HindiClass 11

Antra

Hindi Elective (Prose & Poetry)16 Chapters

Chapter notes

What you'll learn in Antra

A quick revision map of Antra — the core idea and five key takeaways from each chapter. Tap any chapter to read the full NCERT PDF and detailed notes.

01

Idgah

NCERT Class 11 Hindi Antra Idgah — यह पाठ प्रेमचंद द्वारा लिखी प्रसिद्ध कहानी 'ईदगाह' है, जिसमें पाँच वर्षीय गरीब बालक हामिद ईद के मेले में अपनी तीन पैसों की पूँजी से दादी के लिए चिमटा खरीदता है।

  • 1लेखक परिचय: प्रेमचंद का मूल नाम धनपतराय था; जन्म वाराणसी जिले के लमही ग्राम में सन् 1880 में हुआ, निधन 1936 में; असहयोग आंदोलन के दौरान सरकारी नौकरी से त्यागपत्र देकर लेखन को समर्पित हुए।
  • 2विधा: कहानी (गद्य) — पाठ्यपुस्तक अंतरा भाग-1 के गद्य-खंड में संकलित।
  • 3केंद्रीय भाव: कहानी बाल-मनोविज्ञान पर आधारित है; यह दर्शाती है कि अभाव उम्र से पहले बच्चों में बड़ों जैसी समझदारी पैदा कर देता है, और श्रम के सौंदर्य एवं महत्त्व को उद्घाटित करती है।
  • 4मुख्य पात्र: हामिद (चार-पाँच वर्ष का गरीब-सूरत दुबला-पतला बालक), दादी अमीना (बूढ़ी, निराश्रय), महमूद, मोहसिन, नूरे और सम्मी (हामिद के साथी)।
  • 5प्रमुख घटनाएँ: तीन कोस पैदल ईदगाह जाना, नमाज पढ़ना, मेले में साथियों का खिलौने-मिठाई खरीदना, हामिद का दुकानदार से मोल-भाव करके तीन पैसों में चिमटा लेना, और चिमटे को 'रुस्तमे-हिद' सिद्ध करते हुए साथियों को तर्क से परास्त करना।
02

Dopehar Ka Bhojan

NCERT Class 11 Hindi Antra Dopehar Ka Bhojan अमरकांत द्वारा लिखी गई एक यथार्थवादी हिंदी कहानी है, जो गरीबी से जूझते एक निम्न मध्यवर्गीय परिवार की दोपहर के भोजन की मार्मिक स्थिति को चित्रित करती है। इस पाठ की केंद्रीय पात्र सिद्धेश्वरी अपने झूठ और मौन संयम से परिवार को टूटने से बचाए रखती है।

  • 1लेखक परिचय — अमरकांत (1925–2014), उत्तर प्रदेश के बलिया जिले के नगरा गाँव में जन्म; मूल नाम श्रीराम वर्मा; इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बी.ए.; नयी कहानी आंदोलन के प्रमुख कहानीकार।
  • 2पुरस्कार — 'इन्हीं हथियारों से' उपन्यास पर 2007 में साहित्य अकादमी पुरस्कार; 2009 में भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार श्री लाल शुक्ल के साथ संयुक्त रूप से।
  • 3विधा — यथार्थवादी हिंदी कहानी (गद्य); शिल्प की सादगी और सहज संकेतों पर आधारित।
  • 4केंद्रीय भाव — निम्न मध्यवर्गीय परिवार की गरीबी और माँ सिद्धेश्वरी का मौन त्याग; वह 'गरीबी के अहसास को मुखर नहीं होने देती और उसकी आँच से अपने परिवार को बचाए रखती है।'
  • 5मुख्य पात्र व घटनाएँ — सिद्धेश्वरी (माँ), मुंशी चंद्रिका प्रसाद (पिता — डेढ़ महीने पहले मकान किराया नियंत्रण विभाग की क्लर्की से छँटनी हो चुकी), रामचंद्र (बड़ा बेटा, ~21 वर्ष), मोहन (मँझला बेटा, ~18 वर्ष), प्रमोद (छोटा बेटा, ~6 वर्ष); तीनों परिजन बारी-बारी खाने में अधिक रोटी लेने से मना करते हैं।
03

Torch Bechnewale

NCERT Class 11 Hindi Antra Torch Bechnewale हरिशंकर परसाई (1922-1995) द्वारा लिखित एक व्यंग्य-रचना है जिसमें 'टॉर्च' के प्रतीक के माध्यम से आस्थाओं के बाजारीकरण और धार्मिक पाखंड पर करारी चोट की गई है।

  • 1लेखक परिचय: हरिशंकर परसाई (1922-1995) का जन्म जमानी गाँव, जिला होशंगाबाद, मध्य प्रदेश में हुआ; नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए.; सन् 1947 से स्वतंत्र लेखन; जबलपुर से 'वसुधा' नामक साहित्यिक पत्रिका निकाली।
  • 2विधा: व्यंग्य — परसाई ने व्यंग्य विधा को साहित्यिक प्रतिष्ठा प्रदान की; उनके व्यंग्य समाज की विसंगतियों और विडंबनाओं पर करारी चोट करते हुए चिंतन और कर्म की प्रेरणा देते हैं।
  • 3केंद्रीय भाव: 'टॉर्च' के प्रतीक के माध्यम से आस्थाओं के बाजारीकरण और धार्मिक पाखंड पर प्रहार — चाहे भौतिक टार्च हो या आध्यात्मिक 'ज्योति', दोनों धंधों में पहले अंधेरे का भय और फिर अपनी 'कंपनी का टार्च' बेचने की युक्ति एक जैसी है।
  • 4मुख्य पात्र व घटनाएँ: टार्च बेचनेवाला (कथावाचक) 'सूरज छाप' टार्च बेचता था; उसका दोस्त पाँच साल बाद भव्य पुरुष बनकर 'साधना मंदिर' के नाम पर भीड़ को 'आत्मा की ज्योति' जगाने का आह्वान कर रहा था और बँगले में ठाठ-बाट से रह रहा था।
  • 5भाषा-शैली: परसाई बोलचाल के शब्दों का सतर्कता से प्रयोग करते हैं; इस रचना में नाटकीय संवाद और व्यंग्यपूर्ण कथन पाठक को झकझोर देते हैं — 'जिसकी आत्मा में प्रकाश फैल जाता है, वह इसी तरह हरामखोरी पर उतर आता है।'
04

Gunge

NCERT Class 11 Hindi Antra Gunge रांगेय राघव द्वारा लिखी एक मार्मिक कहानी है, जिसमें एक गूँगे-बहरे किशोर के माध्यम से समाज में शोषित और दिव्यांग व्यक्ति की पीड़ा तथा असहायता का यथार्थ चित्रण किया गया है।

  • 1लेखक परिचय: रांगेय राघव (सन् 1923–1962), जन्म आगरा में; मूल नाम तिरुमल्लै नंबाकम वीर राघव आचार्य; आगरा विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए. और पीएच.डी.; 39 वर्ष की अल्पायु में निधन; 1961 में राजस्थान साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित।
  • 2विधा: कहानी (गद्य)। रांगेय राघव ने 1936 से 80 से अधिक कहानियाँ लिखी हैं; उनकी रचनाओं का संग्रह दस खंडों में 'रांगेय राघव ग्रंथावली' नाम से प्रकाशित है।
  • 3केंद्रीय भाव: शोषित और दिव्यांग मनुष्य की असहायता तथा समाज की संवेदनहीनता का चित्रण; साथ ही यह संदेश कि दिव्यांगों को सामान्य मनुष्य की तरह समझना और संवेदनशील व्यवहार करना चाहिए।
  • 4मुख्य पात्र: गूँगा-बहरा किशोर (केंद्रीय पात्र), चमेली (मालकिन), बसंता (चमेली का बेटा), शकुंतला (चमेली की बेटी), सुशीला।
  • 5मुख्य घटनाएँ: गूँगे की माँ पिता की मृत्यु के बाद छोड़ गई; बुआ-फूफा ने पाला और पल्लेदारी कराई; चमेली ने चार रुपये पर नौकर रखा; बसंता की मार पर भी गूँगे ने हाथ नहीं चलाया; चोरी पर चमेली ने निकाला; वह सड़क पर पिटकर सिर फटे हुए दहलीज पर लौटा।
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Jyotiba Phule

NCERT Class 11 Hindi Antra Jyotiba Phule — यह पाठ लेखिका सुधा अरोड़ा (जन्म 1948) द्वारा लिखी गई महात्मा ज्योतिबा फुले की जीवनी है, जिसमें फुले दंपती के दलित-शिक्षा, स्त्री-समानता और सामाजिक-धार्मिक रूढ़ियों के विरुद्ध संघर्ष का वर्णन किया गया है।

  • 1लेखिका परिचय: सुधा अरोड़ा का जन्म 1948 में लाहौर में हुआ; उच्च शिक्षा कलकत्ता विश्वविद्यालय से हुई; प्रमुख कहानी संग्रह हैं — 'बगैर तराशे हुए', 'युद्ध-विराम', 'महानगर की भौतिकी', 'काला शुक्रवार', 'काँसे का गिलास'; 'उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान' द्वारा विशेष पुरस्कार से सम्मानित।
  • 2विधा: जीवनी — पाठ में ज्योतिबा फुले के जीवन-संघर्ष, विचार और कार्यों का वर्णन है।
  • 3केंद्रीय भाव: दलितों, शोषितों और स्त्रियों की समानता तथा शिक्षा के अधिकार के लिए संघर्ष; ब्राह्मण वर्चस्व और सामाजिक-धार्मिक रूढ़ियों का विरोध; पुरोहितवादी और पूँजीवादी मानसिकता पर हल्ला।
  • 4प्रमुख ग्रंथ एवं संस्था: 'सत्यशोधक समाज' की स्थापना; 'गुलामगिरी', 'शेतकर्यांचा आसूड' (किसानों का प्रतिशोध) और 'सार्वजनिक सत्यधर्म' उनके मौलिक विचारों के संग्रह हैं।
  • 5मुख्य घटनाएँ: सावित्री बाई की बचपन की घटना — लाट साहब द्वारा दी किताब को पिता ने कूड़े में फेंका पर सावित्री ने उसे छिपाकर रखा; 14 जनवरी 1848 को पुणे के बुधवार पेठ में पहली कन्याशाला खुली; सावित्री बाई पढ़ाने जाती तो लोग गालियाँ देते, थूकते, पत्थर मारते और गोबर उछालते; फुले ने अपने घर का पानी का हौद सभी जातियों के लिए खोल दिया।
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Khanabados

NCERT Class 11 Hindi Antra Khanabados ओमप्रकाश वाल्मीकि द्वारा लिखी गई एक कहानी है जो ईंट-भट्ठे पर काम करने वाले मजदूर दंपति सुकिया और मानो के शोषण और पक्के घर के टूटते सपने को चित्रित करती है।

  • 1लेखक परिचय: ओमप्रकाश वाल्मीकि (1950–2013), जन्म बरला, मुजफ्फरनगर, उत्तर प्रदेश; हिंदी दलित साहित्य के प्रमुख हस्ताक्षर; प्रमुख कृतियाँ — जूठन (आत्मकथा), सलाम व घुसपैठिये (कहानी संग्रह), सदियों का संताप (कविता संग्रह); डॉ. अंबेडकर राष्ट्रीय पुरस्कार 1993 और परिवेश सम्मान 1995 से सम्मानित।
  • 2विधा: कहानी (गद्य); स्थानीय बोली के संवाद कहानी में वास्तविकता उत्पन्न करने में सहायक हैं।
  • 3केंद्रीय भाव: मजदूर वर्ग के शोषण और यातना का चित्रण; सूबे सिंह जैसे समृद्ध और ताकतवर लोग ईमानदारी से मेहनत कर इज्जत से जीना चाहने वाले मजदूरों को जीने नहीं देते।
  • 4मुख्य पात्र: सुकिया (ईंट-भट्ठे का मजदूर, मानो का पति), मानो (सुकिया की पत्नी, पक्के घर की आकांक्षा रखने वाली), सूबे सिंह (भट्ठा-मालिक मुखतार सिंह का शोषक बेटा), जसदेव (युवा सहायक मजदूर), असगर ठेकेदार, किसनी (शोषण की शिकार मजदूर महिला)।
  • 5प्रमुख घटनाक्रम: सुकिया-मानो का भट्ठे पर आना → पक्के घर का सपना → सूबे सिंह द्वारा किसनी का शोषण → मानो को बुलाने की कोशिश → जसदेव का बीच में पड़ना और पिटाई → कच्ची ईंटों का तोड़ा जाना → मजदूरी से वंचित होकर भट्ठा छोड़ना।
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Uski Maa

NCERT Class 11 Hindi Antra Uski Maa पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' द्वारा लिखी गई एक कहानी है जो स्वाधीनता आंदोलन के दौर में एक ममतामयी माँ जानकी और उसके क्रांतिकारी बेटे लाल की मार्मिक कथा प्रस्तुत करती है।

  • 1लेखक परिचय: पांडेय बेचन शर्मा 'उग्र' (सन् 1900-1967) का जन्म उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के चुनार ग्राम में हुआ; वे आज, विश्वमित्र, स्वदेश, वीणा, स्वराज्य और विक्रम के संपादक रहे तथा मतवाला-मंडल के प्रमुख सदस्य थे।
  • 2विधा: कहानी (गद्य); उग्र जी प्रेमचंदयुगीन कहानीकार हैं और इनकी कहानियों में समाज-सुधार की मुख्य प्रवृत्ति मौजूद है।
  • 3केंद्रीय भाव: यह कहानी माँ की असीम ममता, स्वाधीनता आंदोलन में युवा पीढ़ी के विद्रोह तथा राजभक्त और राजविद्रोही—दो परस्पर विरोधी मानसिकताओं के संघर्ष को चित्रित करती है।
  • 4मुख्य पात्र: जानकी (बूढ़ी ममतामयी माँ), लाल (जानकी का क्रांतिकारी बेटा), चाचा (ज़मींदार/कथावाचक, 'सात पुश्त से सरकार के फ़रमाबरदार'), पुलिस सुपरिटेंडेंट, और बंगड़ (लाल का साथी)।
  • 5भारत माता की छवि: एक लड़के ने जानकी को हलवा परोसते समय कहा, 'माँ! तू तो ठीक भारत माता-सी लगती है'—उसने जानकी की झुर्रियों, केशों और चेहरे की रेखाओं को हिमालय, गंगा-यमुना आदि से जोड़कर उनकी पहचान भारत माता से की।
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Bharatvarsh Ki Unnati Kaise Ho Sakti Hai

NCERT Class 11 Hindi Antra Bharatvarsh Ki Unnati Kaise Ho Sakti Hai यह भारतेंदु हरिश्चंद्र (सन् 1850-1885) द्वारा बलिया के ददरी मेले में दिया गया प्रसिद्ध भाषण है, जिसमें वे भारतीय समाज को आलस्य, रूढ़िवाद और परदेशी निर्भरता छोड़कर सर्वांगीण उन्नति की ओर प्रेरित करते हैं।

  • 1लेखक परिचय: भारतेंदु हरिश्चंद्र (सन् 1850-1885), काशी में जन्म; आधुनिक हिंदी गद्य, नाटक और निबंध की परंपरा के प्रवर्तक; पत्रिकाएँ — कविवचनसुधा, हरिश्चंद्र मैगजीन (बाद में हरिश्चंद्र चंद्रिका), बाला बोधिनी।
  • 2विधा: गद्य — भाषण/व्याख्यान (बलिया के ददरी मेले में दिया गया; NCERT Class 11 Hindi Antra में संकलित)।
  • 3केंद्रीय भाव: भारतीय समाज को आलस्य, रूढ़िवाद और परदेशी निर्भरता छोड़कर धर्म, शिक्षा, रोजगार, समाज — सभी क्षेत्रों में उन्नति के लिए प्रेरित करना।
  • 4रेल का उदाहरण: 'हमारे हिदुस्तानी लोग तो रेल की गाड़ी हैं। बिना इंजिन ये सब नहीं चल सकतीं।' — भारतीयों में क्षमता है किंतु उचित नेतृत्व और प्रेरणा की आवश्यकता है।
  • 5उन्नति के उपाय: धर्म को समाज-नीति से जोड़ना; स्त्री-शिक्षा; बाल-विवाह और कुलीन-प्रथा का विरोध; हिंदू-मुसलमान एकता; स्वदेशी कारीगरी को प्रोत्साहन; श्रम को सम्मान।
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Arey In Dohun Raah Na Paayi, Balam Aavo Hamare Geh Re

NCERT Class 11 Hindi Antra Arey In Dohun Raah Na Paayi (अरे इन दोहुन राह न पाई) कबीर के दो पदों पर आधारित पाठ है — पहले पद में हिंदू और मुसलमान दोनों के बाह्याडंबरों की आलोचना है, और दूसरे पद में कबीर ने स्वयं को विरहिणी स्त्री के रूप में प्रस्तुत करते हुए प्रियतम (ईश्वर) से मिलन की आकांक्षा व्यक्त की है।

  • 1कवि परिचय: कबीर (सन् 1398-1518) का जन्म काशी में हुआ था; वे स्वामी रामानंद के शिष्य थे; उन्होंने स्वयं को जुलाहा और काशी का निवासी कहा है; जीवन के अंतिम समय में मगहर चले गए और वहीं शरीर त्यागा।
  • 2विधा: पद — कबीर ने मूलतः साखी, सबद और रमैनी रचे; रचनाएँ कबीर ग्रंथावली में संगृहीत हैं; कबीर पंथ में बीजक का विशेष महत्त्व है; कुछ रचनाएँ गुरुग्रंथ साहब में भी संकलित हैं।
  • 3पहले पद का केंद्रीय भाव: 'अरे इन दोहुन राह न पाई' — हिंदू और मुसलमान दोनों के बाह्याडंबरों की कड़ी आलोचना; 'हिंदुन की हिंदुवाई देखी तुरकन की तुरकाई' — दोनों धर्मों के खोखले आचरण पर सीधा प्रश्न।
  • 4दूसरे पद का केंद्रीय भाव: 'बालम, आवो हमारे गेह रे' — कबीर ने स्वयं को विरहिणी स्त्री के रूप में प्रस्तुत कर प्रियतम से घर लौटने की आकांक्षा व्यक्त की है; दाम्पत्य प्रेम और घर की महत्ता केंद्र में है।
  • 5काव्य-सौंदर्य: कबीर की कविता की भाषा में 'जनभाषा की सहजता के साथ-साथ भावों की गहराई' है; उनकी काव्यभाषा में 'दार्शनिक चिंतन को सहज रूप में व्यक्त करने की शक्ति' है — 'कामिन को है बालम प्यारा, ज्यों प्यासे को नीर रे' जैसी पंक्तियाँ गहरे भाव को सरल तुलना से व्यक्त करती हैं।
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Khelen Mein Ko Kaako Gusaaiyaan, Murli Tau Gopalhin Bhaavati

NCERT Class 11 Hindi Antra Khelen Mein Ko Kaako Gusaaiyaan, Murli Tau Gopalhin Bhaavati — ये सूरदास (सन् 1478-1583) के दो पद हैं जो NCERT कक्षा 11 हिंदी अंतरा पाठ्यपुस्तक में संकलित हैं। पहले पद में कृष्ण की बाल-लीला का बाल-मनोवैज्ञानिक चित्रण है तथा दूसरे पद में गोपियाँ मुरली के प्रति अपना ईर्ष्या-भाव व्यक्त करती हैं।

  • 1कवि-परिचय: सूरदास (सन् 1478-1583), जन्म-स्थान रुनकता/रेणुका क्षेत्र, जिला आगरा, उत्तर प्रदेश; महाप्रभु वल्लभाचार्य के शिष्य; पुष्टिमार्गी संप्रदाय के 'अष्टछाप' कवियों में सर्वाधिक प्रसिद्ध।
  • 2विधा एवं भाषा: ब्रजभाषा के गेय पद; सभी पद किसी न किसी राग से संबंधित हैं; सूरसागर को राग-सागर भी कहा जाता है; प्रमुख कृतियाँ — सूरसागर, सूरसारावली, साहित्यलहरी।
  • 3पद 1 का केंद्रीय भाव: खेल में श्रीदामा से हार जाने पर कृष्ण बरबस (व्यर्थ ही) रूठ जाते हैं; ग्वाल-बाल तर्क देते हैं; अंत में कृष्ण नंद-दुहैयाँ देकर दाँव स्वीकार करते हैं — बाल-मनोविज्ञान का सूक्ष्म चित्रण।
  • 4पद 2 का केंद्रीय भाव: गोपियाँ सखी से कहती हैं कि मुरली कृष्ण को नाना भाँति नचाती है, एक पाँव पर ठाढ़ा करती है, कमर टेढ़ी करवाती है, गिरिधर की गर्दन झुकवाती है और गोपियों पर उनका कोप करवाती है — गोपियों का ईर्ष्या-भाव प्रकट होता है।
  • 5काव्य-विशेषता: उपमा, उत्प्रेक्षा और रूपक का कुशल प्रयोग; सूरदास मुख्यतः वात्सल्य और शृंगार के कवि हैं; काव्य और संगीत का अपूर्व संगम।
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Hasi Ki Chot Sapna Darbar

NCERT Class 11 Hindi Antra Hasi Ki Chot Sapna Darbar — ये तीन कविताएँ रीतिकालीन कवि देव (देवदत्त द्विवेदी, सन् 1673-1767) द्वारा रचित हैं, जो क्रमशः विप्रलंभ शृंगार, स्वप्न-विरह और दरबारी चाटुकारिता पर केंद्रित हैं।

  • 1कवि परिचय: देव (देवदत्त द्विवेदी), जन्म इटावा उत्तर प्रदेश, काल सन् 1673-1767; रीतिकालीन कवि; 52 से 72 ग्रंथों के रचयिता (रसविलास, भावविलास, काव्यरसायन, प्रेमदीपिका आदि)।
  • 2विधा: सवैया और कवित्त — इस पाठ में तीन कविताएँ (हँसी की चोट, सपना, दरबार)।
  • 3'हँसी की चोट': विप्रलंभ शृंगार का उदाहरण — कृष्ण के हँसकर मुख फेर लेने से गोपी के पंच तत्त्वों में केवल आकाश तत्त्व शेष रहता है; वह मिलने की आस पर ही जीवित है।
  • 4'सपना': संयोग-वियोग का मार्मिक चित्रण — कृष्ण स्वप्न में झूला झूलने को बुलाते हैं, निगोड़ी नींद टूट जाती है, 'आँख खोलि देखौं तौ न घन हैं, न घनश्याम'।
  • 5'दरबार': पतनशील और निष्क्रिय सामंती व्यवस्था पर तीखी प्रतिक्रिया — 'साहिब अंध, मुसाहिब मूक, सभा बहिरी'; कला और गुणग्राहकता की उपेक्षा।
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Sandhya Ke Baad

NCERT Class 11 Hindi Antra Sandhya Ke Baad सुमित्रनंदन पंत द्वारा रचित एक कविता है जो उनके ग्राम्या संकलन से ली गई है। इस कविता में ढलती साँझ के समय गाँव के प्राकृतिक वातावरण, जनजीवन और सामाजिक यथार्थ का सजीव चित्रण किया गया है।

  • 1कवि परिचय: सुमित्रनंदन पंत (1900–1978) का जन्म कौसानी गाँव, अल्मोड़ा, उत्तराखण्ड में हुआ; छायावादी कवियों में वे प्रकृति-प्रेम और सौंदर्य के कवि के रूप में चर्चित हैं और उन्हें शब्द-शिल्पी कवि भी कहा जाता है।
  • 2विधा और स्रोत: कविता; पाठ्यपुस्तक में संकलित यह कविता पंत जी के ग्राम्या संकलन से ली गई है, जिसका मूल स्वर ग्रामीण जन-जीवन के विविध सामाजिक यथार्थ से जुड़ता है।
  • 3केंद्रीय भाव: ढलती साँझ के समय गाँव के वातावरण, जनजीवन और प्रकृति का एकसाथ चित्रण—वृद्धाएँ, विधवाएँ, खेत से घर लौटते किसान, पशु-पक्षी और व्यापारी सभी इस चित्र में उपस्थित हैं।
  • 4काव्य-सौंदर्य: कविता में तुलनात्मक चित्रों का प्रयोग दृश्य को मूर्त और सजीव बनाता है—जैसे "तट पर बगुलों-सी वृद्धाएँ" और "दीप शिखा-सा ज्वलित कलश / नभ में उठकर करता नीराजन" (ये उपमान पाठ में प्रयुक्त हैं)।
  • 5सामाजिक चेतना: लाला (किराना-दुकानदार) के मन में दरिद्रता और शोषण के प्रश्न उठते हैं; कवि कल्पना करता है—"कर्म और गुण के समान ही / सकल आय-व्यय का हो वितरण" और "व्यक्ति नहीं, जग की परिपाटी / दोषी जन के दुःख क्लेश की।"
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Jaag Tujhko Dur Jana, Sab Ankho Ki Aasu Ujle

NCERT Class 11 Hindi Antra Jaag Tujhko Dur Jana महादेवी वर्मा द्वारा रचित एक जागरण गीत है जो स्वाधीनता आंदोलन की प्रेरणा से लिखा गया है। इसमें मोह-माया के कोमल बंधनों से मुक्त होकर भीषण कठिनाइयों के बावजूद अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहने का आह्वान किया गया है।

  • 1कवयित्री: महादेवी वर्मा का जन्म फ़र्रुखाबाद (उत्तर प्रदेश) में हुआ; प्रयाग विश्वविद्यालय से संस्कृत में एम.ए. किया; प्रयाग महिला विद्यापीठ में दीर्घकाल तक प्राचार्य के पद पर कार्य किया।
  • 2विधा: कविता (जागरण गीत) — स्वाधीनता आंदोलन और गांधी जी के विचारों की प्रेरणा से रचित; गौतम बुद्ध के दर्शन का भी गहरा प्रभाव।
  • 3केंद्रीय भाव: मोह-माया के कोमल बंधनों के आकर्षण से मुक्त होकर, भीषण कठिनाइयों की चिंता किए बिना, अपने लक्ष्य की ओर निरंतर बढ़ते रहने का आह्वान; "जाग तुझको दूर जाना" टेक के रूप में बार-बार आता है।
  • 4काव्य-सौंदर्य: कवयित्री ने नए बिंबों और प्रतीकों का प्रयोग किया है; हिमगिरि, विद्युत-शिखा, मोम के बंधन, दीपक-पतंग जैसे चित्र मन पर गहरी छाप छोड़ते हैं; गीतों की विशेषता लाक्षणिकता, चित्रमयता और रहस्याभास है।
  • 5पुरस्कार: भारत सरकार द्वारा पद्मभूषण से सम्मानित; 'यामा' के लिए भारतीय ज्ञानपीठ पुरस्कार प्राप्त।
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Badal Ko Ghirte Dekha Hai

NCERT Class 11 Hindi Antra Badal Ko Ghirte Dekha Hai — यह कविता नागार्जुन (1911-1998) द्वारा रचित है, जिसमें हिमालय की बर्फ़ीली घाटियों में बादल के कोमल और कठोर दोनों रूपों का तथा किन्नर-किन्नरियों के जीवन का यथार्थ चित्रण किया गया है।

  • 1कवि नागार्जुन (1911-1998) का मूल नाम वैद्यनाथ मिश्र था; जन्म बिहार के दरभंगा जिले में, निवास मधुबनी जिले में; मैथिली में 'यात्री' नाम से रचना करते थे और 1936 में श्रीलंका जाकर बौद्ध धर्म में दीक्षित हुए।
  • 2विधा: कविता। काव्य-भाषा में एक ओर संस्कृत काव्य परंपरा की प्रतिध्वनि है, तो दूसरी ओर बोलचाल की भाषा की रवानी और जीवंतता भी। भाव और भाषा की दृष्टि से कविता कालिदास और निराला की परंपरा से जुड़ती है।
  • 3केंद्रीय भाव: कवि ने हिमालय की बर्फ़ीली घाटियों में बादल के कोमल और कठोर दोनों रूपों का वर्णन किया है — मानसरोवर के कमलों पर शीतल ओस-कण से लेकर 'महामेघ को झंझानिल से गरज-गरज भिड़ते' तक।
  • 4प्रमुख चित्र: मानसरोवर के स्वर्णिम कमलों पर तुहिन कण; हिमालय की झीलों में समतल देशों से आए हंसों का तिरना जो विसतंतु (कमलनाल के कोमल रेशे) खोजते हैं; वसंत के सुप्रभात में चकवा-चकई का प्रणय-कलह; दुर्गम घाटी में कस्तूरी मृग का अपनी ही उन्मादक सुगंध के पीछे भटकना।
  • 5कालिदास और मेघदूत का संदर्भ: कवि 'कहाँ गया धनपति कुबेर वह, कहाँ गई उसकी वह अलका' पूछते हुए मेघदूत के काव्य-जगत को खोजता है और अंततः कहता है — 'जाने दो, वह कवि-कल्पित था' — इस प्रकार यथार्थ और कल्पना का अंतर रेखांकित करता है।
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Hastakshep

NCERT Class 11 Hindi Antra Hastakshep श्रीकांत वर्मा (सन् 1931–1986) द्वारा रचित एक कविता है जिसमें 'मगध' के प्रतीक द्वारा उस निरंकुश व्यवस्था का चित्रण है जहाँ जनता भय के कारण छींकती-चीखती-टोकती तक नहीं, और अंततः एक मुर्दा ही "मनुष्य क्यों मरता है?" पूछकर हस्तक्षेप करता है।

  • 1कवि परिचय: श्रीकांत वर्मा (सन् 1931–1986), जन्म बिलासपुर, मध्य प्रदेश; सन् 1956 में नागपुर विश्वविद्यालय से हिंदी में एम.ए.; पत्रकार के रूप में साहित्यिक जीवन की शुरुआत; श्रमिक, कृति, दिनमान और वणिर्का पत्रों से संबद्ध रहे।
  • 2विधा: कविता; प्रमुख काव्य संग्रह — भटका मेघ, दिनारंभ, मायादर्पण, जलसाघर और मगध।
  • 3पुरस्कार: मध्य प्रदेश सरकार द्वारा तुलसी पुरस्कार, आचार्य नंददुलारे वाजपेयी पुरस्कार और शिखर सम्मान; केरल का कुमारन आशान राष्ट्रीय पुरस्कार।
  • 4केंद्रीय भाव: सत्ता की क्रूरता और उसके कारण पैदा होनेवाले प्रतिरोध का चित्रण — व्यवस्था को निरंकुश होने से बचाने के लिए हस्तक्षेप अनिवार्य है।
  • 5'मगध' प्रतीक: एक ऐसी व्यवस्था जहाँ विरोध की कोई गुंजाइश नहीं; नागरिक 'इस डर से' छींकते-चीखते-टोकते तक नहीं कि शांति भंग न हो जाए या 'टोकने का रिवाज न बन जाए।'
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Ghar Mein Waapsi

NCERT Class 11 Hindi Antra Ghar Mein Waapsi कविता सुदामा पांडेय 'धूमिल' द्वारा रचित है, जो पाठ्यपुस्तक 'अंतरा' में संकलित है। इस कविता में गरीबी से संघर्षरत एक परिवार की व्यथा और रिश्तों की अव्यक्त पीड़ा को चित्रित किया गया है।

  • 1कवि परिचय: सुदामा पांडेय 'धूमिल' (सन् 1936-1975); जन्म वाराणसी के पास खेवली गाँव में; सन् 1958 में आई-टी-आई- वाराणसी से विद्युत डिप्लोमा; अनुदेशक पद पर नियुक्त; ब्रेन ट्यूमर से असमय निधन।
  • 2काव्य-संग्रह: 'संसद से सड़क तक', 'कल सुनना मुझे' और 'सुदामा पांडेय का प्रजातंत्र'; मरणोपरांत साहित्य अकादमी पुरस्कार।
  • 3विधा व भाषा-शैली: साठोत्तरी समकालीन कविता; भाषा में गँवईपन, भदेसपन और मुहावरेदार तेज़ी जो व्यंग्य को धारदार और कविता को असरदार बनाती है।
  • 4केंद्रीय भाव: परिवार में प्रेम और रिश्ते होते हुए भी गरीबी की दीवार उन्हें खुलकर व्यक्त होने से रोकती है — 'क्योंकि हम पेशेवर गरीब हैं।'
  • 5पाँच जोड़ी आँखों का चित्रण: माँ = तीर्थ-यात्र की बस के दो पंचर पहिए (थकी-रुकी); पिता = लोहसाँय की ठंडी शलाखें (जड़, निष्क्रिय); बेटी = दीवट पर जलते घी के दो दिए (उज्ज्वल); पत्नी = आँखें नहीं, हाथ हैं जो थामे हुए हैं।

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