Summary
NCERT Class 11 Hindi Vitan Bharatiya Kalayen एक निबंध है जो भारत की तीन प्रमुख कलाओं — चित्रकला, संगीत कला और नृत्य कला — का ऐतिहासिक एवं सांस्कृतिक परिचय देता है। यह पाठ लोककला से शास्त्रीय कला तक के विकास-क्रम को प्रकृति और जीवन से जोड़कर प्रस्तुत करता है।
यह निबंध बताता है कि भारत उत्सवधर्मी देश है और विविध कलाएँ उसकी अनूठी पहचान हैं। चित्रकला की परंपरा भीमबेटका की शैल-गुफाओं से शुरू होकर अजंता-एलोरा, मधुबनी, पटचित्र और वरली तक फैली है। संगीत की जड़ें वैदिक काल में हैं जहाँ मार्गी और देसी दो धाराएँ थीं, और भरत मुनि के नाट्यशास्त्र ने इसे शास्त्रीय स्वरूप दिया। नृत्य भी लोक से शास्त्र तक की यात्रा तय कर कथकलि, कत्थक, भरतनाट्यम जैसी परंपराओं में ढला। सभी कलाएँ परस्पर जुड़ी हैं और 'वसुधैव कुटुंबकम' की भावना को व्यक्त करती हैं।
Key points & formulas
- 01विधा: निबंध (गद्य) — वितान, कक्षा 11 हिंदी, पाठ 4; पाठ में लेखक का नाम उल्लिखित नहीं है।
- 02केंद्रीय भाव: भारतीय कलाएँ — चित्रकला, संगीत और नृत्य — जनजातीय/लोककला से उत्पन्न होकर धीरे-धीरे शास्त्रीय स्वरूप में ढलीं; दोनों के बीच का संवाद ही उनकी शक्ति है।
- 03चित्रकला: सबसे प्राचीन नमूने शैल चित्र हैं जो गुफाओं में मिलते हैं — मध्यप्रदेश में भीमबेटका प्रसिद्ध है; अजंता-एलोरा, एलीफैंटा, महाबलिपुरम और तंजौर भी उल्लेखनीय हैं; मधुबनी, पटचित्र, वरली, कलमकारी, फुलकारी लोककलाएँ हैं।
- 04संगीत कला: वैदिक काल (~पाँच हज़ार वर्ष पूर्व) से चली आ रही है; दो धाराएँ — मार्गी (धार्मिक, नियमबद्ध) और देसी (लोक, समूह में); भारतीय संगीत सुर/ताल, राग और काल से संबद्ध है; भैरव ब्रह्ममुहूर्त में, मेघ सुबह में, दीपक/श्रीराग दोपहर में, कौशिक/हिंडोला रात में गाए जाते हैं।
- 05नृत्य कला: आधार भरतमुनि का नाट्यशास्त्र है; नर्त्य = अभिनय (शब्द और भंगिमा), नृत्य = भाव और भंगिमा; शास्त्रीय नृत्य: कथकलि, मोहिनीअट्टम (केरल), कत्थक (उत्तरप्रदेश), कुचिपुड़ी (आंध्रप्रदेश), ओडिशी (उड़ीसा), मणिपुरी (मणिपुर), भरतनाट्यम (कर्नाटक/तमिलनाडु), सत्रिय (असम)।
- 06भारतीय कला का विस्तार: पाठ में उद्धृत है — 'हिंदुस्तान के अंदर की ही हिंदुस्तानी कला को जानना उसकी आधी ही कहानी जानने के बराबर है'; कला मध्य-एशिया, चीन, जापान, तिब्बत, बर्मा, स्याम, कंबोडिया और जावा तक फैली।
- 07शब्दार्थ (पाठ में स्पष्ट): मार्गी = धार्मिक समारोहों से जुड़ा, नियम-अनुशासन से बँधा संगीत; देसी = लोक से जुड़ा, समूह में गाया जाने वाला संगीत; नर्त्य = अभिनय जिसमें शब्द और भंगिमा महत्वपूर्ण हैं।
- 08भर्तृहरि का उद्धरण (नीतिशतक): 'साहित्यसंगीतकलाविहीनः, साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः' — अर्थ पाठ में दिया है: साहित्य संगीत कला से विहीन मनुष्य साक्षात बिना पूँछ के पशु के समान होता है।
Frequently asked questions
01Bharatiya Kalayen (भारतीय कलाएँ) पाठ किस बारे में है?
यह पाठ भारत की तीन प्रमुख कलाओं — चित्रकला, संगीत और नृत्य — का ऐतिहासिक परिचय देता है और बताता है कि ये सभी कलाएँ लोककला की जड़ों से विकसित होकर शास्त्रीय रूप में ढलीं। यह भारत के उत्सवधर्मी और विविध सांस्कृतिक स्वरूप को भी रेखांकित करता है।
02भारतीय कलाएँ पाठ में किन तीन कलाओं का वर्णन है?
पाठ में चित्रकला, संगीत कला और नृत्य कला — इन तीन प्रमुख कलाओं का विस्तृत वर्णन है।
03Bhimbaithka ki gufa kahan hai aur is path mein uska kya ullekh hai?
भीमबेटका की गुफाएँ मध्यप्रदेश में हैं। पाठ के अनुसार ये शैल चित्रों के लिए जानी जाती हैं — चट्टानों पर प्राकृतिक रंगों से बने इन चित्रों में शिकार, नृत्य, संगीत, जानवर, युद्ध, साज-सज्जा सभी कुछ दिखाई पड़ता है।
04भरत मुनि के नाट्यशास्त्र का इस पाठ में क्या महत्व बताया गया है?
पाठ में बताया गया है कि भरत मुनि के नाट्यशास्त्र में संगीत, नृत्य-अभिनय कलाओं को शास्त्रीय स्वरूप मिला। यह 'कला के लिए अब तक का प्राप्त सबसे महत्वपूर्ण शास्त्र है'। नृत्य में नर्त्य और नृत्य का भेद भी इसी ग्रंथ से आता है।
05Vitan Class 11 ke Bharatiya Kalayen path mein margi aur desi sangeet mein kya antar hai?
पाठ के अनुसार मार्गी संगीत धार्मिक समारोहों से जुड़ा था और नियम तथा अनुशासन से बँधा था, जबकि देसी संगीत लोक से जुड़ा था और लोक रुचि के अनुसार समूह में गाया जाता था।
06भारतीय कलाएँ पाठ में कौन से शास्त्रीय नृत्यों का उल्लेख है?
पाठ में कथकलि और मोहिनीअट्टम (केरल), कत्थक (उत्तरप्रदेश), कुचिपुड़ी (आंध्रप्रदेश), ओडिशी (उड़ीसा), मणिपुरी (मणिपुर), भरतनाट्यम (कर्नाटक और तमिलनाडु), और सत्रिय (असम) का उल्लेख है।
07रंगोली को अलग-अलग राज्यों में क्या-क्या नाम दिए गए हैं?
पाठ के अनुसार: उत्तराखंड में ऐपण, राजस्थान में मंडवा, गुजरात में सत्तिया, महाराष्ट्र में रंगोली, बिहार में अरिपन, मध्यप्रदेश और उत्तरप्रदेश में चौकपूरना, और दक्षिण भारत में कोलम।
08Bharatiya Kalayen mein Bharatrihari ka kaunsa shloka uddhrut hai?
पाठ में भर्तृहरि के नीतिशतक से यह उद्धरण दिया गया है: 'साहित्यसंगीतकलाविहीनः, साक्षात्पशुः पुच्छविषाणहीनः' — जिसका अर्थ पाठ में ही दिया है: साहित्य संगीत कला से विहीन मनुष्य साक्षात बिना पूँछ के पशु के समान होता है।
09मधुबनी चित्रकला कहाँ की है और इस पाठ में इसका क्या उल्लेख है?
मधुबनी चित्रकला मिथिला की है। पाठ में बताया गया है कि यह बहुत प्रसिद्ध है और आज भी कलाकार अपनी इस कला को जिंदा रखे हुए हैं; आज के राष्ट्रीय और अंतर्राष्ट्रीय बाज़ार में इन लघु लोककलाओं की बहुत माँग है।
10भारतीय कला का विस्तार किन देशों में हुआ, इस पाठ के अनुसार?
पाठ में उद्धृत है कि भारतीय कला को पूरी तरह समझने के लिए मध्य-एशिया, चीन, जापान, तिब्बत, बर्मा, स्याम तथा कंबोडिया और जावा तक देखना चाहिए जहाँ इसने नए रूप और सौंदर्य धारण किए।
11Bharatiya Kalayen path mein nartya aur nritya mein kya antar bataya gaya hai?
पाठ के अनुसार नर्त्य का अर्थ अभिनय है जिसमें शब्द और भंगिमा महत्वपूर्ण हैं, जबकि नृत्य में भाव और भंगिमा महत्वपूर्ण हैं। ये दोनों अभिनय के अलग-अलग रूप हैं और भरतमुनि के नाट्यशास्त्र में मिलते हैं।
12गुप्त साम्राज्य और भारतीय कलाओं का क्या संबंध है?
पाठ में बताया गया है कि चौथी से छठी सदी के बीच गुप्त साम्राज्य कलाओं के लिए स्वर्ण युग कहलाता है। अजंता की गुफाएँ उन्हीं दिनों खोदी गईं और उनकी दीवारों पर चित्र बनाए गए। पाठ के अनुसार कलाएँ गुप्त साम्राज्य में पराकाष्ठा पर पहुँच गईं।
13क्या इस पाठ का PDF मुफ़्त डाउनलोड कर सकते हैं?
हाँ, यह मुफ़्त है, बिना साइन-अप।
More chapters in Vitan
This is the complete Vitan Chapter 4 as published by NCERT — every diagram, solved example, and exercise included, free. Browse all NCERT Class 11 textbooks.
Read offline with notes, solutions & mock tests
CBSE Prepmaster — free on iOS & Android