Class 11 Hindi

Chapter 8 — Bharatvarsh Ki Unnati Kaise Ho Sakti Hai

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Overview

Summary

NCERT Class 11 Hindi Antra Bharatvarsh Ki Unnati Kaise Ho Sakti Hai यह भारतेंदु हरिश्चंद्र (सन् 1850-1885) द्वारा बलिया के ददरी मेले में दिया गया प्रसिद्ध भाषण है, जिसमें वे भारतीय समाज को आलस्य, रूढ़िवाद और परदेशी निर्भरता छोड़कर सर्वांगीण उन्नति की ओर प्रेरित करते हैं।

भारतेंदु हरिश्चंद्र का यह भाषण बलिया के ददरी मेले में दिया गया था। इसमें वे भारतीय समाज की आलस्य और निकम्मेपन पर व्यंग्य करते हैं। एक ओर ब्रिटिश शासन की मनमानी पर कटाक्ष है, तो दूसरी ओर अंग्रेजों की परिश्रमी आदत — विलायत का कोचवान भी अखबार पढ़ता है — का उदाहरण भी। वे धर्म की उन्नति को सर्वप्रथम मानते हैं; साथ ही स्त्री-शिक्षा, बाल-विवाह का विरोध, हिंदू-मुसलमान एकता और स्वदेशी उद्योग को प्रोत्साहन देने का आग्रह करते हैं। भाषण का अंतिम संदेश है — 'अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।'

Essentials

Key points & formulas

  1. 01लेखक परिचय: भारतेंदु हरिश्चंद्र (सन् 1850-1885), काशी में जन्म; आधुनिक हिंदी गद्य, नाटक और निबंध की परंपरा के प्रवर्तक; पत्रिकाएँ — कविवचनसुधा, हरिश्चंद्र मैगजीन (बाद में हरिश्चंद्र चंद्रिका), बाला बोधिनी।
  2. 02विधा: गद्य — भाषण/व्याख्यान (बलिया के ददरी मेले में दिया गया; NCERT Class 11 Hindi Antra में संकलित)।
  3. 03केंद्रीय भाव: भारतीय समाज को आलस्य, रूढ़िवाद और परदेशी निर्भरता छोड़कर धर्म, शिक्षा, रोजगार, समाज — सभी क्षेत्रों में उन्नति के लिए प्रेरित करना।
  4. 04रेल का उदाहरण: 'हमारे हिदुस्तानी लोग तो रेल की गाड़ी हैं। बिना इंजिन ये सब नहीं चल सकतीं।' — भारतीयों में क्षमता है किंतु उचित नेतृत्व और प्रेरणा की आवश्यकता है।
  5. 05उन्नति के उपाय: धर्म को समाज-नीति से जोड़ना; स्त्री-शिक्षा; बाल-विवाह और कुलीन-प्रथा का विरोध; हिंदू-मुसलमान एकता; स्वदेशी कारीगरी को प्रोत्साहन; श्रम को सम्मान।
  6. 06स्वदेशी का संदेश: 'जैसे हजार धारा होकर गंगा समुद्र में मिली हैं, वैसे ही तुम्हारी लक्ष्मी हजार तरह से इंग्लैंड, फरांसीस, जर्मनी, अमेरिका को जाती हैं' — परदेशी वस्तुओं पर निर्भरता पर व्यंग्य।
  7. 07कठिन शब्दार्थ (स्रोत से): महसूल = कर/टैक्स; मर्दुमशुमारी = जनगणना; कमबख्ती = अभागापन; रंगमहल = भोग-विलास का स्थान; चुंगी की कतवार = म्युनिसिपालिटी का कचरा।
Questions

Frequently asked questions

01

भारतवर्ष की उन्नति कैसे हो सकती है — यह किसका भाषण है?

यह भारतेंदु हरिश्चंद्र (सन् 1850-1885) का प्रसिद्ध भाषण है, जो बलिया के ददरी मेले में दिया गया था।

02

Bharatvarsh Ki Unnati Kaise Ho Sakti Hai ka saransh kya hai?

इस भाषण में भारतेंदु भारतीय समाज की आलस्य और निकम्मेपन की आलोचना करते हैं तथा धर्म की उन्नति, स्त्री-शिक्षा, हिंदू-मुसलमान एकता, स्वदेशी उद्योग और श्रम को सम्मान देने का आग्रह करते हुए 'अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो' का संदेश देते हैं।

03

भाषण में रेल के उदाहरण का क्या अर्थ है?

भारतेंदु लिखते हैं: 'हमारे हिदुस्तानी लोग तो रेल की गाड़ी हैं। बिना इंजिन ये सब नहीं चल सकतीं।' इससे आशय है कि भारतीयों में क्षमता है, किंतु उचित नेतृत्व और प्रेरणा मिले तो वे उन्नति कर सकते हैं।

04

'इस अभागे आलसी देश' से लेखक का क्या तात्पर्य है?

भाषण के आरंभ में भारतेंदु कहते हैं: 'इस अभागे आलसी देश में जो कुछ हो जाए वही बहुत कुछ है।' इससे वे भारतीय समाज में व्याप्त आलस्य और निष्क्रियता पर व्यंग्य करते हैं।

05

भारतेंदु ने धर्म की उन्नति को पहला स्थान क्यों दिया?

स्रोत के अनुसार भारतेंदु मानते हैं: 'सब उन्नतियों का मूल धर्म है।' वे भारतीय धर्म-परंपराओं — मेला, एकादशी व्रत, दीवाली, होली — में छिपी समाज-नीति और स्वच्छता की हिकमत बताते हुए उन्हें तर्कसंगत रूप से अपनाने का आग्रह करते हैं।

06

लेखक ने स्त्री-शिक्षा के बारे में क्या कहा?

भारतेंदु कहते हैं: 'लड़कियों को भी पढ़ाइए, किंतु उस चाल से नहीं जैसे आजकल पढ़ाई जाती हैं।' वे ऐसी शिक्षा चाहते हैं जिससे लड़कियाँ अपना देश और कुलधर्म सीखें और बालकों को सहज में शिक्षा दे सकें।

07

भारतेंदु ने मुसलमान भाइयों से क्या आग्रह किया?

स्रोत के अनुसार भारतेंदु कहते हैं: 'मुसलमान भाइयों को भी उचित है कि इस हिदुस्तान में बसकर वे लोग हिदुओं को नीचा समझना छोड़ दें। ठीक भाइयों की भाँति हिदुओं से बरताव करैं।' वे आपसी वैर भूलकर मिलकर उन्नति करने का संदेश देते हैं।

08

'अजगर करै न चाकरी' वाले दोहे का संदर्भ क्या है?

मलूकदास का यह दोहा — 'अजगर करै न चाकरी, पंछी करै न काम। दास मलूका कहि गए, सबके दाता राम।' — भारतेंदु ने आलस्य के प्रचलन के उदाहरण के रूप में उद्धृत किया है। वे कहते हैं कि यहाँ निकम्मेपन को महिमामंडित किया जाता है।

09

स्वदेशी के बारे में Bharatendu Harishchandra ke kya vichar hain?

भारतेंदु कहते हैं: 'परदेशी वस्तु और परदेशी भाषा का भरोसा मत रखो। अपने देश में अपनी भाषा में उन्नति करो।' वे व्यंग्य करते हैं कि धोती अमेरिका की, अंगा इंग्लैंड का, कंघी फ्रांसीस की — सब कुछ विदेशी हो गया है।

10

पाठ में पृथ्वीराज चौहान का उदाहरण क्यों दिया गया?

भारतेंदु ने पृथ्वीराज और चंद कवि की कथा का उल्लेख यह कहने के लिए किया: 'अबकी चढ़ी कमान, को जानै फिर कब चढ़ै।' उसी तरह भारतीयों के पास अभी उन्नति का अवसर है, इसे चूकना नहीं चाहिए।

11

इस पाठ की विधा क्या है और यह भाषण क्यों कहलाता है?

यह गद्य विधा में भाषण है। भारतेंदु ने यह बलिया के ददरी मेले में दिया था। पाठ में प्रत्यक्ष संबोधन ('भाइयो', 'सुनो'), मुहावरे, व्यंग्य और उदाहरणों का प्रयोग भाषण की विशेषताएँ हैं।

12

क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?

हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।

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