प्रिय से मिलने की आस ही प्रयास के पगों में चंचल तेजी भर देती है।

10

'मैं दुनिया का हूँ एक नया दीवाना' — इसका भाव क्या है?

कवि कहते हैं: 'मैं दीवानों का वेश लिए फिरता हूँ, / मादकता निःशेष लिए फिरता हूँ।' वे दुनिया की परवाह न करते हुए भी 'मस्ती का संदेश लिए फिरता हूँ' — यह उनकी विशेष पहचान है।

11

बच्चन ने किस विश्वविद्यालय में अध्यापन किया?

पाठ के अनुसार, बच्चन '1942-1952 तक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में प्राध्यापक' रहे, इसके बाद विदेश मंत्रालय में हिंदी विशेषज्ञ।

12

आत्मपरिचय में कवि का जग से क्या संबंध है?

पाठ के अनुसार, 'दुनिया से मेरा संबंध प्रीतिकलह का है।' कवि 'जग-जीवन का भार लिए फिरता हूँ, / फिर भी जीवन में प्यार लिए फिरता हूँ' — विरोधों के सामंजस्य में जीते हैं।

13

Aatmaparichay mein kavi ne apne aap ko kya kaha hai?

कवि ने कहा है: 'मैं दुनिया का हूँ एक नया दीवाना!' साथ ही: 'दुनिया में हूँ, दुनिया का तलबगार नहीं हूँ / बाजार से गुजरा हूँ खरीदार नहीं हूँ।'

14

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

Keep learning

More chapters in Aroh

This is the complete Aroh Chapter 1 as published by NCERT — every diagram, solved example, and exercise included, free. Browse all CBSE Class 12 textbooks.

Read offline with notes, solutions & mock tests

CBSE Prepmaster — free on iOS & Android

Get the App