Summary
Path 6 — Class 5 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), 'Chatur Chitrakaar' (चतुर चित्रकार) — download the PDF aur padhein is hasya-kavita ka saraansh jisme ek chitrakaar apni samajhdaari se sher se apni jaan bachata hai. Rachyita: Ramnaresh Tripathi.
- सारांश — एक चित्रकार सुनसान जंगल में बैठकर चित्र बना रहा था। तभी वहाँ शेर आ गया, जिसे कविता में 'यमराज का मित्र' कहकर उसकी भयानकता दर्शाई गई है। चित्रकार पहले डर गया, पर फिर हिम्मत करके शेर से बोला कि वह उसका सुंदर चित्र बनाएगा। उसने शेर को उकड़ू-मुकड़ू बैठाया, फिर कहा कि अब मुँह उधर कर लो — जंगल की तरफ। जैसे ही शेर ने पीठ फेरी, चित्रकार चुपके से खिसककर झील में खड़ी नाव पर चढ़ गया और जल्दी-जल्दी नाव चलाकर दूर निकल गया। शेर धोखा खाकर झुंझलाहट में चूर हुआ और 'कायर डरपोक' कहकर चिल्लाया। चित्रकार ने हँसते हुए जवाब दिया कि कलम और कागज अपने पास रखो और जंगल में चित्रकला का अभ्यास करते रहो।
- मूल भाव — चतुराई से संकट पर विजय — इस कविता का मूल भाव यह है कि शारीरिक बल से बड़ी होती है बुद्धि की शक्ति। शेर शक्तिशाली था, लेकिन चित्रकार ने अपनी समझदारी और धीरज से उसे चकमा दे दिया। बिना किसी से लड़े, बिना घबराए, उसने परिस्थिति का फायदा उठाया — शेर की जिज्ञासा को अपने काम में लगाया और शांत चित्त से भाग निकला। कविता बच्चों को सिखाती है कि मुसीबत में घबराने से नहीं, सोच-समझकर काम करने से रास्ता निकलता है।
- कवि परिचय — रामनरेश त्रिपाठी — यह कविता रामनरेश त्रिपाठी द्वारा रचित है, जैसा कि पाठ के अंत में उल्लेख है। रामनरेश त्रिपाठी हिंदी के प्रसिद्ध कवि रहे हैं जिनकी रचनाओं में सरल भाषा, हास्य और जीवन-मूल्यों का मेल मिलता है। इस कविता में भी उन्होंने सरल, तुकबंदी वाली भाषा में एक मनोरंजक प्रसंग के जरिए बुद्धि की श्रेष्ठता का संदेश दिया है। कविता के अंत में उन्होंने 'आज की पहेली' भी रची है जो इसी कविता के कवि द्वारा बताई गई है।
Key points & formulas
- 01कविता के रचयिता रामनरेश त्रिपाठी हैं, जिनका उल्लेख पाठ में मिलता है।
- 02शेर को 'यमराज का मित्र' कहा गया है — इस प्रयोग से शेर की भयावहता को बिना सीधे वर्णन के महसूस कराया गया है।
- 03कठिन शब्दार्थ — उकड़ू-मुकड़ू: टाँगें समेटकर सिकुड़कर बैठना; झुंझलाहट: गुस्से और खीझ से भरी मनोस्थिति; खिसकना: बिना किसी को पता लगे धीरे-धीरे सरक जाना।
- 04चित्रकार ने शेर को 'जंगल के सरदार' कहकर संबोधित किया — इससे शेर का अभिमान जागा और वह चित्रकार की बात मानता रहा।
- 05पाठ में मुहावरों का सुंदर प्रयोग हुआ है: 'होश उड़ जाना' (अचानक डर जाना), 'जी भर के साँस लेना' (राहत की साँस लेना), 'धोखा खाना' (छले जाना), 'झुंझलाहट में चूर होना' (बहुत अधिक खीझ से भर जाना)।
- 06झील के किनारे नाव का होना कविता का निर्णायक मोड़ है — इसी नाव ने चित्रकार को जीवन दान दिया।
- 07कविता का संदेश: शारीरिक बल की तुलना में बुद्धि और धैर्य से मुसीबत को पार किया जा सकता है।
Frequently asked questions
01'चतुर चित्रकार' कविता के कवि कौन हैं?
इस कविता के कवि रामनरेश त्रिपाठी हैं।
02'चतुर चित्रकार' कविता का सारांश क्या है?
एक चित्रकार जंगल की सुनसान जगह में चित्र बना रहा था। वहाँ अचानक शेर आ गया। चित्रकार ने घबराहट में हिम्मत जुटाई और शेर से कहा कि वह उसका सुंदर चित्र बनाएगा। पहले उसने शेर का आगे का चित्र बनाया, फिर पीठ फेरकर बैठने को कहा। जैसे ही शेर ने पीठ की, चित्रकार चुपके से खिसककर झील के किनारे खड़ी नाव में बैठ गया और दूर निकल गया। ठगा हुआ शेर झुँझलाकर रह गया।
03कविता में यमराज का मित्र किसे कहा गया है?
कविता में शेर को यमराज का मित्र कहा गया है, क्योंकि शेर एक खतरनाक जानवर है जो किसी की जान ले सकता है।
04चित्रकार ने शेर को पीठ फेरकर बैठने के लिए क्यों कहा?
चित्रकार ने शेर को यह कहकर पीठ फेरने को कहा कि वह आगे का चित्र बन गया है और अब पीछे का चित्र बनाना है। असल में वह शेर की नजर हटाकर चुपके से भागने की योजना बना रहा था।
05चित्रकार ने शेर से अपनी जान कैसे बचाई?
चित्रकार ने धैर्य और चतुराई से जान बचाई। उसने शेर को चित्र बनाने के बहाने पीठ फेरकर बैठा दिया और फिर चुपके से खिसककर झील किनारे रखी नाव पर सवार होकर दूर निकल गया।
06कविता में शेर ने चित्रकार को क्या कहकर बुलाया और चित्रकार ने क्या जवाब दिया?
शेर ने खिसियाकर कहा — 'नाव जरा ले रोक, कलम और कागज तो ले जा, रे कायर डरपोक।' चित्रकार ने तुरंत जवाब दिया — 'रखिए अपने पास, चित्रकला का आप कीजिए, जंगल में अभ्यास।'
07चित्रकार ने शेर को 'जंगल के सरदार' क्यों कहा?
चित्रकार ने शेर को 'जंगल के सरदार' इसलिए कहा ताकि शेर खुश हो और उसकी बात मानकर पीठ फेरकर बैठ जाए। यह भी चित्रकार की चालाकी का हिस्सा था।
08कविता में कौन-कौन से मुहावरे आए हैं?
कविता में ये मुहावरे आए हैं — 'होश उड़ जाना' (बहुत डर जाना), 'जी भर के साँस लेना' (राहत की साँस लेना), 'धोखा खाना' (छला जाना), और 'झुँझलाहट में चूर होना' (बहुत गुस्से और खीज में होना)।
09कविता का मुख्य संदेश क्या है?
कविता का संदेश है कि मुसीबत के समय घबराना नहीं चाहिए। शांत दिमाग से सोचकर बुद्धिमानी और चतुराई से काम लिया जाए तो बड़े से बड़े संकट से भी बचा जा सकता है।
10शेर ने चित्रकार को 'कायर और डरपोक' कहा — क्या वह सच में डरपोक था?
नहीं, चित्रकार डरपोक नहीं था। उसने शेर को देखकर पहले डर तो जरूर गया, लेकिन बाद में हिम्मत जुटाकर चतुराई से काम लिया और बिना किसी लड़ाई के अपनी जान बचाई। यह बुद्धिमानी की निशानी है।
11चित्रकार कहाँ चित्र बना रहा था और वहाँ का वातावरण कैसा था?
चित्रकार एक सुनसान जगह में चित्र बना रहा था जहाँ नदी, पहाड़, पेड़ और पत्ते थे। झील के किनारे एक नाव भी रखी थी जो आगे चलकर उसके काम आई।
12'उकड़ू-मुकड़ू' का क्या अर्थ है और कविता में यह किसके लिए प्रयोग हुआ है?
'उकड़ू-मुकड़ू' का अर्थ है सिकुड़कर या अंग समेटकर बैठना। कविता में यह शेर के लिए प्रयोग हुआ है — वह अपने सारे अंग बटोरकर चित्रकार की तरफ ध्यान से देखते हुए बैठ गया था।
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