किरन
Chapter 1 of the Class 5 Hindi NCERT textbook (Veena / वीणा) is "Kiran" (किरन) — a poem by Nirankaar Dev 'Sevak'. Download the PDF aur padhein saraansh, shabd-arth, aur pramukh prashn-uttar. The poem shows a sunray talking to a little girl, explaining how it travels across the world while she sleeps.
- 1कवि: निरंकार देव 'सेवक' — यह कविता 'वीणा' (कक्षा 5, NCERT) के पाठ 1 में संकलित है।
- 2गद्यांश 'पेड़ का जादू' के लेखक विनोद कुमार शुक्ल हैं; यह इकतारा ट्रस्ट से साभार लिया गया है।
- 3मूल भाव: सूर्य की किरन को एक सजीव मित्र की तरह प्रस्तुत किया गया है जो बालिका के साथ खेलती है और फिर दुनिया के दूसरे भाग में चली जाती है — पृथ्वी के घूमने के वैज्ञानिक तथ्य को सरल कल्पना के माध्यम से समझाया गया है।
- 4शब्दार्थ — किरन: सूर्य की रोशनी की एक लकीर (ray of sunlight); अकेली: अकेली, बिना किसी साथ के; परिक्रमा: किसी के चारों ओर घूमना।
- 5कविता में बताया गया है कि किरन रात को 'एक दूसरी दुनिया में' जाती है — इसका अर्थ है पृथ्वी का वह हिस्सा जहाँ उस समय दिन होता है, और वहाँ सोए बच्चों को जगाती है।
