Summary
'Mat Baandho' Class 8 Hindi (Malhar) ki kavita hai, rachna hai Mahadevi Verma ki — इस कविता में कवयित्री सपनों की स्वतंत्रता का आग्रह करती हैं और कहती हैं कि सपनों के पंख मत काटो, उन्हें मुक्त गगन में उड़ने दो ताकि वे मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर धरती को स्वर्ग बनाने का शिल्प सिखा सकें।
महादेवी वर्मा द्वारा रचित 'मत बाँधो' कविता में सपनों की स्वतंत्रता का संदेश है। कवयित्री कहती हैं कि सपनों के पंख मत काटो, उनकी गति मत बाँधो। सौरभ, बीज, अग्नि और धूम के उदाहरणों के माध्यम से वे बताती हैं कि सपने इन सबसे विशेष हैं — उनमें आरोहण (ऊपर जाने) और अवरोहण (नीचे आने) दोनों की शक्ति है। मुक्त गगन में विचरण कर सपने तारों में मिलते हैं और मेघों से रंग व किरणों से दीप्ति लेकर पुनः धरती पर आते हैं, जिससे भूमि को स्वर्ग बनाने का शिल्प प्राप्त होता है।
Key points & formulas
- 01कवयित्री: महादेवी वर्मा (1907–1987), फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश; भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित; नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत, दीपशिखा इनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं
- 02विधा: कविता
- 03केंद्रीय भाव: सपनों की स्वतंत्रता बनाए रखना ही उन्हें साकार करने की कुंजी है; सपनों को बाँधने से उनकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाती हैं
- 04सपनों में आरोहण (नीचे से ऊपर जाना) और अवरोहण (ऊपर से नीचे आना) — दोनों की विशेषता होती है; विचार के रूप में जन्म लेकर व्यवहार में पूरे होने पर ही सपना सच्चाई बनता है
- 05मुक्त গগन में विचरण कर सपने तारों में मिलते हैं और मेघों से रंग व किरणों से दीप्ति लेकर धरती पर स्वर्ग बनाने का शिल्प सिखाते हैं
- 06शब्दार्थ — आरोहण: नीचे से ऊपर की ओर जाना या चढ़ना; अवरोहण: ऊपर से नीचे की ओर आना या उतरना
- 07शब्दार्थ — सौरभ: सुगंध; दीप्ति: चमक, प्रकाश; शिल्प: कला, कौशल, दक्षता, निर्माण
Frequently asked questions
01मत बाँधो का सारांश क्या है?
महादेवी वर्मा की 'मत बाँधो' कविता में सपनों की स्वतंत्रता का संदेश है। कवयित्री कहती हैं कि सपनों के पंख मत काटो और उनकी गति मत बाँधो। सौरभ, बीज, अग्नि और धूम के उदाहरण देकर वे बताती हैं कि सपने इन सबसे भिन्न हैं — उनमें आरोहण और अवरोहण दोनों की शक्ति है। मुक्त গগन में विचरण कर सपने तारों में मिलते हैं और मेघों से रंग व किरणों से दीप्ति लेकर धरती पर आते हैं, जिससे भूमि को स्वर्ग बनाने का शिल्प मिलता है।
02मत बाँधो की कवयित्री कौन हैं?
इस कविता की कवयित्री महादेवी वर्मा हैं। उनका जन्म 1907 में फर्रुखाबाद, उत्तर प्रदेश में हुआ था और निधन 1987 में हुआ। उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित किया गया। नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत और दीपशिखा उनके प्रमुख काव्य-संग्रह हैं। वे एक चित्रकार भी थीं।
03मत बाँधो का केंद्रीय भाव क्या है?
कविता का केंद्रीय भाव है कि सपनों की स्वतंत्रता बनी रहनी चाहिए। जिस प्रकार किसी पक्षी के पंख काट दिए जाएँ तो वह उड़ नहीं सकता, उसी प्रकार सपनों को बाँधने से उनकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाती हैं। स्वतंत्र सपने ही धरती को स्वर्ग बनाने का शिल्प सिखाते हैं।
04Mat Baandho summary in hindi
महादेवी वर्मा की 'मत बाँधो' कविता सपनों की स्वतंत्रता का आग्रह करती है। कवयित्री कहती हैं — सपनों के पंख मत काटो, उनकी गति मत बाँधो। सपनों में आरोहण और अवरोहण दोनों की शक्ति है। मुक्त सपने मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर धरती पर स्वर्ग बनाने का शिल्प लाते हैं।
05आरोहण और अवरोहण का अर्थ क्या है?
कविता में 'आरोहण' का अर्थ है — नीचे से ऊपर की ओर जाना या चढ़ना। 'अवरोहण' का अर्थ है — ऊपर से नीचे की ओर आना या उतरना। ये दोनों एक-दूसरे के विपरीतार्थक शब्द हैं। कविता में कहा गया है कि सपनों के आरोहण को मत रोको और अवरोहण को मत बाँधो — अर्थात सपनों के उठने और व्यवहार में वापस आने दोनों में बाधा न डालो।
06'इन सपनों के पंख न काटो' पंक्ति का क्या अर्थ है?
इस पंक्ति में सपनों को पंख वाले के समान कल्पित किया गया है। जिस प्रकार पंख काट देने पर पक्षी उड़ नहीं सकता, उसी प्रकार यदि किसी के सपनों को बाधित किया जाए तो उसकी कल्पनाशीलता और संभावनाएँ समाप्त हो जाती हैं। कवयित्री का आशय है कि सपनों को सफलता की ऊँचाइयों तक जाने से मत रोको।
07कविता में सौरभ, बीज और अग्नि के उदाहरण किसलिए दिए गए हैं?
ये उदाहरण सपनों की विशेषता समझाने के लिए दिए गए हैं। सौरभ नभ में उड़ जाता है तो लौटता नहीं; बीज धूलि में गिर जाए तो नभ में उड़ नहीं पाता; अग्नि धरती पर जलती है और धूम গগन में मँडराता है। इन सबसे भिन्न, सपनों में दोनों ही गति होती है — वे ऊपर जा सकते हैं और पुनः आँखों में लौटकर व्यवहार में भी पूरे हो सकते हैं।
08महादेवी वर्मा की प्रमुख रचनाएँ कौन-सी हैं?
महादेवी वर्मा के प्रमुख काव्य-संग्रह हैं — नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्य गीत और दीपशिखा। गद्य में उन्होंने मेरा परिवार, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ और पथ के साथी की रचना की। बच्चों के लिए उन्होंने 'बारहमासा', 'आज खरीदेंगे हम ज्वाला', 'अब यह चिड़िया कहाँ रहेगी' जैसी कविताएँ लिखीं।
09'स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा' का अर्थ क्या है?
इन पंक्तियों का आशय है कि मुक्त और स्वतंत्र सपने (विचार) मेघों से रंग और किरणों से दीप्ति लेकर धरती पर लौटते हैं और भूमि को एक सुंदर, समृद्ध तथा शांतिपूर्ण संसार बनाने की कला सिखाते हैं। 'स्वर्ग' से तात्पर्य ऐसे स्थान से है जहाँ परस्पर सहयोग, सद्भाव और संवेदनशीलता हो।
10मत बाँधो कविता में 'शिल्प' शब्द का क्या अर्थ है?
कविता की पंक्ति 'स्वर्ग बनाने का फिर कोई शिल्प भूमि को सिखलायेगा' में 'शिल्प' शब्द का अर्थ है — कला, दक्षता, कौशल और निर्माण। पाठ में दिए शब्दकोश के अनुसार शिल्प के अर्थ हैं: हाथ से कोई चीज बनाने का काम (दस्तकारी/कारीगरी), कला संबंधी व्यवसाय, दक्षता, कौशल तथा निर्माण, सर्जन, रचना।
11मत बाँधो कविता में सपनों की कौन-सी विशेषता बताई गई है?
कविता में बताया गया है कि सपनों में आरोहण और अवरोहण — दोनों की विशेषता होती है। सपना विचार की तरह जन्म लेता है (आरोहण) और फिर व्यवहार में पूरा होता है (अवरोहण), तभी वह कल्पना से निकलकर सच्चाई बनता है। यह विशेषता सौरभ, बीज या धूम में नहीं है — इसीलिए सपने सबसे विशेष हैं।
12मत बाँधो पाठ किस कक्षा की किस पुस्तक में है?
'मत बाँधो' कविता कक्षा 8 की हिंदी पुस्तक 'मल्हार' का अध्याय 7 है। यह महादेवी वर्मा द्वारा रचित कविता है।
13क्या मत बाँधो अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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