Class 3 Hindi

Chapter 17 — बोलने वाली माँद

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Overview

Summary

पाठ 17 — "बोलने वाली माँद" कक्षा 3 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा का एक चतुराई भरी कहानी है जिसमें सियार दधिपुच्छ अपनी बुद्धि से सिंह खरनखर को माँद से बाहर निकालने का उपाय करता है।

  • कहानी का सारांशजंगल में भूखा सिंह खरनखर एक माँद में छिप जाता है। माँद का मालिक सियार दधिपुच्छ पैरों के निशान देखकर खतरा भाँप लेता है और माँद को आवाज़ लगाने का नाटक करता है। सिंह उसका जवाब दे देता है और सियार जान बचाकर भाग जाता है।
  • मुख्य पात्रसिंह का नाम खरनखर और सियार का नाम दधिपुच्छ है। सिंह ताकतवर पर भोला है, जबकि सियार छोटा पर चतुर है।
  • लेखक और स्रोतयह कहानी भगवान सिंह द्वारा लिखी गई है और नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित 'पंचतंत्र की कहानियाँ' से ली गई है।
  • कहानी की सीखकठिन समय में बुद्धि और सूझबूझ से काम लेना ज़रूरी है। सियार ने ताकत से नहीं, समझदारी से अपनी जान बचाई।
Essentials

Key points & formulas

  1. 01सिंह खरनखर को पूरे जंगल में भूख के बावजूद एक चूहा तक नहीं मिला।
  2. 02सिंह रात काटने के लिए दधिपुच्छ की माँद में छिप गया।
  3. 03सियार ने माँद के द्वार पर पैरों के निशान देखकर खतरा पहचाना।
  4. 04सियार ने माँद को पुकारा — 'ऐ मेरी माँद' — और कहा कि माँद जवाब न दे तो वह दूसरी माँद में जाएगा।
  5. 05सिंह ने विश्वास किया कि माँद सच में बोलती है और उसने दहाड़कर जवाब दे दिया।
  6. 06सियार वहाँ से यह कहते हुए चंपत हो गया कि आज तक उसने किसी माँद को बोलते नहीं सुना।
  7. 07कहानी पंचतंत्र की कहानियों से ली गई है, जो भगवान सिंह द्वारा लिखी गई हैं।
Questions

Frequently asked questions

01

बोलने वाली माँद कहानी किस पाठ्यपुस्तक में है?

यह कहानी कक्षा 3 की एनसीईआरटी हिंदी पाठ्यपुस्तक वीणा का पाठ 17 है।

02

इस कहानी के मुख्य पात्र कौन हैं?

इस कहानी में दो मुख्य पात्र हैं — सिंह का नाम खरनखर और सियार का नाम दधिपुच्छ है।

03

सिंह माँद में क्यों घुसा?

सिंह को पूरे जंगल में भटकने के बाद भी कोई शिकार नहीं मिला और शाम हो गई, इसलिए वह रात काटने के लिए उस माँद में घुस गया।

04

सियार को कैसे पता चला कि माँद में सिंह बैठा है?

सियार ने माँद के द्वार पर पैरों के निशान देखे। निशान माँद की ओर जाने के थे, पर लौटने के नहीं थे। इससे उसे समझ आया कि भीतर कोई सिंह छिपा है।

05

सियार ने सिंह को माँद से बाहर निकालने के लिए क्या उपाय किया?

सियार ने माँद के द्वार पर जाकर आवाज़ लगाई — 'ऐ मेरी माँद, ऐ मेरी माँद।' उसने नाटक किया कि माँद हमेशा उसे जवाब देती है, और अगर आज जवाब नहीं दिया तो वह दूसरी माँद में चला जाएगा।

06

सिंह ने माँद के बुलावे का जवाब क्यों दिया?

सिंह को विश्वास हो गया कि माँद सच में बोलती है। उसने सोचा कि अगर वह चुप रहा तो हाथ आया शिकार चला जाएगा, इसलिए उसने दहाड़कर जवाब दे दिया।

07

सिंह की दहाड़ सुनकर क्या हुआ?

सिंह की दहाड़ से माँद गूँज उठी और आस-पास के पशु भी चौकन्ने हो गए। सियार वहाँ से भाग गया।

08

सियार ने भागते समय क्या कहा?

सियार ने कहा कि इस वन में रहते हुए वह बूढ़ा हो गया, पर आज तक कभी किसी माँद को बोलते नहीं सुना था।

09

यह कहानी किसने लिखी है?

यह कहानी भगवान सिंह ने लिखी है और नेशनल बुक ट्रस्ट से प्रकाशित 'पंचतंत्र की कहानियाँ' से साभार ली गई है।

10

इस कहानी से क्या सीख मिलती है?

इस कहानी से सीख मिलती है कि कठिन समय में बुद्धि से काम लेना ज़रूरी है। सियार ने ताकत नहीं, चतुराई से अपनी जान बचाई।

11

माँद क्या होती है?

माँद का अर्थ है गुफा — वह जगह जहाँ जानवर रहते हैं। कहानी में दधिपुच्छ सियार एक माँद में रहता था।

12

वीणा पाठ्यपुस्तक में यह पाठ किस इकाई में है?

यह पाठ इकाई 5 — हमारा देश में है और पाठ संख्या 17 है।

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