Summary
NCERT Class 11 Sanskrit Shashwati Mano Hi Mahatam Dhanam पाठ महाभारत के उद्योग पर्व (अध्याय 131 और 134) से संकलित श्लोकों पर आधारित है। महर्षि वेदव्यास की इस पद्य-रचना में वीरमाता विदुरा अपने पराजित पुत्र को स्वाभिमान एवं क्षात्र-धर्म का उपदेश देती हैं।
यह पाठ महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत के उद्योग पर्व के 131 और 134 अध्यायों से संकलित श्लोकों का संग्रह है। विदुरा नामक वीर माता अपने पुत्र को, जो सिन्धुराज से युद्ध में पराजित होकर हतोत्साहित हो गया है, कठोर शब्दों में भर्त्सना करते हुए उठकर कुल का उत्थान करने का उपदेश देती है। पाठ में मान (स्वाभिमान) को महान पुरुषों का सर्वोच्च धन बताया गया है। आत्मबल, स्वबाहुबल से जीवन यापन और परोपकार की महिमा का वर्णन इस पाठ के केंद्रीय विषय हैं।
Key points & formulas
- 01पाठ का स्रोत एवं विधा: यह पाठ महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत के उद्योग पर्व के अध्याय 131 और 134 से संकलित है; यह पद्य (श्लोक) विधा में रचित है।
- 02केंद्रीय भाव: 'मानो हि महतां धनम्' — मान (स्वाभिमान) ही महान पुरुषों का सबसे बड़ा धन है; कायरता और आत्मसम्मान-हीनता सबसे बड़ी दरिद्रता है।
- 03मुख्य पात्र एवं घटना: विदुरा (वीरमाता) सिन्धुराज से पराजित और निराश पुत्र को उठकर शत्रु से लड़ने या वीरगति पाने का उपदेश देती हैं; कुन्ती इस पुरातन प्रसंग की प्रस्तुतकर्त्री हैं।
- 04प्रमुख श्लोक (श्लोक 1): "क्षात्रधर्मरता धन्या विदुरा दीर्घदर्शिनी। विश्रुता राजसंसत्सु श्रुतवाक्या बहुश्रुता॥" — भावार्थ: विदुरा क्षात्र-धर्म में निरत, दूरदर्शिनी और राजसभाओं में प्रसिद्ध विदुषी नारी थीं।
- 05प्रमुख श्लोक (श्लोक 7): "य आत्मनः प्रियसुखे हित्वा मृगयते श्रियम्। अमात्यानामथो हर्षमादधात्यचिरेण सः॥" — भावार्थ: जो व्यक्ति अपने सुख-आराम को छोड़कर ऐश्वर्य की खोज करता है, वह शीघ्र ही अपने साथियों को भी आनंदित करता है।
- 06शिक्षा: जो मानव स्वबाहुबल के आश्रय से जीवन यापन करता है, वह लोक में कीर्ति और परलोक में शुभ गति प्राप्त करता है — यह पाठ में माता के वचनों से स्पष्ट होता है।
- 07कठिन शब्दार्थ: दीर्घदर्शिनी = भविष्य का चिन्तन करने वाली; राशिवर्धनमात्रम् = मात्र संख्या बढ़ाने वाले; वाक्यसायकैः = वाणी के बाणों से।
Frequently asked questions
01मानो हि महतां धनम् पाठ किस ग्रंथ से लिया गया है?
यह पाठ महर्षि वेदव्यास रचित महाभारत के उद्योग पर्व के 131 और 134 अध्यायों से संकलित है।
02Mano Hi Mahatam Dhanam path ke lekhak kaun hain?
इस पाठ के श्लोक महर्षि वेदव्यास की रचना महाभारत से लिए गए हैं।
03विदुरा कौन थीं और उनका परिचय क्या है?
विदुरा एक वीर और धर्मपरायण माता थीं — वे क्षात्र-धर्म में निरत, दूरदर्शिनी (दीर्घदर्शिनी), राजसभाओं में प्रसिद्ध (विश्रुता) और विदुषी (बहुश्रुता) थीं।
04विदुरा ने अपने पुत्र को क्या उपदेश दिया?
विदुरा ने अपने सिन्धुराज से पराजित पुत्र को उठकर शत्रु से लड़ने, अपना स्वाभिमान (मान) पुनः प्राप्त करने और अपने डूबे हुए कुल का उत्थान करने का उपदेश दिया।
05विदुरा का पुत्र किससे पराजित हुआ था?
विदुरा का पुत्र सिन्धुराज से युद्ध में पराजित हुआ था और वह हतोत्साहित एवं दीनचेता होकर लेटा हुआ था।
06मानो हि महतां धनम् शीर्षक का क्या अर्थ है?
इस शीर्षक का अर्थ है — 'मान ही महान पुरुषों का धन है।' पाठ का मूल संदेश यही है कि स्वाभिमान सबसे बड़ा धन होता है।
07Mano Hi Mahatam Dhanam path ka saransh kya hai?
विदुरा अपने पराजित पुत्र को भर्त्सना करते हुए उठने और स्वाभिमान पुनः प्राप्त करने को कहती हैं। पाठ में आत्मबल, कुल-उत्थान, स्वबाहुबल से जीवन यापन और परोपकार की महिमा का वर्णन है।
08स्वबाहुबल से जीवन यापन करने पर क्या फल मिलता है?
पाठ के अनुसार जो मानव अपने स्वबाहुबल के आश्रय से जीवन यापन करता है, वह लोक में कीर्ति प्राप्त करता है और परलोक में शुभ गति (परत्र च शुभां गतिम्) पाता है।
09पाठ में कुन्ती की क्या भूमिका है?
कुन्ती इस पाठ में विदुरा के पुरातन इतिहास को प्रस्तुत करती हैं। पाठ की शुरुआत में 'कुन्ती उवाच' से स्पष्ट होता है कि वे इस प्रसंग को सुना रही हैं।
10क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
11वाक्यसायकैः शब्द का अर्थ क्या है?
पाठ की शब्दार्थ सूची के अनुसार 'वाक्यसायकैः' का अर्थ है — 'वाणी के बाणों से।' पाठ के अंत में बताया गया है कि पुत्र अच्छे घोड़े (सदश्व) की तरह माँ की वाणी-रूपी बाणों से प्रेरित होकर सब कुछ यथावत् कर दिया।
12दीर्घदर्शिनी और राशिवर्धनमात्रम् शब्दों के अर्थ बताइए।
पाठ की शब्दार्थ सूची के अनुसार: दीर्घदर्शिनी = भविष्य का चिन्तन करने वाली; राशिवर्धनमात्रम् = मात्र संख्या बढ़ाने वाले (जो केवल जनसंख्या बढ़ाए, वह न स्त्री है न पुरुष)।
13Class 11 Sanskrit Shashwati Chapter 3 ka vishay kya hai?
इस अध्याय का विषय है — स्वाभिमान, क्षात्र-धर्म, आत्मबल और कुल-उत्थान। विदुरा द्वारा पराजित पुत्र को दिए गए उपदेश के माध्यम से यह संदेश दिया गया है कि मान (स्वाभिमान) महान पुरुषों का सर्वोच्च धन है।
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