Class 11 Hindi

Chapter 13 — Jaag Tujhko Dur Jana, Sab Ankho Ki Aasu Ujle

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Overview

Summary

NCERT Class 11 Hindi Antra Jaag Tujhko Dur Jana महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक जागरण गीत है जो स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से लिखा गया है। इसमें मोह-माया के कोमल बंधनों से मुक्त होकर भीषण कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहने का आह्वान किया गया है।

'जाग तुझको दूर जाना' स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित महादेवी वर्मा का जागरण गीत है। इसमें कवयित्री मोह-माया के कोमल बंधनों — मोम के बंधन, तितलियों के रंगीले पर, फूलों के ओस-गीले दल — से मुक्त होकर लक्ष्य की ओर अटल रहने का आह्वान करती हैं। हिमगिरि में कंपन, प्रलय के आँसू और तूफ़ान जैसी विपरीत स्थितियों में भी अपने चिह्न छोड़ते हुए आगे बढ़ना है। "हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका" और "राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी" जैसी पंक्तियों में संघर्ष में ही सच्ची जीत का संदेश है।

Essentials

Key points & formulas

  1. 01कवयित्री: महादेवी वर्मा का जन्म फ़र्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ; प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया; प्रयाग महिला विद्यापीठ में दीर्घकाल तक प्राचार्य के पद पर कार्य किया।
  2. 02विधा: कविता (जागरण गीत) — स्वाधीनता आंदोलन और गांधी जी के विचारों की प्रेरणा से रचित; गौतम बुद्ध के दर्शन का भी गहरा प्रभाव।
  3. 03केंद्रीय भाव: मोह-माया के कोमल बंधनों के आकर्षण से मुक्त होकर, भीषण कठिनाइयों की चिंता किए बिना, अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहने का आह्वान; "जाग तुझको दूर जाना" टेक के रूप में बार-बार आता है।
  4. 04काव्य-सौंदर्य: कवयित्री ने नए बिंबों और प्रतीकों का प्रयोग किया है; हिमगिरि, विद्युत-शिखा, मोम के बंधन, दीपक-पतंग जैसे चित्र मन पर गहरी छाप छोड़ते हैं; गीतों की विशेषता लाक्षणिकता, चित्रमयता और रहस्याभास है।
  5. 05पुरस्कार: भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित; 'यामा' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त।
  6. 06प्रमुख काव्य-कृतियाँ: नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, यामा और दीपशिखा; गद्य रचनाओं में पथ के साथी, अतीत के चलचित्र, स्मृति की रेखाएँ और शृंखला की कड़ियाँ उल्लेखनीय हैं।
  7. 07भाषा: काव्य-भाषा प्रायः तत्सम शब्दों से निर्मित; गीतों में संगीतात्मकता, भक्तिकाल के गीतों की प्रतिध्वनि और लोकगीतों की अनुगूँज है।
  8. 08कठिन शब्दार्थ (स्रोत से): कारा = बंधन/कैद; व्योम = आकाश; मृदुल = कोमल; सजग = सावधान; उनींदी = नींद से भरी हुई; व्यस्त बाना = बिखरा या अस्त-व्यस्त वेश।
Questions

Frequently asked questions

01

'जाग तुझको दूर जाना' किसने लिखी?

यह कविता महादेवी वर्मा ने लिखी है। वे फ़र्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में जन्मी थीं और प्रयाग महिला विद्यापीठ में प्राचार्य रहीं।

02

Jaag Tujhko Dur Jana kis class mein hai?

यह कविता NCERT कक्षा 11 की हिंदी पाठ्यपुस्तक 'अंतरा' के अध्याय 13 में है।

03

इस कविता का मुख्य संदेश क्या है?

मोह-माया के कोमल बंधनों और भीषण कठिनाइयों की परवाह किए बिना अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहना इस कविता का मुख्य संदेश है।

04

इस कविता में 'मोम के बंधन' से क्या तात्पर्य है?

कविता में 'मोम के बंधन सजीले' से तात्पर्य उन आकर्षक किंतु कमज़ोर बंधनों से है — जैसे तितलियों के रंगीले पर और ओस-गीले फूल के दल — जो मनुष्य को उसके लक्ष्य से विचलित कर सकते हैं।

05

यह कविता स्वाधीनता आंदोलन से कैसे जुड़ी है?

पाठ्यपुस्तक के अनुसार यह स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से रचित जागरण गीत है; इसमें भीषण कठिनाइयों की चिंता न करते हुए मोह-माया से मुक्त होकर लक्ष्य की ओर बढ़ने का आह्वान है।

06

'कारा' और 'व्योम' शब्दों के अर्थ क्या हैं?

'कारा' का अर्थ है बंधन या कैद; 'व्योम' का अर्थ है आकाश।

07

'हार भी तेरी बनेगी मानिनी जय की पताका' — इस पंक्ति का भाव क्या है?

इस पंक्ति में कवयित्री कहती हैं कि संघर्ष के मार्ग पर हार भी गर्वित विजय की पताका बन जाती है — अर्थात् बलिदान और दृढ़ संघर्ष में ही सच्ची जीत है।

08

'राख क्षणिक पतंग की है अमर दीपक की निशानी' — इसका अर्थ क्या है?

पतंगा दीपक की लौ पर जलकर राख हो जाता है, किंतु वह राख उस अमर दीपक की निशानी है — कविता में यह बलिदान की महिमा का प्रतीक है।

09

Mahadevi Verma ko kaun se puraskar mile?

भारत सरकार ने महादेवी वर्मा को पद्मभूषण से सम्मानित किया और 'यामा' के लिए उन्हें भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार दिया गया।

10

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

11

महादेवी वर्मा की प्रमुख काव्य-कृतियाँ कौन-सी हैं?

नीहार, रश्मि, नीरजा, सांध्यगीत, यामा और दीपशिखा उनकी प्रमुख काव्य-कृतियाँ हैं।

12

कवयित्री ने किन विपरीत परिस्थितियों में आगे बढ़ने का आह्वान किया है?

कविता में अचल हिमगिरि के हृदय में कंपन, प्रलय के आँसुओं में आकाश का रोना और विद्युत-शिखाओं में तूफ़ान का बोलना जैसी विपरीत स्थितियों का उल्लेख है, जिनमें भी मनुष्य को अपने चिह्न छोड़ते हुए आगे बढ़ना है।

13

'तू न अपनी छाँह को अपने लिए कारा बनाना' — इसका क्या अर्थ है?

इस पंक्ति में कवयित्री कहती हैं कि मनुष्य को अपनी ही छाया (अर्थात् अपनी कमज़ोरियों या संकुचित सोच) को अपने लिए कैद नहीं बनाना चाहिए।

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