Summary
'Kabir ke Dohe' Class 8 Hindi (Malhar) ka doha-sangrah hai — इसमें कबीर ने सत्य, गुरु-महिमा, मधुर वाणी, जीवन में संतुलन और अच्छी संगति जैसे जीवन-मूल्यों को सरल और प्रभावशाली दोहों में व्यक्त किया है।
यह पाठ 'कबीर वचनावली' (संपादक — अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध') से लिए गए कबीर के आठ प्रमुख दोहों का संकलन है। कबीर चौदहवीं शताब्दी में काशी में जन्मे और करघे पर कपड़ा बुनते हुए भी महान संत-कवि बने। इन दोहों में उन्होंने सत्य को सबसे बड़ी साधना और झूठ को सबसे बड़ा पाप बताया है। गुरु को ईश्वर से भी ऊपर स्थान दिया गया है। मधुर वाणी, आलोचकों को पास रखने, हर बात में संतुलन, सूप की तरह विवेकशील बनने और अच्छी संगति करने की शिक्षा दी गई है।
Key points & formulas
- 01कवि: कबीर — चौदहवीं शताब्दी में काशी में जन्मे संत-कवि; करघे पर कपड़ा बुनते थे; रचनाएँ मुख्यतः कबीर ग्रंथावली में संगृहीत
- 02स्रोत: कबीर वचनावली, संपादक — अयोध्यासिंह उपाध्याय 'हरिऔध'
- 03विधा: दोहा
- 04केंद्रीय भाव: सत्य, गुरु-महिमा, मधुर वाणी, जीवन में संतुलन और सत्संगति का महत्त्व
- 05शब्दार्थ: साँच = सत्य; पंथी = राही/यात्री; निंदक = आलोचक
- 06शब्दार्थ: सूप = अनाज से भूसा अलग करने वाला छाज (विवेक और सूझबूझ का प्रतीक); थोथा = खोखला/व्यर्थ
- 07शब्दार्थ: आपा = अहंकार; बानी = वाणी; सीतल = शीतल/शांत
Frequently asked questions
01कबीर के दोहे का सारांश क्या है?
इस पाठ में कबीर के आठ दोहे संकलित हैं। इनमें सत्य को सबसे बड़ी साधना, गुरु को ईश्वर से भी ऊपर, मधुर वाणी के महत्त्व, हर बात में संतुलन, आलोचकों को पास रखने, विवेकशील बनने और अच्छी संगति करने की शिक्षा दी गई है।
02कबीर के दोहे के कवि कौन हैं?
इस पाठ के कवि कबीर हैं। माना जाता है कि उनका जन्म चौदहवीं शताब्दी में काशी में हुआ था। वे करघे पर कपड़ा बुनने वाले संत-कवि थे और उनकी रचनाएँ मुख्यतः कबीर ग्रंथावली में संगृहीत हैं।
03कबीर के दोहे का केंद्रीय भाव क्या है?
इन दोहों का केंद्रीय भाव यह है कि सत्य, गुरु-भक्ति, मधुर वाणी, संतुलन और सत्संगति — ये सब मिलकर एक अच्छे जीवन की नींव बनाते हैं। जो व्यक्ति इन गुणों को अपनाता है, वह स्वयं और समाज दोनों का भला करता है।
04Kabir ke Dohe summary in hindi
कबीर के इन आठ दोहों में सत्य को सबसे बड़ी तपस्या और झूठ को पाप बताया गया है। गुरु को ईश्वर से पहले वंदनीय माना गया है। मधुर वाणी से मन शांत होता है। आलोचकों को पास रखने से स्वभाव शुद्ध होता है। किसी भी बात की अति अच्छी नहीं — यह संतुलन का संदेश है। अच्छी संगति से जीवन अच्छा बनता है।
05'साँच बराबर तप नहीं' दोहे का अर्थ क्या है?
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि सत्य से बड़ी कोई तपस्या नहीं और झूठ से बड़ा कोई पाप नहीं। जिसके हृदय में सत्य होता है, उसके हृदय में स्वयं गुरु का वास होता है।
06'गुरु गोविंद दोऊ खड़े' दोहे का अर्थ क्या है?
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि यदि एक साथ गुरु और गोविंद (ईश्वर) दोनों सामने खड़े हों तो पहले गुरु के चरण स्पर्श करने चाहिए, क्योंकि गुरु ने ही गोविंद का मार्ग दिखाया।
07'निंदक नियरे राखिए' दोहे का भाव क्या है?
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि आलोचक को अपने पास रखना चाहिए। वह बिना पानी और साबुन के ही हमारे स्वभाव को निर्मल कर देता है — अर्थात् हमारी गलतियाँ बताकर हमें सुधरने में सहायता करता है।
08इस पाठ में 'सूप' किसका प्रतीक है?
इस पाठ में 'सूप' विवेक और सूझबूझ का प्रतीक है। जैसे सूप अनाज से भूसा अलग करता है, वैसे ही विवेकशील व्यक्ति सार को ग्रहण करता है और व्यर्थ को छोड़ देता है।
09'अति का भला न बोलना' दोहे का संदेश क्या है?
इस दोहे का मूल संदेश है कि जीवन में हर परिस्थिति में संतुलन आवश्यक है। न अधिक बोलना अच्छा है, न अधिक चुप रहना; न अधिक वर्षा अच्छी है, न अधिक धूप। हर बात की अति हानिकारक होती है।
10'कबिरा मन पंछी भया' दोहे का अर्थ क्या है?
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि मन पंछी की तरह है — जहाँ चाहे उड़ जाता है। जो जैसी संगति करता है, उसे वैसा ही फल मिलता है। इसीलिए अच्छी संगति करना आवश्यक है।
11कबीर का जन्म कहाँ और कब हुआ था?
पाठ के अनुसार माना जाता है कि कबीर का जन्म चौदहवीं शताब्दी में काशी में हुआ था।
12'बड़ा हुआ तो क्या हुआ जैसे पेड़ खजूर' दोहे का अर्थ क्या है?
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि केवल बड़ा या संपन्न होने से कोई लाभ नहीं, यदि दूसरों के काम न आया जाए। जैसे खजूर का पेड़ ऊँचा होने पर भी न राही को छाया देता है और न फल आसानी से मिलता है।
13'ऐसी बानी बोलिए मन का आपा खोय' दोहे का अर्थ क्या है?
इस दोहे में कबीर कहते हैं कि ऐसी वाणी बोलनी चाहिए जिसमें अहंकार न हो — ऐसी वाणी जो दूसरों को शांति दे और स्वयं को भी शांत करे।
14क्या कबीर के दोहे अध्याय की PDF मुफ़्त है?
हाँ, बिना साइन-अप के मुफ़्त डाउनलोड करें।
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