Summary
'Ram-Lakshman-Parshuram Samvad' Class 9 Hindi (Ganga) ka kavyansh hai jo Goswami Tulsidas rachit Ramcharitmanas ke Balkand se liya gaya hai — इसमें सीता-स्वयंवर में शिव-धनुष भंग होने पर क्रोधित परशुराम के सभा में आगमन, उनके रौद्र रूप और राम की विनम्रता तथा लक्ष्मण के व्यंग्यपूर्ण संवाद का वर्णन है।
सीता-स्वयंवर में श्रीराम द्वारा शिव-धनुष भंग होने की सूचना पाकर परशुराम क्रोधित होकर सभा में आते हैं। टूटे धनुष को देखकर वे जनक से कठोर वचनों में पूछते हैं कि धनुष किसने तोड़ा। सभी राजा भय से काँप उठते हैं। राम शांत भाव से विनम्रतापूर्वक कहते हैं कि धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। लक्ष्मण व्यंग्यपूर्वक परशुराम का उपहास करते हैं। परशुराम लक्ष्मण को चेतावनी देते हैं। अंततः राम की विनम्रता और विश्वामित्र के समझाने पर परशुराम का क्रोध शांत होता है।
Key points & formulas
- 01कवि/रचयिता: गोस्वामी तुलसीदास (जन्म उत्तर प्रदेश, जीवनकाल 1532–1623); यह काव्यांश उनके महाकाव्य रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है और अवधी भाषा में चौपाई-दोहा शैली में रचित है।
- 02विधा: भक्ति-काव्य — चौपाई-दोहा शैली में संवाद-प्रस्तुति का उत्कृष्ट उदाहरण, जिसमें संवादों के माध्यम से ही कथा का विकास और पात्रों का चरित्र-निर्माण होता है।
- 03केंद्रीय भाव: राम की विनम्रता, मर्यादा और धीर-गंभीर संयम एक ओर; लक्ष्मण का व्यंग्यशील साहस दूसरी ओर — दोनों एक ही संकट-परिस्थिति के प्रति दो भिन्न स्वभावों के प्रतीक हैं।
- 04मुख्य पात्र: परशुराम (रौद्र-क्रोधी), राम (शांत-विनम्र, हृदय में न हर्ष न विषाद), लक्ष्मण (व्यंग्यशील), जनक (भयभीत-मौन), सीता (आशंकित, प्रतीक्षारत), विश्वामित्र (सभा में उपस्थित)।
- 05प्रमुख काव्य-सौंदर्य/अलंकार: अनुप्रास — "अरि करनी करि करिअ लराई"; बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना — "अरध निमेष कलप सम बीता"; रूपक — "पद सरोज मेले दोउ भाई"।
- 06कठिन शब्दार्थ: रिस = रोष/क्रोध; त्रास = भय/डर; अरध निमेष = आधा क्षण; कलप = ब्रह्मा का एक दिन (अत्यंत लंबा काल); परसु = फरसा (हथियार); भृगुपति = भृगुकुल के स्वामी (परशुराम का नाम)।
- 07नाटकीयता: कविता में संवादों के माध्यम से नाटकीय तनाव उत्पन्न होता है — परशुराम का आक्रोश, राम की शांत विनम्रता और लक्ष्मण के व्यंग्य से भावों में विविधता आती है।
Frequently asked questions
01Ram-Lakshman-Parshuram Samvad का सारांश क्या है?
सीता-स्वयंवर में शिव-धनुष भंग होने पर परशुराम क्रोधित होकर सभा में आते हैं। सभी राजा भय से काँपते हैं और अपना परिचय देते हैं। परशुराम जनक से कठोरता से पूछते हैं कि धनुष किसने तोड़ा। राम विनम्रतापूर्वक कहते हैं — धनुष तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा। लक्ष्मण व्यंग्यपूर्वक उत्तर देते हैं। परशुराम लक्ष्मण को चेतावनी देते हैं। अंत में राम की विनम्रता और विश्वामित्र के समझाने से परशुराम का क्रोध शांत होता है।
02Ram-Lakshman-Parshuram Samvad के कवि/रचयिता कौन हैं?
इस काव्यांश के रचयिता गोस्वामी तुलसीदास हैं। उनका जन्म उत्तर प्रदेश में हुआ था और उनका जीवनकाल 1532–1623 माना गया है। यह अंश उनके महाकाव्य रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है।
03Ram-Lakshman-Parshuram Samvad किस महाकाव्य और किस कांड से लिया गया है?
यह काव्यांश गोस्वामी तुलसीदास रचित महाकाव्य रामचरितमानस के बालकांड से लिया गया है। रामचरितमानस अवधी भाषा में लिखा गया तुलसीदास का सर्वप्रसिद्ध ग्रंथ है।
04Ram-Lakshman-Parshuram Samvad का केंद्रीय भाव क्या है?
इस कविता का केंद्रीय भाव है — एक ही संकट-परिस्थिति के प्रति दो भिन्न स्वभावों का चित्रण। राम विनम्रता और मर्यादा के साथ शांत रहते हैं जबकि लक्ष्मण व्यंग्य और साहस से उत्तर देते हैं। साथ ही परशुराम का रौद्र रूप और उनके क्रोध का वर्णन इस कविता की नाटकीयता को बढ़ाता है।
05परशुराम किस कारण क्रोधित हुए और सभा में क्यों आए?
सीता-स्वयंवर में श्रीराम द्वारा शिव-धनुष भंग होने की सूचना पाकर परशुराम क्रोधित हुए। वे शिव-धनुष को अत्यंत पूजनीय और सम्मानित मानते थे। धनुष खंडित देखकर उन्होंने सभा में उपस्थित सभी राजाओं पर क्रोध किया और जनक से कठोर वचनों में पूछताछ की।
06राम ने परशुराम के समक्ष क्या कहा?
राम ने परशुराम के समक्ष विनम्रतापूर्वक कहा — "हे नाथ! शिव-धनुष को तोड़ने वाला आपका ही कोई दास होगा, आपकी क्या आज्ञा है, मुझसे क्यों नहीं कहते?" राम का यह कथन उनकी विनम्रता, मर्यादा और धीर-गंभीर स्वभाव का प्रतीक है। उनके हृदय में न हर्ष था, न विषाद।
07लक्ष्मण ने परशुराम को क्या व्यंग्यपूर्ण उत्तर दिया?
लक्ष्मण ने मुस्कुराते हुए परशुराम का उपहास करते हुए कहा — "हमने बचपन में ऐसी बहुत-सी धनुहियाँ तोड़ी हैं, तब आपने कभी ऐसा क्रोध नहीं किया। इसी धनुष पर इतनी ममता क्यों?" इस व्यंग्य पर परशुराम और अधिक क्रोधित हो गए।
08"अरध निमेष कलप सम बीता" पंक्ति का अर्थ और संदर्भ क्या है?
यह पंक्ति सीता के संदर्भ में है। परशुराम के क्रोधी स्वभाव का समाचार सुनकर सीता को आधा पल (आधा निमेष) भी एक कल्प (ब्रह्मा का एक दिन — अरबों वर्ष के समान) जितना लंबा और कठिन प्रतीत हुआ। यह बात को बहुत बढ़ा-चढ़ाकर कहने का सुंदर उदाहरण है।
09भृगुपति, परसुधर और भृगुकुलकेतू — ये किसके नाम हैं?
ये तीनों परशुराम के विभिन्न नाम हैं जो कविता में प्रयुक्त हुए हैं। भृगुपति = भृगुकुल के स्वामी; परसुधर = परशु (फरसा) धारण करने वाले; भृगुकुलकेतू = भृगुकुल के दीपक। तुलसीदास ने विभिन्न नामों से परशुराम को संबोधित किया है।
10इस कविता में कौन-कौन से अलंकार हैं?
इस कविता में तीन प्रमुख अलंकार हैं — (1) अनुप्रास अलंकार: "अरि करनी करि करिअ लराई" (एक ही वर्ण की बार-बार आवृत्ति); (2) बात को बढ़ा-चढ़ाकर कहना: "अरध निमेष कलप सम बीता" (आधे पल को कल्प के समान लंबा बताया गया); (3) रूपक अलंकार: "पद सरोज मेले दोउ भाई" (चरणों पर कमल का आरोपण)।
11इस कविता की भाषा और शैली क्या है?
यह कविता अवधी भाषा में लिखी गई है जो हिंदी का एक स्वरूप है और उत्तर प्रदेश के अनेक स्थानों पर बोली जाती है। शैली की दृष्टि से यह चौपाई-दोहा क्रम में है — संवादों के माध्यम से कथा-विकास होता है। तुलसीदास का अवधी और ब्रज दोनों भाषाओं पर अधिकार था।
12Ram-Lakshman-Parshuram Samvad summary in hindi
Tulsidas rachit Ramcharitmanas ke Balkand ka yah prasang Sita-swayamvar ka hai. Shiva-dhanush tutne par Parshurama krodh mein sabha mein aate hain. Sabhi raja bhay se tharthara uthte hain. Ram vinamrata se kehte hain ki dhanush todne vala aapka hi koi das hoga. Lakshman vyang se Parshurama ka uphaas karte hain. Parshurama Lakshman ko cheta watni dete hain. Ant mein Ram ki vinamrata aur Vishwamitra ke samjhane par Parshurama ka krodh shant hota hai.
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