Summary
Path 3 — Class 5 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा), 'Chand Ka Kurta' (चाँद का कुर्ता) — download the PDF aur padhein saraansh, shabdarth, aur prashn-uttar. Ramdhari Singh 'Dinkar' ki yeh kavita chand aur uski maa ke beech ki ek pyaari batcheet hai jisme chand sardi se bachne ke liye kapda maangta hai.
- सारांश — यह कविता रामधारी सिंह 'दिनकर' द्वारा रचित है। इसमें चाँद अपनी माँ से हठ करके ऊन का एक मोटा झिंगोला सिलवाने की माँग करता है क्योंकि रात भर सन-सन चलती ठंडी हवा में आकाश का सफर करते हुए वह ठिठुरता रहता है। माँ उसकी बात सुनकर प्यार से समझाती है कि उसका आकार हर दिन बदलता रहता है — कभी वह एक अँगुल-भर चौड़ा होता है, कभी एक फुट मोटा, कभी बड़ा, कभी छोटा और कभी-कभी बिलकुल दिखाई ही नहीं पड़ता। इसलिए एक नाप का झिंगोला सिलना संभव नहीं है।
- मूल भाव / थीम — कविता का मूल भाव माँ और बच्चे के बीच का स्नेहपूर्ण संवाद है। चाँद को एक बच्चे की तरह प्रस्तुत किया गया है जो जिद्द करता है और माँ उसे प्यार से मना करती है। साथ ही कविता चाँद के बदलते आकार — अमावस्या से पूर्णिमा तक की यात्रा — को रोचक और सरल ढंग से बच्चों के सामने रखती है।
- कवि-परिचय — इस कविता के रचयिता रामधारी सिंह 'दिनकर' हैं। यह कविता NCERT की कक्षा 5 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'वीणा' के पाठ 3 में संकलित है। पाठ्यपुस्तक का संस्करण 2026-27 का पुनर्मुद्रण (Reprint) है।
Key points & formulas
- 01कविता के कवि रामधारी सिंह 'दिनकर' हैं। यह Class 5 Hindi NCERT पुस्तक 'वीणा' का पाठ 3 है।
- 02चाँद अपनी माँ से हठ करके ऊन का मोटा झिंगोला (एक प्रकार का गर्म कुरता) सिलवाने की माँग करता है।
- 03चाँद को रात भर 'सन-सन चलती हवा' में आकाश का सफर करते हुए ठंड लगती है — वह 'ठिठुर-ठिठुरकर' यात्रा पूरी करता है।
- 04माँ समझाती है कि चाँद का आकार हर दिन बदलता है: 'कभी एक अँगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा' — इसलिए एक नाप का कुरता बनाना असंभव है।
- 05शब्दार्थ — झिंगोला: एक प्रकार का ढीला और गर्म ऊनी कुरता। ठिठुरना: अत्यधिक ठंड से काँपना। भाड़े का: किराए पर लिया हुआ।
- 06कविता में चाँद को एक बच्चे की तरह प्रस्तुत किया गया है जो माँ से जिद करता है — निर्जीव खगोलीय पिंड को सजीव इंसान की तरह चित्रित किया गया है।
- 07माँ, चाँद को 'सलोने' (सुंदर, प्यारे) कहकर पुकारती है, जो माँ के वात्सल्य और प्रेम को दर्शाता है।
Frequently asked questions
01'चाँद का कुरता' कविता किसने लिखी है?
यह कविता रामधारी सिंह 'दिनकर' ने लिखी है। वे हिंदी के प्रसिद्ध कवि हैं और यह कविता कक्षा 5 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'वीणा' के पाठ 3 में है।
02इस कविता में चाँद अपनी माँ से क्या माँग रहा है?
चाँद अपनी माँ से ऊन का एक मोटा झिंगोला (ऊनी कुरता) सिलवाने की माँग कर रहा है। वह यह भी कहता है कि अगर नया नहीं बन सकता तो किसी भाड़े का (किराये का) कुरता ही ला दें।
03चाँद को झिंगोले की ज़रूरत क्यों पड़ी?
जाड़े के मौसम में रात भर सन-सन हवा चलती है जिससे चाँद को बहुत ठंड लगती है। वह ठिठुर-ठिठुरकर अपनी आकाश की यात्रा पूरी करता है इसलिए उसे गर्म कपड़े की ज़रूरत है।
04चाँद की माँ उसे झिंगोला क्यों नहीं सिलवा पा रही है?
चाँद की माँ को डर है क्योंकि चाँद का आकार हर रोज़ बदलता रहता है — कभी एक अंगुल-भर चौड़ा, कभी एक फुट मोटा, कभी बड़ा और कभी छोटा। एक ही नाप में कभी नहीं रहता इसलिए नाप लेकर कुरता सिलना संभव नहीं है।
05कविता में चाँद के बदलते आकार का वर्णन किन शब्दों से किया गया है?
कविता में चाँद के बदलते आकार को इन शब्दों से दर्शाया गया है — 'कभी एक अंगुल-भर चौड़ा', 'कभी एक फुट मोटा', 'किसी दिन बड़ा हो जाता है', 'किसी दिन छोटा'। एक दिन तो वह किसी की भी आँखों को दिखाई भी नहीं पड़ता।
06'झिंगोला' शब्द का क्या अर्थ है?
झिंगोला एक ऊनी लंबा कुरता या ओवरकोट जैसा गर्म वस्त्र होता है। कविता में चाँद ऊन का मोटा झिंगोला माँग रहा है ताकि जाड़े में ठंड से बच सके।
07कविता में ठंड के मौसम को दर्शाने के लिए किन-किन शब्दों का उपयोग हुआ है?
ठंड के मौसम को दर्शाने के लिए कविता में 'सन-सन चलती हवा', 'जाड़े से मरता हूँ', 'ठिठुर-ठिठुरकर', 'ऊन का मोटा झिंगोला', और 'जाड़े का मौसम' जैसे शब्द और वाक्यांश इस्तेमाल किए गए हैं।
08चाँद की माँ ने उससे क्या कहा और उन्होंने क्या चिंता ज़ाहिर की?
माँ ने चाँद को 'अरे सलोने' कहकर प्यार से पुकारा और भगवान से उसकी कुशलता माँगी। उन्होंने कहा कि जाड़े की बात तो ठीक है, लेकिन समस्या यह है कि चाँद का आकार हर रोज़ बदलता रहता है इसलिए नाप लेकर कुरता सिलवाना असंभव है।
09'हठ कर बैठा चाँद' — इसका क्या अर्थ है और इससे चाँद के बारे में क्या पता चलता है?
'हठ कर बैठा' का अर्थ है जिद करके बैठ जाना। इससे पता चलता है कि चाँद एक छोटे बच्चे की तरह ज़िद्दी स्वभाव का है जो अपनी माँ से झिंगोले की माँग करने पर अड़ गया है।
10कविता से क्या संदेश मिलता है?
कविता में चाँद को एक बच्चे की तरह दिखाया गया है जो माँ से ज़िद करता है। इससे यह संदेश मिलता है कि माँ हमेशा बच्चे की ज़रूरत समझती है और उसकी परेशानी दूर करने की कोशिश करती है, लेकिन कुछ समस्याएँ ऐसी होती हैं जिनका हल आसान नहीं होता।
11कविता में 'भाड़े का कुरता' से क्या तात्पर्य है?
भाड़े का कुरता यानी किराये पर लिया हुआ कुरता। चाँद यह कहता है कि अगर नया कुरता नहीं बन सकता तो माँ उसके लिए किसी से किराये पर ही कुरता ले आए — इससे उसकी परेशानी और ज़िद दोनों झलकती हैं।
12चाँद किस यात्रा को पूरा करने की बात करता है?
चाँद आकाश में रात भर चलने की यात्रा की बात करता है — 'आसमान का सफर'। वह कहता है कि जाड़े के मौसम में ठंडी हवा में ठिठुर-ठिठुरकर किसी तरह यह आकाश का सफर पूरा करता है।
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