Summary
'Kya Likhun' Class 9 Hindi (Ganga) ka nibandh hai — इसमें पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी ने निबंध-रचना की प्रक्रिया और उसकी कठिनाइयों को रोचक आत्मपरक शैली में, दो विषयों को एक साथ समेटकर, प्रस्तुत किया है।
लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी को नमिता और अमिता के लिए 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' विषयों पर आदर्श निबंध लिखने हैं। वे पहले निबंध-शास्त्र के आचार्यों की सम्मति जानते हैं — सामग्री व शैली, रूपरेखा, छोटे वाक्य। फिर मानटेन की अनुभव-आधारित स्वच्छंद पद्धति अपनाने का निर्णय करते हैं। अमीर खुसरो की प्रतिभा से प्रेरणा लेकर वे दोनों विषयों को एक निबंध में समेट देते हैं: ढोल की कर्कशता दूर नहीं पहुँचती इसलिए वह मधुर लगती है — इसी तरह तरुण भविष्य को और वृद्ध अतीत को सुखद मानते हैं, और इसी असंतोष से समाज में सुधारों का क्रम निरंतर चलता रहता है।
Key points & formulas
- 01विधा: निबंध; लेखक: पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी (जन्म 1894, खैरागढ़, छत्तीसगढ़); निबंध लेखन के लिए हिंदी साहित्य में विशेष रूप से स्मरणीय
- 02केंद्रीय भाव: निबंध-रचना की प्रक्रिया और उसकी कठिनाइयाँ; लेखक आत्मपरक शैली में पाठकों से सीधा संवाद करते हैं
- 03ए.जी. गार्डिनर के अनुसार लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है; लेखक स्वीकार करते हैं कि उन्हें परिश्रम करना पड़ता है और वह स्थिति उन्हें प्राप्त नहीं होती
- 04मानटेन की पद्धति: स्वयं देखे, सुने और अनुभव किए को लिपिबद्ध करना — इसमें लेखक की सच्ची अनुभूति और स्वच्छंद अभिव्यक्ति होती है
- 05अमीर खुसरो की प्रतिभा से प्रेरणा: एक ही पद्य में चार स्त्रियों की इच्छा पूरी — इसी तरह लेखक ने 'दूर के ढोल' और 'समाज-सुधार' दोनों विषयों को एक निबंध में समेटा
- 06तरुण भविष्य को और वृद्ध अतीत को सुखद मानते हैं क्योंकि दोनों वर्तमान से दूर हैं; इसी से समाज में सुधारों का अंतहीन क्रम चलता रहता है
- 07कठिन शब्दार्थ — स्फूर्ति: उत्तेजना, मन में प्रकट होना; दुर्बोधता: जो शीघ्र समझ में न आए; विज्ञ: जानकार, विद्वान; विषाद: अवसाद, उदासी; कोलाहल: बहुत से लोगों के एक साथ बोलने से होने वाला शोर
Frequently asked questions
01Kya Likhun का सारांश क्या है?
लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी को नमिता और अमिता के लिए 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' पर आदर्श निबंध लिखने हैं। वे निबंध-शास्त्र के आचार्यों की राय जानते हैं, मानटेन की स्वच्छंद पद्धति को अपनाते हैं और अमीर खुसरो से प्रेरणा लेकर दोनों विषयों को एक ही निबंध में समेट देते हैं। ढोल की कर्कशता दूर नहीं पहुँचती इसलिए वह मधुर लगती है — ठीक इसी तरह तरुण भविष्य को और वृद्ध अतीत को सुखद मानते हैं, और इसीलिए समाज में सुधारों का क्रम निरंतर चलता रहता है।
02Kya Likhun के लेखक कौन हैं?
इस निबंध के लेखक पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी हैं। उनका जन्म सन् 1894 में खैरागढ़, राजनंदगाँव, छत्तीसगढ़ में हुआ था। हिंदी साहित्य में वे कुशल आलोचक, कवि, निबंधकार और हास्य-व्यंग्यकार के रूप में प्रसिद्ध हैं। उन्होंने सरस्वती और छाया पत्रिकाओं का संपादन भी किया। सन् 1971 में उनका निधन हुआ।
03Kya Likhun का केंद्रीय भाव क्या है?
इस निबंध का केंद्रीय भाव निबंध-रचना की प्रक्रिया और उसकी कठिनाइयाँ हैं। लेखक आत्मपरक शैली में बताते हैं कि आदर्श निबंध लिखने के लिए सामग्री और शैली दोनों आवश्यक हैं। साथ ही 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' विषयों को जोड़कर यह भाव व्यक्त किया गया है कि दूर की वस्तु सुंदर लगती है और इसीलिए समाज में परिवर्तन व सुधार का सिलसिला कभी नहीं रुकता।
04Kya Likhun में नमिता और अमिता कौन हैं और उन्होंने क्या माँग की?
नमिता और अमिता उन दो व्यक्तियों के नाम हैं जिनके लिए लेखक को आदर्श निबंध लिखना था। नमिता का आदेश था कि 'दूर के ढोल सुहावने होते हैं' विषय पर निबंध लिखा जाए और अमिता का आग्रह था कि 'समाज-सुधार' पर निबंध लिखा जाए। दोनों विषय परीक्षा में आ चुके थे।
05ए.जी. गार्डिनर का निबंध लेखन के बारे में क्या मत है?
अंग्रेजी के प्रसिद्ध निबंध लेखक ए.जी. गार्डिनर का कथन है कि लिखने की एक विशेष मानसिक स्थिति होती है — उस समय मन में उमंग, हृदय में स्फूर्ति और मस्तिष्क में आवेग उत्पन्न होता है। उस स्थिति में विषय की चिंता नहीं रहती; असली वस्तु मन के भाव हैं, विषय नहीं। उन्होंने यह भी लिखा कि शीर्षक देना उनके लिए सबसे कठिन कार्य होता था।
06मानटेन की निबंध-पद्धति क्या है?
मानटेन को अंग्रेजी निबंध की इस पद्धति का जन्मदाता माना जाता है जिसमें लेखक स्वयं जो कुछ देखता है, सुनता है और अनुभव करता है, उसी को अपने निबंधों में लिपिबद्ध कर देता है। इन निबंधों में लेखक की सच्ची अनुभूति और उल्लास रहता है। ये मन की स्वच्छंद रचनाएँ होती हैं — इनमें न उदात्त कल्पना रहती है, न गंभीर तर्कपूर्ण विवेचना।
07अमीर खुसरो की कहानी का निबंध में क्या महत्त्व है?
लेखक को दो विषयों पर अलग-अलग निबंध लिखने की कठिनाई थी। तब उन्हें अमीर खुसरो की वह कहानी याद आई जिसमें चार स्त्रियाँ पानी भर रही थीं और उन्होंने अलग-अलग विषयों पर कविता सुनने की इच्छा जताई — खीर, चरखा, कुत्ता और ढोल। खुसरो ने एक ही दोहे में चारों की इच्छा पूरी कर दी। इससे प्रेरित होकर लेखक ने भी दोनों विषयों को एक ही निबंध में समेट लिया।
08तरुण और वृद्ध की तुलना क्यों की गई है?
लेखक ने बताया कि 'दूर के ढोल सुहावने' लोकोक्ति जीवन के सभी पहलुओं पर लागू होती है। तरुण जीवन-संग्राम से दूर हैं इसलिए भविष्य उन्हें उज्ज्वल लगता है; वृद्ध अपनी युवावस्था से दूर हो गए हैं इसलिए अतीत उन्हें सुखद लगता है। दोनों वर्तमान से असंतुष्ट रहते हैं — तरुण क्रांति के समर्थक होते हैं और वृद्ध अतीत-गौरव के संरक्षक। इसी असंतोष से समाज में सुधारों का क्रम जारी रहता है।
09Kya Likhun में किन-किन समाज-सुधारकों का उल्लेख है?
निबंध में भारत के महान समाज-सुधारकों का उल्लेख है — बुद्धदेव, महावीर स्वामी, नागार्जुन, शंकराचार्य, कबीर, नानक, राजा राममोहन राय, स्वामी दयानंद और महात्मा गांधी। लेखक ने कहा कि सुधारकों का दल नगर-नगर और गाँव-गाँव में होता है तथा सुधारों का अंत कभी नहीं होता।
10निबंध के दो प्रधान अंग कौन-से बताए गए हैं?
निबंध-शास्त्र के आचार्यों के अनुसार निबंध के दो प्रधान अंग हैं — सामग्री और शैली। सामग्री के लिए विचार-समूह संचित करना और मनन करना आवश्यक है, जबकि शैली के लिए भाषा में प्रवाह और छोटे-छोटे परस्पर संबद्ध वाक्य होने चाहिए।
11Kya Likhun summary in hindi
पदुमलाल पुन्नालाल बख्शी के निबंध 'क्या लिखूँ?' में लेखक को नमिता और अमिता के लिए दो विषयों पर निबंध लिखने हैं। वे निबंध-शास्त्र के विद्वानों की राय जानते हैं, मानटेन की स्वच्छंद पद्धति अपनाते हैं और अमीर खुसरो की प्रतिभा से प्रेरणा लेकर 'दूर के ढोल सुहावने' और 'समाज-सुधार' दोनों विषयों को एक निबंध में समेट देते हैं। निबंध की रोचक आत्मपरक शैली इसे विशेष बनाती है।
12Kya Likhun ka kendriya bhav kya hai
निबंध का केंद्रीय भाव निबंध-रचना की प्रक्रिया की व्यावहारिक कठिनाइयाँ हैं। लेखक ने आत्मपरक शैली में बताया है कि आदर्श निबंध लिखना कठिन होता है क्योंकि इसके लिए सामग्री, रूपरेखा और उचित शैली की आवश्यकता होती है। साथ ही यह भाव भी व्यक्त किया गया है कि दूर की वस्तु सुंदर लगती है — इसीलिए समाज में सुधार का अंतहीन क्रम चलता रहता है।
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