Summary
NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 3 'Apu Ke Saath Dhaai Saal' (अपू के साथ ढाई साल) सत्यजित राय द्वारा लिखित एक संस्मरण है। यह पाठ उनकी पहली फीचर फिल्म 'पथेर पांचाली' (1955, बांग्ला) की शूटिंग के ढाई साल के संघर्षपूर्ण अनुभवों पर आधारित है। बांग्ला मूल का हिंदी भाषांतर विलास गिते ने किया है।
सत्यजित राय ने इस संस्मरण में 'पथेर पांचाली' फिल्म की शूटिंग के दौरान झेली गई कठिनाइयों का जीवंत वर्णन किया है। पैसों की तंगी से बार-बार शूटिंग रोकनी पड़ती थी। काशफूलों के दृश्य में सात दिन बाद जानवरों ने फूल खा डाले; रेलगाड़ी के शॉट के लिए तीन गाड़ियाँ काम आईं; मृत 'भूलो' कुत्ते की जगह मिलता-जुलता दूसरा कुत्ता लाना पड़ा; 'श्रीनिवास' मिठाईवाले की मृत्यु के बाद दूसरे व्यक्ति से दृश्य पूरा हुआ। इन सब घटनाओं के जरिए राय ने बताया कि साधनहीनता के बावजूद दृढ़ कलादृष्टि से श्रेष्ठ सिनेमा बनाया जा सकता है।
Key points & formulas
- 01लेखक: सत्यजित राय (जन्म 1921, कोलकाता; मृत्यु 1992); प्रमुख सम्मान: ऑस्कर, भारतरत्न, फ्रांस का लेजन डी ऑनर; प्रमुख फिल्में: पथेर पांचाली, अपराजिता, अपू का संसार
- 02विधा: संस्मरण (memoir); बांग्ला मूल का हिंदी भाषांतर विलास गिते ने किया है
- 03केंद्रीय भाव: पैसों की कमी और साधनहीनता के बीच पहली फिल्म बनाने का संघर्ष — 'किसी फिल्मकार के लिए उसकी पहली फिल्म एक अबूझ पहेली होती है'
- 04मुख्य घटनाएँ: अपू की भूमिका के लिए अखबार में विज्ञापन देने के बाद भी उचित बालक नहीं मिला; अंततः पड़ोस के सुबीर बनर्जी 'अपू' बने। काशफूलों का दृश्य सात दिनों में जानवरों ने बर्बाद किया; अगले साल पूरा हुआ। एक ही सीन में दो अलग 'भूलो' कुत्ते और दो अलग 'श्रीनिवास' इस्तेमाल किए गए — दर्शकों को पता नहीं चला।
- 05बारिश का दृश्य: अक्टूबर में शरद ऋतु में राय हर रोज बच्चों और कैमरे के साथ देहात में इंतजार करते थे; एक दिन धुआँधार बारिश हुई और वह शॉट बहुत अच्छा चित्रित हुआ
- 06शब्दार्थ: कालखंड = समय का एक हिस्सा; स्थगित = रोका हुआ, मुल्तवी; नदारद = गायब
- 07शब्दार्थ: पुकुर = पोखर; कंटिन्युइटी = निरंतरता, तारतम्यता; वास्तुसर्प = घर में रहने वाला सर्प (मान्यता अनुसार कुलदेवता); भात = पके हुए चावल
Frequently asked questions
01NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 3 'Apu Ke Saath Dhaai Saal' के लेखक कौन हैं?
इस पाठ के लेखक सत्यजित राय हैं (जन्म 1921, कोलकाता; मृत्यु 1992)। वे भारतीय सिनेमा के प्रमुख फिल्मकार थे।
02'अपू के साथ ढाई साल' किस विधा की रचना है?
यह एक संस्मरण (memoir) है जिसमें सत्यजित राय ने 'पथेर पांचाली' फिल्म की शूटिंग के ढाई साल के अनुभव साझा किए हैं।
03पथेर पांचाली की शूटिंग ढाई साल तक क्यों चली?
राय उस समय एक विज्ञापन कंपनी में नौकरी करते थे; नौकरी से फुर्सत मिलने पर ही शूटिंग होती थी। पैसे खत्म होने पर दोबारा जमा होने तक शूटिंग स्थगित करनी पड़ती थी।
04Apu Ke Saath Dhaai Saal — 'अपू' की भूमिका किसने निभाई?
पड़ोस के घर में रहने वाले सुबीर बनर्जी ने 'अपू' की भूमिका निभाई। उन्हें राय की पत्नी ने छत से देखकर सुझाया था।
05काशफूलों वाले दृश्य में क्या समस्या आई?
पहले दिन आधे सीन की शूटिंग के बाद सात दिनों में जानवरों ने सारे काशफूल खा डाले। बाकी अंश अगले साल शरद ऋतु में चित्रित किया गया — 'कंटिन्युइटी' बनाए रखने के लिए।
06NCERT Class 11 Hindi Chapter 3 — रेलगाड़ी के दृश्य में कितनी रेलगाड़ियाँ इस्तेमाल हुईं?
एक के बाद एक तीन अलग-अलग रेलगाड़ियाँ इस्तेमाल की गईं। सफेद काशफूलों की पृष्ठभूमि पर काला धुआँ लाने के लिए बॉयलर में कोयला डलवाया गया।
07'भूलो' कुत्ते की जगह दूसरा कुत्ता क्यों लेना पड़ा?
पैसों की कमी से शूटिंग छह महीने रोकनी पड़ी। जब दोबारा गाँव गए तो पता चला 'भूलो' की मृत्यु हो गई थी। उसी रंग (बादामी) और सफेद दुम वाला मिलता-जुलता दूसरा कुत्ता मिला जिसने वह दृश्य पूरा किया।
08Apu Ke Saath Dhaai Saal — श्रीनिवास मिठाईवाले से जुड़ी क्या कठिनाई आई?
श्रीनिवास की भूमिका करने वाले सज्जन का देहांत हो गया। बाकी दृश्य के लिए शरीर से मिलते-जुलते दूसरे व्यक्ति से काम लिया गया — वे कैमरे की ओर पीठ करके दृश्य में आए। फिल्म देखने वालों को यह अंतर पता नहीं चला।
09बारिश का दृश्य चित्रित करने में क्या मुश्किल आई?
बरसात के दिन आए-गए पर पैसे नहीं थे। अक्टूबर में राय हर रोज बच्चों और कैमरे को लेकर देहात में इंतजार करते थे। एक दिन शरद ऋतु में अचानक धुआँधार बारिश हुई और वह दृश्य बहुत अच्छा चित्रित हुआ।
10इंदिरा ठाकरुन की भूमिका किसने निभाई?
अस्सी साल की चुन्नीबाला देवी ने इंदिरा ठाकरुन की भूमिका निभाई और वे ढाई साल तक काम करती रहीं।
11'अपू के साथ ढाई साल' पाठ का हिंदी भाषांतर किसने किया?
बांग्ला मूल से हिंदी भाषांतर विलास गिते ने किया है।
12NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 3 — 'सुबोध दा' कौन थे?
बोडाल गाँव के साठ-पैंसठ साल के एक अद्भुत बुजुर्ग जो मानसिक रूप से बीमार थे। वे दरवाजे पर बैठकर वायलिन पर लोकगीतों की धुनें बजाकर सुनाते थे।
13क्या NCERT Class 11 Hindi Aroh Chapter 3 PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
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