Class 7 Sanskrit

Chapter 12 — वीराङ्गना पन्नाधाया

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Overview

Summary

Virangana Pannadhaya is Chapter 12 of Class 7 Sanskrit Deepakam — a historical prose story about Panna Dhay, the legendary wet nurse of Mewar who sacrificed her own son to save the life of prince Udai Singh. यह पाठ राजस्थान की वीराङ्गना पन्नाधाया के अद्वितीय त्याग और राष्ट्रभक्ति की ऐतिहासिक कथा है।

सोलहवीं शताब्दी में मेवाड के महाराणा सङ्ग्रामसिंह के दो पुत्र थे — विक्रमादित्य और उदयसिंह। दुष्टबुद्धि बनवीर ने छल से विक्रमादित्य को मारकर मेवाड का शासन किया और फिर उदयसिंह को भी मारने का षड्यन्त्र रचा। यह जानकर पन्नाधाया ने उदयसिंह के शयनस्थान में अपने पुत्र चन्दन को सुला दिया। बनवीर ने चन्दन को उदयसिंह समझकर मार डाला। पन्नाधाया का निर्णय था — 'व्यक्तिहितं न, राष्ट्रहितम् एव श्रेष्ठम्'। कालान्तर में उदयसिंह ने बनवीर को मारकर मेवाड की गद्दी प्राप्त की और उनके पुत्र महाराणाप्रताप भारतीयों के हृदय में अमर हो गए।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01कथावस्तु: यह पाठ सोलहवीं शताब्दी के मेवाड (राजस्थान) में पन्नाधाया के अदम्य साहस और त्याग की ऐतिहासिक गद्यकथा है।
  2. 02केन्द्रीय शिक्षा: 'व्यक्तिहितं न, राष्ट्रहितम् एव श्रेष्ठम्' — पन्नाधाया का बलिदान शौर्य, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा और विवेक की शिक्षा देता है।
  3. 03प्रमुख पात्र: पन्नाधाया (धाया/दाई), उदयसिंह (महाराणा सङ्ग्रामसिंह के पुत्र), बनवीर (दुष्टबुद्धि षड्यन्त्रकारी), चन्दन (पन्नाधाया का पुत्र — जिसका बलिदान हुआ), महाराणाप्रताप (उदयसिंह के पुत्र — वीर योद्धा)।
  4. 04प्रमुख उद्धरण: "यदि पन्नाधाया नाभविष्यत् तर्हि कुतो राणाप्रतापः" — यदि पन्नाधाया न होती तो महाराणाप्रताप भी न होते।
  5. 05कठिन शब्द: कुतन्त्रम् = षड्यन्त्र; छलेन = कपट से; धाया = धात्री/दाई; आचन्द्रार्कम् = जब तक सूर्य और चन्द्रमा हैं (सदा के लिए); प्रतिस्पर्धी = प्रतिद्वन्द्वी।
  6. 06व्याकरण: पाठ में लङ्-लकार (भूतकाल) का परिचय है — पठ् धातु (परस्मैपदम्) के तीनों पुरुष और तीनों वचन; साथ ही लट्, लङ् और क्तवतुप्रत्यय की तुलनात्मक सारणी दी गई है।
  7. 07योग्यताविस्तर: पाठ में राज्य के सात अङ्ग (स्वामी, अमात्य, सुहृत्, कोष, राष्ट्र, दुर्ग, बल) तथा प्राचीन युद्धव्यूहों (चक्रव्यूह, गरुडव्यूह, मकरव्यूह आदि) की जानकारी भी दी गई है।
Questions

Frequently asked questions

01

Virangana Pannadhaya paath ka arth kya hai?

वीराङ्गना पन्नाधाया का अर्थ है 'वीर नारी पन्नाधाया'। पन्नाधाया मेवाड के राजकुमार उदयसिंह की धाया (दाई) थीं जिन्होंने अपने पुत्र चन्दन का बलिदान देकर उदयसिंह के प्राण बचाए।

02

पन्नाधाया कौन थी?

पन्नाधाया राजस्थान के मेवाड की एक वीराङ्गना थी जो महाराणा सङ्ग्रामसिंह के पुत्र उदयसिंह की धाया (धात्री/दाई) थी। पाठ के अनुसार वह साहस, त्याग और निष्ठा की अद्वितीय मूर्ति थी।

03

पन्नाधाया ने चन्दन को उदयसिंह के स्थान पर क्यों सुलाया?

दुष्टबुद्धि बनवीर ने उदयसिंह को मारने का षड्यन्त्र (कुतन्त्र) रचा था। यह जानकर पन्नाधाया ने उदयसिंह के शयनस्थान में अपने पुत्र चन्दन को सुला दिया ताकि उदयसिंह का जीवन बच सके। उसने राष्ट्रहित को व्यक्तिहित से ऊपर माना।

04

बनवीर कौन था और उसने क्या षड्यन्त्र रचा?

बनवीर महाराणा सङ्ग्रामसिंह के भाई पृथ्वीराज के पुत्रों में से एक था। उसने छल से विक्रमादित्य को मारकर मेवाड का शासन किया और फिर एकमात्र उत्तराधिकारी बनने के लिए उदयसिंह को भी मारने का कुचक्र रचा।

05

पन्नाधाया के बलिदान का क्या परिणाम हुआ?

पन्नाधाया का पुत्र चन्दन तो चला गया, परन्तु उदयसिंह बच गए। कालान्तर में उदयसिंह ने युद्ध में बनवीर को मारकर मेवाड राज्य की गद्दी प्राप्त की। उदयसिंह के पुत्र महाराणाप्रताप हुए जो अपनी वीरता से भारतीयों के हृदय में चिरकाल के लिए स्थान पा गए।

06

'व्यक्तिहितं न, राष्ट्रहितम् एव श्रेष्ठम्' — इसका क्या अर्थ है?

इस वाक्य का अर्थ है — 'व्यक्तिगत हित नहीं, राष्ट्र का हित ही सर्वश्रेष्ठ है।' पन्नाधाया इसी सिद्धान्त पर चली और अपने पुत्र को खोकर भी राज्य की रक्षा की। यह पाठ का मुख्य नैतिक सन्देश है।

07

'आचन्द्रार्कं तिष्ठति' का क्या अर्थ है?

'आचन्द्रार्कम्' का अर्थ है 'जब तक सूर्य और चन्द्रमा हैं' — अर्थात् सदा के लिए। पाठ में कहा गया है कि पन्नाधाया का त्याग और शौर्य संसार में आचन्द्रार्कं (सदा के लिए) बना रहेगा।

08

'यदि पन्नाधाया नाभविष्यत् तर्हि कुतो राणाप्रतापः' — इसका क्या भाव है?

इस उद्धरण का भाव है — यदि पन्नाधाया न होती तो महाराणाप्रताप भी न होते। क्योंकि यदि पन्नाधाया ने उदयसिंह की रक्षा न की होती तो उदयसिंह न होते और उनसे महाराणाप्रताप का जन्म न होता।

09

लङ्-लकार क्या है और इसका प्रयोग कब होता है?

लङ्-लकार का प्रयोग भूतकाल (बीते हुए समय की क्रिया) में होता है। जैसे — अपठत् (उसने पढ़ा), अपठम् (मैंने पढ़ा), अपठन् (उन्होंने पढ़ा)। इस पाठ में पठ् धातु के परस्मैपदी रूप तीनों पुरुषों और तीनों वचनों में दिए गए हैं।

10

लट्-लकार और लङ्-लकार में क्या अन्तर है?

लट्-लकार वर्तमानकाल (present tense) के लिए है और लङ्-लकार भूतकाल (past tense) के लिए। जैसे — पठति (वह पढ़ता है) लट् है और अपठत् (उसने पढ़ा) लङ् है। पाठ में दोनों की तुलनात्मक सारणी दी गई है।

11

पाठ में किन कठिन शब्दों के अर्थ दिए गए हैं?

पाठ में प्रमुख कठिन शब्द हैं: कुतन्त्रम् (षड्यन्त्र), छलेन (कपट से), धाया (धात्री/दाई), प्रतिस्पर्धी (प्रतिद्वन्द्वी), स्वर्णिमाक्षरैः (सोने के अक्षरों से), शत्रुनिबर्हणाः (शत्रुओं का विनाशक), आचन्द्रार्कम् (जब तक सूर्य और चन्द्र हों), पराक्रमी (वीर)।

12

What is the moral of the story Virangana Pannadhaya?

पन्नाधाया की कथा का मुख्य सन्देश है — राष्ट्रहित सर्वोपरि है। पाठ के अनुसार पन्नाधाया का बलिदान शौर्य, राष्ट्रभक्ति, कर्तव्यनिष्ठा, बलिदान और विवेक की शिक्षा देता है।

13

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