Class 11 Sanskrit

Chapter 11 — Navadravyani

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Overview

Summary

NCERT Class 11 Sanskrit Shashwati Navadravyani यह पाठ 17वीं शताब्दी के विद्वान अन्नम्भट्ट द्वारा रचित 'तर्कसंग्रह' ग्रन्थ से लिया गया संस्कृत गद्य-सूत्र पाठ है, जो वैशेषिक दर्शन के नौ द्रव्यों — पृथिवी, जल, तेजस्, वायु, आकाश, काल, दिक्, आत्मा और मनस् — का तार्किक परिचय देता है।

यह पाठ अन्नम्भट्ट रचित 'तर्कसंग्रह' से संकलित है। वैशेषिक दर्शन के अनुसार द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय और अभाव — ये सात पदार्थ हैं। द्रव्य के नौ भेद हैं: पृथिवी, अप् (जल), तेजस्, वायु, आकाश, काल, दिक्, आत्मा और मनस्। पाठ में प्रत्येक द्रव्य के नित्य-अनित्य भेद तथा विशेष गुणों का सूत्र-शैली में विवेचन है। गुण चौबीस प्रकार के और कर्म पाँच प्रकार के बताए गए हैं। इन सप्त पदार्थों के ज्ञान से मोक्ष प्राप्ति का मार्ग प्रशस्त होता है।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01पाठ का स्रोत एवं लेखक: यह पाठ अन्नम्भट्ट रचित 'तर्कसंग्रह' से लिया गया है; रचयिता का समय 17वीं शताब्दी है।
  2. 02विधा: संस्कृत गद्य-सूत्र शैली; 'तर्कसंग्रह' न्याय और वैशेषिक दर्शन के प्रवेश की कुंजी मानी जाती है।
  3. 03नव द्रव्य: पृथिवी, अप् (जल), तेजस् (अग्नि), वायु, आकाश, काल, दिक्, आत्मा और मनस् — ये नौ द्रव्य हैं।
  4. 04सप्त पदार्थ: द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय और अभाव — इन्हीं में समग्र विश्व का ज्ञान समाहित है।
  5. 05केंद्रीय भाव: स्रोत के अनुसार — 'द्रव्यादि सप्त पदार्थों के ज्ञान से लोकसिद्धि होकर निःश्रेयस अर्थात् मोक्ष प्राप्ति होती है।'
  6. 06प्रमुख श्लोक (योग्यताविस्तार से): 'काणादन्यायमतयोर्बालव्युत्पत्तिसिद्धये। अन्नम्भट्टेन विदुषा रचितस्तर्कसंग्रहः॥' — भावार्थ: काणाद और न्याय दर्शन को बालकों के लिए सुलभ बनाने हेतु विद्वान अन्नम्भट्ट ने तर्कसंग्रह की रचना की।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: समवायः = नित्य सम्बन्ध जो कार्य-कारण, गुण-गुणी के बीच होता है; अभावः = निषेधमुख अनुभव, चार प्रकार का (प्रागभाव, प्रध्वंसाभाव, अत्यन्ताभाव, अन्योन्याभाव); विभु = सर्वव्यापक।
  8. 08पञ्च कर्म: उत्क्षेपण (ऊपर उठाना), अपक्षेपण (नीचे आना), आकुञ्चन (सिकुड़ना), प्रसारण (फैलना) और गमन (अन्य सभी गतियाँ)।
Questions

Frequently asked questions

01

नवद्रव्याणि पाठ किस ग्रन्थ से लिया गया है?

यह पाठ अन्नम्भट्ट रचित 'तर्कसंग्रह' नामक ग्रन्थ से संकलित है।

02

Navadravyani ke rachayita kaun hain?

तर्कसंग्रह के रचयिता अन्नम्भट्ट हैं, जिनका समय 17वीं शताब्दी माना जाता है।

03

वैशेषिक दर्शन के अनुसार नव द्रव्य कौन-से हैं?

पृथिवी, अप् (जल), तेजस् (अग्नि), वायु, आकाश, काल, दिक्, आत्मा और मनस् — ये नव द्रव्य हैं।

04

Saptapadarth kya hain — Navadravyani?

द्रव्य, गुण, कर्म, सामान्य, विशेष, समवाय और अभाव — ये सात पदार्थ हैं जिनका ज्ञान मोक्ष की ओर ले जाता है।

05

अभाव कितने प्रकार का होता है?

अभाव चार प्रकार का है — प्रागभाव, प्रध्वंसाभाव, अत्यन्ताभाव और अन्योन्याभाव।

06

पञ्च कर्म कौन-कौन से हैं?

उत्क्षेपण, अपक्षेपण, आकुञ्चन, प्रसारण और गमन — ये पाँच कर्म हैं।

07

समवाय का अर्थ क्या है?

'जिसके कारण यह इसमें है' — ऐसी अनुभूति का नाम समवाय है। यह नित्य सम्बन्ध है जो कार्य-कारण, गुण-गुणी तथा जाति और व्यक्ति के बीच होता है।

08

तर्कसंग्रह का उद्देश्य क्या है?

स्रोत के अनुसार बालकों को न्याय और वैशेषिक दर्शन का ज्ञान सुलभ रूप से कराना इसका उद्देश्य है। यह ग्रन्थ व्याकरण एवं साहित्य शास्त्रों के लक्षण जानने की जिज्ञासा भी उत्पन्न करता है।

09

Navadravyani mein Atma kitne prakar ki hai?

आत्मा दो प्रकार की है — जीवात्मा और परमात्मा। परमात्मा सर्वज्ञ और एक ही है; जीवात्मा प्रत्येक शरीर में भिन्न, सर्वव्यापी और नित्य है।

10

मनस् को किसका साधन कहा गया है?

मनस् को दुःखादि की उपलब्धि का साधन (इन्द्रिय) कहा गया है। यह प्रत्येक आत्मा में नियत, परमाणु रूप और नित्य है।

11

आकाश का गुण क्या है?

स्रोत के अनुसार शब्द आकाश का गुण है। आकाश एक, सर्वव्यापी (विभु) और नित्य है।

12

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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