Class 8 Hindi

Chapter 10 — तरुण के स्वप्न

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Overview

Summary

'Tarun ke Swapn' Class 8 Hindi (Malhar) ka bhashan-ansh hai, jise Netaji Subhash Chandra Bose ne 29 December 1929 ko Medinipur District Youth Conference mein diya tha — इसमें वे तरुण पीढ़ी को एक सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज और राष्ट्र के निर्माण का स्वप्न उपहारस्वरूप सौंपते हैं।

यह पाठ नेताजी सुभाषचंद्र बोस के उस भाषण का अंश है जो उन्होंने 29 दिसंबर 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में दिया था। वे देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न को अपनी प्रेरणा का उत्स (स्रोत) बताते हैं और उसी स्वप्न के उत्तराधिकारी के रूप में एक आदर्श समाज की कल्पना करते हैं — जिसमें जातिभेद न हो, नारी को पुरुषों के समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा व उन्नति का समान अवसर प्राप्त हो। इस स्वप्न को वे तरुणों को उपहारस्वरूप देते हैं।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01वक्ता/लेखक: सुभाषचंद्र बोस (नेताजी), भाषण दिया: मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन, 29 दिसंबर 1929
  2. 02विधा: भाषण-अंश (oration excerpt)
  3. 03केंद्रीय भाव: एक सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज और उस पर एक स्वाधीन राष्ट्र बनाने का आह्वान
  4. 04प्रेरणास्रोत: देशबंधु चित्तरंजन दास का स्वप्न — नेताजी स्वयं को उसी स्वप्न का उत्तराधिकारी मानते हैं
  5. 05आदर्श समाज में जातिभेद नहीं, नारी को समान अधिकार, आर्थिक समानता, श्रम की मर्यादा और शिक्षा के समान अवसर
  6. 06शब्दार्थ — उत्स: स्रोत, उद्गम; निर्झर: झरना, प्रपात
  7. 07शब्दार्थ — अकर्मण्य: आलसी, कर्महीन; विषमता: असमानता; उत्तराधिकारी: वारिस, विरासत संभालने वाला
Questions

Frequently asked questions

01

तरुण के स्वप्न का सारांश क्या है?

यह पाठ नेताजी सुभाषचंद्र बोस के भाषण का अंश है जो उन्होंने 29 दिसंबर 1929 को मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में दिया था। वे तरुणों को एक ऐसे समाज का स्वप्न देते हैं जिसमें जातिभेद न हो, नारी को समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा व उन्नति का समान अवसर मिले।

02

तरुण के स्वप्न के लेखक/वक्ता कौन हैं?

इस पाठ के लेखक और वक्ता नेताजी सुभाषचंद्र बोस हैं। यह उनके भाषण का अंश है जो उन्होंने मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में 29 दिसंबर 1929 को दिया था।

03

तरुण के स्वप्न का केंद्रीय भाव क्या है?

इस पाठ का केंद्रीय भाव है — एक सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज और स्वाधीन राष्ट्र का निर्माण, जिसमें प्रत्येक व्यक्ति को समान अधिकार और अवसर प्राप्त हों। नेताजी यह स्वप्न तरुण पीढ़ी को उपहारस्वरूप सौंपते हैं।

04

नेताजी के आदर्श समाज की क्या विशेषताएँ हैं?

नेताजी के अनुसार आदर्श समाज में: (1) व्यक्ति सब दृष्टियों से मुक्त हो, (2) जातिभेद का स्थान न हो, (3) नारी को पुरुषों के समान अधिकार मिले, (4) आर्थिक विषमता न हो, (5) प्रत्येक को शिक्षा और उन्नति का समान अवसर मिले, और (6) श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा हो।

05

तरुण के स्वप्न में चित्तरंजन दास का उल्लेख क्यों है?

नेताजी ने देशबंधु चित्तरंजन दास को अपने स्वप्न का प्रेरणास्रोत बताया है। उन्होंने कहा कि चित्तरंजन दास का स्वप्न ही उनकी शक्ति का उत्स (स्रोत) और उनके आनंद का निर्झर (झरना) था। नेताजी स्वयं को उसी स्वप्न का उत्तराधिकारी मानते हैं।

06

'उत्स' और 'निर्झर' शब्दों के क्या अर्थ हैं?

उत्स = स्रोत, उद्गम। निर्झर = झरना, प्रपात। नेताजी ने चित्तरंजन दास के स्वप्न को 'शक्ति का उत्स' और 'आनंद का निर्झर' कहा है, अर्थात् वह स्वप्न उनकी शक्ति का स्रोत और आनंद की अविरल धारा था।

07

'अकर्मण्य' शब्द का क्या अर्थ है और इसका पाठ में क्या संदर्भ है?

अकर्मण्य का अर्थ है — आलसी, कर्महीन, निकम्मा। नेताजी ने कहा कि उनके आदर्श समाज में आलसी और अकर्मण्य के लिए कोई स्थान नहीं होगा, क्योंकि उस राष्ट्र में श्रम और कर्म की पूरी मर्यादा होगी।

08

'उत्तराधिकारी' से क्या अभिप्राय है?

उत्तराधिकारी का अर्थ है — किसी के बाद उसकी विरासत को संभालने वाला, वारिस। नेताजी ने देश के युवाओं को चित्तरंजन दास के स्वप्न का उत्तराधिकारी बताया — अर्थात् उस स्वप्न को साकार करने का दायित्व तरुणों का है।

09

यह भाषण कहाँ और कब दिया गया था?

नेताजी सुभाषचंद्र बोस ने यह भाषण मेदिनीपुर जिला युवक-सम्मेलन में 29 दिसंबर 1929 को दिया था।

10

नेताजी ने तरुणों को क्या उपहार दिया?

नेताजी ने कहा — 'हे मेरे तरुण भाइयो! तुम्हें देने लायक मेरे पास कुछ भी नहीं है, है सिर्फ यही स्वप्न जो हमें असीम शक्ति और अपार आनंद देता है।' उन्होंने यही स्वप्न — एक सर्वांगीण स्वाधीन संपन्न समाज का स्वप्न — तरुणों को उपहारस्वरूप दिया।

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Tarun ke Swapn summary in hindi

Tarun ke Swapn, Netaji Subhash Chandra Bose ka bhashan-ansh hai jo unhone 29 December 1929 ko Medinipur District Youth Conference mein diya tha। इसमें वे देशबंधु चित्तरंजन दास के स्वप्न की विरासत लेते हुए तरुणों को एक ऐसे समाज और राष्ट्र का स्वप्न सौंपते हैं जिसमें जातिभेद न हो, नारी को समान अधिकार मिले, आर्थिक विषमता न हो और प्रत्येक व्यक्ति को शिक्षा व उन्नति का समान अवसर प्राप्त हो।

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