Class 9 Hindi

Chapter 10 — Bharati, Jai, Vijayakare

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Overview

Summary

'Bharati Jai Vijayakare' Class 9 Hindi (Ganga) ki kavita hai, jiske kavi Suryakant Tripathi 'Nirala' hain — इसमें कवि भारत को एक दिव्य देवी के रूप में संबोधित करते हुए उसकी प्राकृतिक सुंदरता, कृषि-समृद्धि और आध्यात्मिक विरासत का ओजस्वी गान करते हैं।

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की यह देशप्रेम-कविता भारत को एक चेतन देवी के रूप में चित्रित करती है। कवि भारत को 'कनक-शस्य-कमलधरे' कहकर उसकी कृषि-समृद्धि का बोध कराता है। गरजती लहरों वाला सागर भारतमाता के पवित्र चरणों को धोता है। वृक्ष, तृण, वन और लताएँ उसके वस्त्र हैं; गंगा की ज्योतिर्मय धवल धारा उसके गले का हार है; हिम-आवृत हिमालय उसका मुकुट है। 'प्राण प्रणव ओंकार' में उसकी आत्मा समाई है और 'शतमुख-शतरव-मुखरे' में उसकी अनेक सांस्कृतिक ध्वनियाँ उदार दिशाओं में गूँजती हैं।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवि: सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' — जन्म 1899, महिषादल (बंगाल); मूल निवास गढ़ाकोला, उन्नाव (उत्तर प्रदेश); निधन 1961
  2. 02विधा: देशप्रेम से ओत-प्रोत कविता; छायावाद के प्रमुख कवि, जिन्होंने सर्वप्रथम मुक्त छंद का प्रयोग किया
  3. 03केंद्रीय भाव: भारत को एक दिव्य चेतन देवी के रूप में प्रस्तुत कर उसकी प्राकृतिक, कृषि और आध्यात्मिक महिमा का ओजस्वी गान
  4. 04रूपक अलंकार: 'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार' — हिमालय को भारत का मुकुट बताकर उपमेय में उपमान का अभेद स्थापित किया गया है
  5. 05अनुप्रास अलंकार: 'शतमुख-शतरव-मुखरे!' — 'श' वर्ण की पुनरावृत्ति से संगीतात्मकता उत्पन्न होती है
  6. 06कठिन शब्दार्थ: भारति = सरस्वती / भारतमाता; शस्य = फसल, अन्न; शुचि = पवित्र, निर्मल; धवल = सफेद, स्वच्छ; प्रणव = ओंकार
  7. 07भाषा-शैली: संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त — 'कनक-शस्य', 'गर्जितोर्मि', 'ज्योतिर्जल', 'शतमुख-शतरव' जैसे सामासिक पद
Questions

Frequently asked questions

01

Bharati Jai Vijayakare का सारांश क्या है?

निराला की इस कविता में भारत को एक दिव्य देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। सागर की गरजती लहरें उसके पवित्र चरण धोती हैं, वृक्ष-लताएँ उसके वस्त्र हैं, गंगा की धवल धारा उसके गले का हार है और हिमालय उसका मुकुट है। 'प्राण प्रणव ओंकार' में उसकी आत्मा और 'शतमुख-शतरव-मुखरे' में उसकी सांस्कृतिक विविधता का उद्घोष है।

02

Bharati Jai Vijayakare के कवि कौन हैं?

इस कविता के कवि सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' हैं। उनका जन्म 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ और निधन 1961 में हुआ।

03

Bharati Jai Vijayakare का केंद्रीय भाव क्या है?

कविता का केंद्रीय भाव भारत की प्राकृतिक सुंदरता, कृषि-समृद्धि और आध्यात्मिक विरासत का ओजस्वी गान है। कवि भारत को एक चेतन देवी के रूप में देखता है जिसकी दिशाओं में ओंकार की गूँज है।

04

'कनक-शस्य-कमलधरे' का अर्थ क्या है?

'कनक-शस्य' का अर्थ है सोने (कनक) जैसी फसलें (शस्य) और 'कमलधरे' का अर्थ है कमल को धारण करने वाली। यह पंक्ति भारत की धन-धान्य संपन्नता और कृषि-परंपरा के सौंदर्य को दर्शाती है।

05

'मुकुट शुभ्र हिम-तुषार' में कौन-सा अलंकार है?

इस पंक्ति में रूपक अलंकार है। हिमालय को भारत का मुकुट कहा गया है — गुण की अत्यंत समानता के कारण उपमेय (हिमालय) में उपमान (मुकुट) का अभेद स्थापित किया गया है, जिससे भारत की छवि भव्य और दिव्य बनती है।

06

'शतमुख-शतरव-मुखरे!' में कौन-सा अलंकार है?

'शतमुख' और 'शतरव' में 'श' वर्ण की पुनरावृत्ति होने के कारण यहाँ अनुप्रास अलंकार है।

07

निराला का जन्म कब और कहाँ हुआ?

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' का जन्म सन् 1899 में बंगाल के महिषादल में हुआ। वे मूलतः गढ़ाकोला (उन्नाव), उत्तर प्रदेश के निवासी थे।

08

कविता में भारत के प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन कैसे किया गया है?

कवि ने प्रकृति के तत्वों को भारतमाता के आभूषण बनाया है — वृक्ष, तृण, वन और लताएँ उसके वस्त्र हैं; गंगा की ज्योतिर्मय धवल धारा उसके गले का हार है; हिमालय का हिम-तुषार उसका मुकुट है; और सागर की गरजती लहरें उसके पवित्र चरण धोती हैं।

09

'शस्य' शब्द का अर्थ क्या है?

'शस्य' का अर्थ है फसल, खेती, अन्न, धान्य, वृक्षों का फल, नई घास या कोमल तृण।

10

निराला की प्रमुख काव्य रचनाएँ कौन-सी हैं?

निराला की प्रमुख काव्य रचनाएँ हैं — अनामिका, परिमल, गीतिका, कुकुरमुत्ता और नए पत्ते। उन्होंने उपन्यास, कहानी, आलोचना और निबंध भी लिखे। उनका संपूर्ण साहित्य 'निराला रचनावली' के आठ खंडों में प्रकाशित है।

11

Bharati Jai Vijayakare summary in hindi

सूर्यकांत त्रिपाठी 'निराला' की इस देशभक्ति कविता में भारत को एक दिव्य देवी के रूप में प्रस्तुत किया गया है। कवि भारत की कृषि-समृद्धि (कनक-शस्य), प्राकृतिक सुंदरता (गंगा-धारा हार, हिमालय मुकुट, वन-लता वस्त्र) और आध्यात्मिक शक्ति (ओंकार) का ओजस्वी वर्णन करते हैं। सागर उसके पवित्र चरण धोता है और उसकी दिशाएँ उदार ध्वनियों से मुखर हैं।

12

कविता की भाषा-शैली कैसी है?

कविता की भाषा संस्कृतनिष्ठ और समासयुक्त है। 'कनक-शस्य', 'गर्जितोर्मि', 'ज्योतिर्जल', 'शतमुख-शतरव' जैसे सामासिक पद तथा प्रकृति का मानवीकरण इस कविता की प्रमुख भाषिक विशेषताएँ हैं।

13

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