Class 12 Sanskrit

Chapter 5 — Shukanasopadeshaha

Open PDFReads in your browser
Overview

Summary

NCERT Class 12 Sanskrit Shaswati Shukanasopadeshaha यह पाठ महाकवि बाणभट्ट के गद्यकाव्य 'कादम्बरी' के 'शुकनासोपदेशः' गद्यांश पर आधारित है, जिसमें अनुभवी मन्त्री शुकनास राजकुमार चन्द्रापीड को राज्याभिषेक से पूर्व यौवन, ऐश्वर्य और लक्ष्मी से उत्पन्न दोषों के प्रति वात्सल्यभाव से सावधान करते हैं।

यह पाठ महाकवि बाणभट्ट रचित 'कादम्बरी' के 'शुकनासोपदेशः' गद्यांश से लिया गया है। राजा अपने पुत्र चन्द्रापीड का युवराज-पद पर अभिषेक करना चाहते हैं। इस अवसर पर अनुभवी मन्त्री शुकनास वात्सल्यभाव से उसे उपदेश देते हैं। वे बताते हैं कि गर्भेश्वरत्व, नवयौवन, अतुल सौन्दर्य और अमानुषीय शक्ति — ये चारों अनर्थ की परम्परा बनाते हैं। लक्ष्मी की अनार्यता, चापलूस धूर्तों के छल और यौवन के मोह से सावधान रहने की शिक्षा देकर शुकनास चुप हो जाते हैं। उपदेश-वचनों से प्रक्षालित और पवित्रित होकर चन्द्रापीड प्रसन्नचित्त अपने भवन को लौटता है।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01पाठ का स्रोत एवं विधा: यह पाठ महाकवि बाणभट्ट (राजा हर्षवर्धन के समकालीन, 606–648 ई.) के संस्कृत गद्यकाव्य 'कादम्बरी' से लिया गया है; 'कादम्बरी' संस्कृत साहित्य का सर्वोत्कृष्ट गद्यकाव्य है और 'कथा' श्रेणी का काव्य है।
  2. 02केंद्रीय भाव: अनुभवी मन्त्री शुकनास राजकुमार चन्द्रापीड को राज्याभिषेक से पूर्व चार महान अनर्थों — गर्भेश्वरत्वम्, अभिनवयौवनत्वम्, अप्रतिमरूपत्वम् और अमानुषशक्तित्वम् — के प्रति सावधान करते हैं। इसे समस्त युवकों को प्रदत्त 'दीक्षान्त भाषण' कहा जा सकता है।
  3. 03गुरुपदेश की महिमा: पाठ में कहा गया है — 'गुरूपदेशः नाम अखिलमलप्रक्षालनक्षमम् अजलं स्नानम्' अर्थात् गुरु का उपदेश जल-रहित स्नान के समान है जो समस्त मल को धो देने में सक्षम है।
  4. 04लक्ष्मी की अनार्यता: पाठ में लक्ष्मी को 'अनार्या' कहा गया है — वह न परिचय रक्षति, न अभिजन देखती है, न गुणवान को स्पर्श करती है, दाता को दुःस्वप्न की तरह भूल जाती है और राजाओं को सर्वाविनय का अड्डा बना देती है।
  5. 05धूर्त-चापलूसों से सतर्कता: शुकनास चेतावनी देते हैं कि स्वार्थनिष्पादन-परायण धूर्त लोग राजाओं के दोषों को भी गुण के रूप में प्रस्तुत कर उन्हें भटका देते हैं और वे लोगों के उपहास के पात्र बन जाते हैं।
  6. 06प्रमुख श्लोक (पंचतन्त्र, योग्यताविस्तारः से): 'यौवनं धनसम्पत्तिः प्रभुत्वमविवेकिता। एकैकमप्यनर्थाय किमु यत्र चतुष्टयम्॥' — भाव: यौवन, धन, प्रभुत्व और विवेकहीनता — ये एक-एक भी विनाश के लिए पर्याप्त हैं; जहाँ चारों एक साथ हों, वहाँ की स्थिति और भी विकट है।
  7. 07कठिन शब्दार्थ: गर्भेश्वरत्वम् = जन्म से प्राप्त प्रभुत्व; अपरिणामोपशमः = वृद्धावस्था में भी न शान्त होने वाला (लक्ष्मी का मद); लघिमानमापादयति = निम्नता प्रदान करती है।
Questions

Frequently asked questions

01

Shukanasopadeshaha किस ग्रन्थ से लिया गया है?

यह पाठ महाकवि बाणभट्ट के गद्यकाव्य 'कादम्बरी' के 'शुकनासोपदेशः' नामक गद्यांश से लिया गया है।

02

शुकनासोपदेशः पाठ के लेखक कौन हैं?

इस पाठ के लेखक महाकवि बाणभट्ट हैं, जो संस्कृत के सर्वाधिक प्रतिभाशाली गद्यकार माने जाते हैं और राजा हर्षवर्धन (606–648 ई.) के समकालीन थे।

03

शुकनास कौन थे और उन्होंने किसे उपदेश दिया?

शुकनास एक अनुभवी मन्त्री थे जिन्होंने राजकुमार चन्द्रापीड को राज्याभिषेक से पूर्व वात्सल्यभाव से उपदेश दिया।

04

राजकुमार चन्द्रापीड के क्या गुण बताए गए हैं?

पाठ में चन्द्रापीड को सत्व, शौर्य और आर्जव भावों से युक्त बताया गया है। वे आरूढ-विनय (अत्यन्त विनम्र) भी हैं।

05

NCERT Class 12 Sanskrit Shaswati Shukanasopadeshaha में किन चार अनर्थों का उल्लेख है?

पाठ में गर्भेश्वरत्व (जन्मजात प्रभुत्व), अभिनवयौवनत्व, अप्रतिमरूपत्व और अमानुषशक्तित्व — इन चारों को महती अनर्थ-परम्परा कहा गया है।

06

गुरुपदेश को 'अजलं स्नानम्' क्यों कहा गया है?

पाठ में कहा गया है 'गुरूपदेशः नाम अखिलमलप्रक्षालनक्षमम् अजलं स्नानम्' — गुरु का उपदेश जल-रहित स्नान की तरह समस्त दोषों को धो देने में सक्षम है।

07

पाठ में लक्ष्मी को 'अनार्या' क्यों कहा गया है?

पाठ में शुकनास बताते हैं कि लक्ष्मी न परिचय रक्षती है, न अभिजन देखती है, न गुणवान को स्पर्श करती है, शूर को कण्टक की तरह परिहार करती है — इसलिए वह 'अनार्या' है।

08

राजाओं के सच्चे उपदेष्टा विरल क्यों होते हैं?

पाठ में कहा गया है 'राजवचनमनुगच्छति जनो भयात्' — लोग भय से राजा की बात मानते हैं; इसलिए सच्चे हितकारी उपदेश देने वाले राजाओं को विरले ही मिलते हैं।

09

चन्द्रापीड ने उपदेश सुनकर कैसा अनुभव किया?

पाठ में वर्णित है कि उपदेश-वचनों से प्रक्षालित, उन्मीलित, स्वच्छीकृत, पवित्रीकृत और उद्भासित होकर चन्द्रापीड प्रीतहृदय अपने भवन को लौट गया।

10

बाणभट्ट की कौन-सी दो प्रमुख रचनाएँ हैं?

बाणभट्ट की दो प्रमुख रचनाएँ हैं — 'हर्षचरित' (उनकी प्रथम गद्य कृति, स्वयं बाणभट्ट ने इसे 'आख्यायिका' कहा है) और 'कादम्बरी' (संस्कृत साहित्य का सर्वोत्कृष्ट गद्यकाव्य)।

11

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

12

Shukanasopadeshaha ka saransh kya hai?

इस पाठ का सारांश यह है कि मन्त्री शुकनास राजकुमार चन्द्रापीड को यौवन, ऐश्वर्य, सौन्दर्य और शक्ति के मद से बचने और गुरु के उपदेश को मानने की शिक्षा देते हैं ताकि वे एक आदर्श शासक बन सकें।

Keep learning

More chapters in Shaswati

This is the complete Shaswati Chapter 5 as published by NCERT — every diagram, solved example, and exercise included, free. Browse all CBSE Class 12 textbooks.

Read offline with notes, solutions & mock tests

CBSE Prepmaster — free on iOS & Android

Get the App