Summary
Path 11 of the Class 5 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), 'Hamare Ye Kalamandir' (हमारे ये कलामंदिर) — download the PDF aur padhein is ropak gadya-path ka saransh, jisme Nisha apni mausi ke saath Ajanta aur Ellora ki prashiddh Buddhist gupaon ki yatra karti hai aur do hazar saal purani bhartiya kala ki azeem virassat ko aankho se dekhti hai.
- सारांश — निशा दशहरे की छुट्टियों में अपनी मौसी के साथ महाराष्ट्र के अजंता और एलोरा की गुफाओं की यात्रा पर जाती है। अजंता में उसे पहाड़ काटकर बनाई गई उनतीस गुफाएँ मिलती हैं, जिनकी दीवारों पर गौतम बुद्ध के जीवन, पशु-पक्षियों और स्त्रियों के सजीव चित्र बने हैं। रंग दो हजार वर्ष बाद भी फीके नहीं पड़े, क्योंकि वे पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों से बनाए गए थे। एलोरा में लगभग तीस मंदिर पहाड़ काटकर बने हैं जिनमें बौद्ध, हिंदू और जैन धर्म की मूर्तियाँ हैं। कैलाश मंदिर एक ही चट्टान को ऊपर से तराशकर बनाया गया है — यह देख निशा गर्व और आश्चर्य से भर जाती है।
- विषय और मूल भाव — इस पाठ का केंद्रीय विषय भारत की प्राचीन कला-विरासत के प्रति गर्व और सम्मान जगाना है। पाठ बताता है कि हजारों वर्ष पहले भी हमारे देश में कला का असाधारण विकास था। 'हमारी धरोहर' खंड में यह संदेश भी दिया गया है कि इन ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा करना प्रत्येक नागरिक का उत्तरदायित्व है।
- रचना का संदर्भ और स्वरूप — यह पाठ एक यात्रा-वर्णन (travelogue) के रूप में लिखा गया गद्य-पाठ है, कविता नहीं। इसमें निशा और उसकी मौसी के संवाद के माध्यम से अजंता-एलोरा की ऐतिहासिक और सांस्कृतिक जानकारी स्वाभाविक ढंग से दी गई है। पाठ NCERT की वीणा पुस्तक के अनुसार 2026-27 संस्करण में सम्मिलित है।
Key points & formulas
- 01अजंता की गुफाएँ महाराष्ट्र के संभाजीनगर से लगभग सौ किलोमीटर दूर हैं; एलोरा लगभग चालीस किलोमीटर दूर है।
- 02अजंता में उनतीस गुफाएँ पहाड़ को काटकर बनाई गई हैं और उनका मुँह पूर्व दिशा में है ताकि प्रातःकाल सूर्य की किरणें सीधे पड़ें।
- 03गुफाओं के चित्रों के रंग दो हजार वर्ष बाद भी फीके नहीं पड़े क्योंकि वे पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों जैसी प्राकृतिक सामग्री से बनाए गए थे।
- 04एलोरा में बौद्ध, हिंदू और जैन — तीनों धर्मों से संबंधित मूर्तियाँ और मंदिर हैं जो पहाड़ काटकर बनाए गए हैं।
- 05कैलाश मंदिर एक ही ऊँची चट्टान को ऊपर से तराशकर बनाया गया है — यह इस पाठ की सबसे अद्भुत कलाकृति है।
- 06कठिन शब्दार्थ — शिलाखंड: चट्टान या पत्थर का बड़ा टुकड़ा; भिक्षु: संन्यासी या याचक; विश्रामगृह: आराम करने का स्थान (विश्राम + गृह); बेजोड़: जिसकी तुलना न हो सके।
- 07पाठ का मुख्य संदेश: भारत की प्राचीन कला-विरासत पर गर्व करें और ऐतिहासिक स्मारकों की रक्षा करना हमारा उत्तरदायित्व है।
Frequently asked questions
01'हमारे ये कलामंदिर' पाठ किसके बारे में है?
यह पाठ निशा और उसकी मौसी की अजंता और एलोरा की गुफाओं की यात्रा के बारे में है। इसमें उन गुफाओं में बनी सुंदर पेंटिंग और मूर्तियों का वर्णन है।
02निशा अजंता और एलोरा देखने के लिए क्यों उत्साहित थी?
निशा ने पुस्तकों में अजंता और एलोरा के बारे में पढ़ा था, इसलिए तभी से उसके मन में उत्सुकता थी कि ये गुफाएँ देखने में कैसी होंगी।
03निशा और उसकी मौसी अजंता कैसे पहुँचीं?
दोनों पहले रेलगाड़ी से छत्रपति संभाजीनगर (महाराष्ट्र) पहुँचीं और वहाँ स्टेशन के विश्रामगृह में रात बिताई। अगले दिन सुबह बस से अजंता गईं, जो संभाजीनगर से लगभग सौ किलोमीटर दूर है।
04अजंता में कुल कितनी गुफाएँ हैं और वे कैसी दिखती हैं?
अजंता में एक पहाड़ी पर पंक्ति में उनतीस गुफाएँ हैं। उनका मुँह पूर्व दिशा की ओर होने से सुबह सूरज की किरणें उन पर पड़ती हैं। पास में एक छोटी नदी बहती है, नदी में बड़े-बड़े शिलाखंड हैं, गुफा के नीचे एक कुंड है और घाटी में रंग-बिरंगे फूल खिले हैं।
05अजंता की गुफाओं में किन-किन चीजों के चित्र बने हैं?
गुफाओं की दीवारों पर गौतम बुद्ध के घर छोड़कर तप के लिए जाने, भिक्षुओं को उपदेश देने और भिक्षा माँगने के चित्र हैं। इसके अलावा पेड़-पौधों, पशु-पक्षियों और स्त्रियों के भी चित्र हैं।
06अजंता के चित्रों में रंग हजारों साल बाद भी फीके क्यों नहीं पड़े?
मौसी ने बताया कि उस समय रंग बनाने का ढंग बहुत अनोखा था। ये रंग पत्तों, जड़ी-बूटियों और फूलों जैसी प्राकृतिक सामग्रियों से बनाए जाते थे, इसीलिए दो हजार वर्ष बाद भी रंग ज्यों के त्यों हैं।
07अजंता की गुफाएँ कितनी पुरानी हैं?
मौसी ने निशा को बताया कि ये गुफाएँ दो हजार वर्ष पुरानी हैं।
08एलोरा में क्या-क्या देखने को मिला?
एलोरा में पहाड़ों को काटकर लगभग तीस मंदिर बनाए गए हैं। इन मंदिरों में बौद्ध, हिंदू और जैन तीनों धर्मों से संबंधित अत्यंत सुंदर मूर्तियाँ हैं। ये मूर्तियाँ बड़ी-बड़ी विशाल शिलाओं को तराशकर बनाई गई थीं।
09कैलाश मंदिर क्यों इतना प्रसिद्ध है?
मौसी ने बताया कि कैलाश मंदिर एक ऊँचे पहाड़ को ऊपर से तराशकर बनाया गया है। यानी पूरा मंदिर एक ही चट्टान से बना है, जो इसे अत्यंत अद्भुत और प्रसिद्ध बनाता है।
10पाठ में 'शिलाखंड', 'भिक्षु' और 'कुंड' का क्या अर्थ है?
शिलाखंड का अर्थ है चट्टान या पत्थर। भिक्षु का अर्थ है संन्यासी या याचक। कुंड का अर्थ है तालाब या जलाशय।
11इस पाठ से हमें क्या संदेश मिलता है?
इस पाठ से हमें पता चलता है कि हजारों वर्ष पहले भी हमारे देश में कला का बहुत विकास हो चुका था। अजंता और एलोरा की ये बेजोड़ कलाकृतियाँ हमारी धरोहर हैं और हमें इनकी सुंदरता बनाए रखनी चाहिए। इन्हें छूने, खुरचने या दीवारों पर कुछ लिखने से इन्हें नुकसान होता है।
12संभाजीनगर से एलोरा कितना दूर है और वे वहाँ कैसे गईं?
संभाजीनगर से एलोरा लगभग चालीस किलोमीटर दूर है। निशा और उसकी मौसी अजंता से वापस संभाजीनगर आईं और दूसरे दिन बस में बैठकर एलोरा देखने गईं।
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